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अवधबिहारी श्रीवास्तव
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Sunday, December 9, 2007
अवध बिहारी श्रीवास्तव की कविता
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कवि अवधबिहारी श्रीवास्तव की इस कविता पर मन मुग्ध हो गया। इसमें व्याप्त करूणा , बेबसी बेचैन करने वाली है। बिना किसी आडंबर के सरल-सहज बानी में...
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