
कुमार गन्धर्व जी का गाया कबीरदास का एक अदभुत भजन। मालवे में रहने वालों के लिए ज्यादे ही खास।
कौन ठगवा नगरिया लूटल हो ।।
चंदन काठ के बनल खटोला
ता पर दुलहिन सूतल हो।
उठो सखी री माँग संवारो
दुलहा मो से रूठल हो।
आये जम राजा पलंग चढ़ि बैठा
नैनन अंसुवा टूटल हो
चार जाने मिल खाट उठाइन
चहुँ दिसि धूं धूं उठल हो
कहत कबीर सुनो भाई साधो
जग से नाता छूटल हो
(३ मिनट ८ सेकेंड)
आपके ब्लॉग का फैन हूं। मैं भी और परिवार के बाकी लोग भी।
ReplyDeletenaayaab cheez sunvaaney ka bahut aabhaar..
ReplyDeleteजबर्दस्त आनंदमय प्रस्तुति.
ReplyDeleteअगर 'भोला मन जाने अमर मेरी काया ' सुनवा दें कुमार गन्धर्व की आवाज़ में तो कुछ आनंद और आ जाये ।
ReplyDeleteआनंद आ गया । आजकल आप कुछ दिलचस्प चीजें इफरात में पेश कर रहे हैं । अच्छा है ।
ReplyDeleteदिव्य है !!!
ReplyDeleteलाखों बार आभार.....इस निर्गुन-भजन को सुनाने के लिए
ReplyDeleteभोर के पवन के सामान शीतल और शुद्ध भजन |
ReplyDeleteसारगर्भित रचना सुनवाने हेतु आभार.
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