Sunday, September 22, 2013

ओ पैली खानी चूहा पंछी फिर खाये किसाना - गोपाल बाबू गोस्वामी


गोपाल बाबू गोस्वामी कुमाऊँनी के सबसे लोकप्रिय गायकों में से थे. कोई पांचेक साल पहले मैंने इस ब्लॉग पर उन्हें और उनके संगीत को लेकर एक पोस्ट  (अलखतै बिखौती मेरि दुर्गा हरै गे: कुमाऊंनी लोकगीत गोपाल बाबू गोस्वामी की आवाज़ में) लगाई थी.

कल रात अग्रज और कवि श्री संजय चतुर्वेदी ने गोपाल बाबू के एक गीत की बाबत एक अच्छा सा एस एमएस भेजा था. हमारे बीच इस गीत और गोपाल बाबू को लेकर पहले भी काफ़ी बातें हो चुकी थीं.

‘रुपसा रमोती’ कुमाऊँनी जनता के बीच एक सुपरहिट की हैसियत बना चुका है. जीजा साली की सनातन ठिठोली की परम्परा पर बना यह गीत ठेठ लोकगीतों के मर्म को जिस ग़ज़ब तरीके से पकड़ता है वह बेमिसाल है.

बोल दिए जा रहे हैं. और थोड़ा सा मेहनत से सुनकर आप इसका अर्थ वैसे ही समझ जाएंगे.

यह पोस्ट “ये शायरी में हो रिया है क्या वबाल बाऊजी” वाले अद्वितीय जनाब संजय चतुर्वेदी की नज़र की जाती है. 

(फ़ोटो – अभिनेता मित्र अनिल घिल्डियाल के साथ युवा गोपालबाबू का एक दुर्लभ चित्र. सुर्ख कमीज़ पहने गोपाल गोस्वामी हैं.)



रुपसा रमोती घुंगुर ना बाजा छुम छुमा

ओ रुपसा रमोती घुंगुर ना बाजा छम
छुमा रुपसा रमोती घुंगुर ना बाजा छम
छुमा जागी जा, माठु-माठु जूंलौ, किलै जैंछे चम
छमा रुपसा रमोती, घुंगुर ना बाजा छुम

दैऽऽऽऽ रुपसाऽऽऽऽऽऽ मै खै देली, मैं टोकेली
हलिया हल बाये, छ्म छ्म बोये धाना   
ओ पैली खानी चूहा पंछी फिर खाये किसाना   
फिर खाये किसाना दै किहुण कौंछे खण्यूणी द पै घुंगुर ना बाजा छुम छुम   
ओ बुड़िये कि ज्वाना, घुंगुर ना बाजा छुम छुमा
बुड़िये कि ज्वाना, घुंगुर ना बाजा छुम छुमा रुपसा रमोती, घुंगुर ना बाजा छुम


दैऽऽऽऽ रुपसाऽऽऽऽऽऽ   खैमरे की पायी, किलमोड़ी झन खैये गीच होली कायी   
गीच होली कायी, मैं तेरो रंगील भिना; तू रंगीली सायी, घूंगुरु ना बाजा छुम छुमा
 
तू रंगीली सायी घुंगुर ना बजा छुम   
छुमा तू रंगीली साई घुंगुर ना बजा छुम   
छुमा रुपसा रमोती, घुंगुर ना बाजा छुम   
छुमा रुपसा रमोती, घुंगुर ना बाजा छुम

दैऽऽऽऽ रुपसाऽऽऽऽऽऽ   मै खै देली, मैं टोकेली,
ताल को जड़िया अस्सी में बल्द ल्याऊं पुछ्ड़ झड़िया   
पुछ्ड़ झड़िया, ख्वार में गागर तेरो पाणी को भरिया   
ओ माठु माठु हिट चकोरा घुंगुर ना बाजा छुम   
ओ मेरी हौंसिया घुंगुर ना बाजा छुम छुमा    
ओ मेरी हौंसिया घुंगुर ना बाजा छुम

रुपसा रमोती, घुंगुर ना बाजा छुम

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