Monday, October 8, 2007

इब्बार रब्बी की पड़ताल


तो कबाड़ी भाइयो!
नये कबाड़ी की राम-राम.
पेश है कबाड़ी महासंघ के महासचिव की एक कविता उन्हीं के स्वर में.






5 comments:

  1. क्या बात है इरफ़ान। बहुत शानदार कविता और कबाड़खाने मैं पहली आवाज़। रब्बी साब मेरे भी बहुत पसन्दीदा हैं। अब मचेगा धमाल।

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  2. Mujhe nahin maloom ki isme hindi mein mein kaise likhte hain. Lekin tum log net kaa bhi kabhaar kar daloge.
    Rajiv

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  3. हमारे अहोभाग्य कि 'नैनीताल समाचार' की तरफ से पहली बार कोई तारीफ सुनने को मिली। स्वागत है दाज्यू। बढ़िया दाम पर लिया जाएगा आपका कबाड़। सादर।

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  4. बस साब, एक बार `बब्बा´ से धात लगवा दो तो आंदोलन वाले कबािड़यों की जमात भी पूरी हो जाएगी। राजीव दा का कबाड़खाने में स्वागत। हिंदी में लिखना सीखने के लिए कृपया जब नेट पर बैठें हों, मोबाइल पर संपर्क साधें।

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