Friday, March 6, 2015

कि खूंटा यहीं गड़ेगा... जोगीरा सा रा रा रा - होली स्पेशल

दुनियावालो, होली है!
(फ़ोटो: http://tuningpp.com/से साभार) 
जोगीरा सा रा र रा ...  

-मृत्युंजय  

आर्जवर्त में चार ठो खंभा, चारो को घुन खाय
साहेब बैठि अदानी के घर घंटा रहे बजाय 
कि खूंटा यहीं गड़ेगा... जोगीरा सा रा रा रा
अमरीकी आका के आगे, पोंछिया रहे डोलाय 
मुदित मीडिया ओबामा संग, फोटो पे बलखाय 
कि खूंटा यहीं गड़ेगा... जोगीरा सा रा रा 

कैसे उपजे दूध चिरौंजी, कहवां से सिल-बट्टा 
कौन लंठ है पीसनवारा, रंग करे सब खट्टा
कि खूंटा यहीं गड़ेगा... जोगीरा सा रा रा रा
मेहनत उपजे दूध-चिरौंजी, खनन मिले सिल-बट्टा 
फेंकुआ साहेब पीसनवारा, रंग करे सब खट्टा
कि खूंटा यहीं गड़ेगा... जोगीरा सा रा रा रा

केकरे आगे साहेब लोटें देखते कटे उदासी । 
साहेब के साहेब के साहेब कौन देस के बासी
कि खूंटा यहीं गड़ेगा... जोगीरा सा रा रा रा
अनिल के आगे साहेब लोटें देखते कटे उदासी । 
साहेब के साहेब के साहेब अमरीका के वासी
कि खूंटा यहीं गड़ेगा... जोगीरा सा रा रा रा

साधू साध्वी कुंठा बूकें जोगी हौ दंगाई । 
केकरे घर में जग्ग होत है केकर चाम चोराई
कि खूंटा यहीं गड़ेगा... जोगीरा सा रा रा रा
साधू साध्वी कुंठा बूकें जोगी हौ दंगाई 
अंबानी घर जग्ग होत है हमरा चाम चोराई ॥
कि खूंटा यहीं गड़ेगा... जोगीरा सा रा रा रा 

केकरे खपड़ा मोथा जामे केकरे जमे मकोय 
दूध दही सूसू घी टट्टी के खाये सुख होय 
रसीले पंचगव्य की जय,
बुद्धि के विंध्याचल की जय, जोगीरा सा रा रा रा ...
रामदेव के मोथा जामे, साध्वी घरे मकोय 
दूध दही सूसू घी टट्टी संघिन के सुख होय 
रसीले पंचगव्य की जय,
बुद्धि के विंध्याचल की जय, जोगीरा सा रा रा रा ...

आसमान में बांस खोंस दें खोंस जनेऊ कान 
फेसबुक पर पिंगल झारें बड़े बड़े बिदवान 
कि खूंटा यहीं गड़ेगा ... जोगीरा सा रा रा रा
भोरे बिहाने कुत्ता बोले, सांझा बोले कागा 
फेसबुकी सब कथरी सीवें बिन सुई बिन धागा 
कि खूंटा यहीं गड़ेगा ... जोगीरा सा रा रा रा

मैं मैं मैं मैं मेरा मुझको मुझसा मेरी मेरा 
मद में मातल ई दंगाई जड़ में माठा घोरा
कि खूंटा यहीं गड़ेगा ... जोगीरा सा रा रा रा

बजट बकैती ठेलूँ मैं तुम कान पकड़ कर उठ बैठो 
पीठ तुम्हारी सदा सोहागिन डंटा मेरे बाप का
कि खूंटा यहीं गड़ेगा ... जोगीरा सा रा रा रा
देस नदी में जनता मछरी कार्पोरेट मछेरे सब 
गलफर चीर के जो घुस जावे कंटा मेरे बाप का 
कि खूंटा यहीं गड़ेगा ... जोगीरा सा रा रा रा
चकवढ़ खावो हवा पियो तुम हम बिकास ठेलवाते हैं 
गोंहू-चावल, मैदा मिसिरी भंटा मेरे बाप का
कि खूंटा यहीं गड़ेगा ... जोगीरा सा रा रा रा

जै बिकास के ललका चाउर जै बतरा का पतरा 
तर्क-बुद्धि पे खेत-खान पे अर्धपैंट का खतरा
कि खूंटा यहीं गड़ेगा ... जोगीरा सा रा रा रा
बानर बाहर बानर भीतर बनरन के सरकार 
लिहो लिहो होली के नारा चोइंटा देई झार 

कि खूंटा यहीं गड़ेगा ... जोगीरा सा रा रा रा

Thursday, March 5, 2015

मैं अकेली घरे रंग घोरि खड़ी, फगुवा करकावे करेज सखी - मृत्युंजय के साथ होली

फ़ोटो: रोहित उमराव 

फेसबुक पर इन दिनों होली काव्य महोत्सव चल रहा है कबाड़ी मृत्युंजय के हाँ. वहीं से कुछ माल इकठ्ठा करके भेजा है स्वयं कवि-कबाड़ी ने. थैंक्यू मृत्युंजय!

कल होली भर मौज लेने के लिए सुबह सात बजे पुनः इस अड्डे पर तशरीफ़ लावें.

फ़ोटो: रोहित उमराव 

फगुवा-1

आ गइलें आ गइलें आ गइलें हो 
सखी फागुन के दिनवा आ गइलें हो
सखी मिली दहीबरा गुझिया बनावें 
अमिया पोदीना महका गइलें हो 
सखी फागुन के दिनवा...
लाल पीयर हरियर अ भंटहवा पोति के 
उज्जर दाँत चमका गइलें हो 
सखी फागुन के दिनवा...
खनन-खन्न हवा बहे टेसू के बाग में 
तहियावल सपन उधरा गइलें हो 
सखी फागुन के दिनवा...

फ़ोटो: रोहित उमराव 

फगुवा-2

अँखिया भर धीरज भेज सखी, 
रंगरेज सखी रंगरेज सखी ...
पछुवां रस बाउर डोल रही, कोइलिया कैसे क बोल रही 
तोर देस-देहात बड़ा जुलुमी सूलिया उपरा धरे सेज सखी 
रंगरेज सखी रंगरेज सखी...

होलिया के दिना नगिचाई गए, सब नाचत गावत आइ गए 
मैं अकेली घरे रंग घोरि खड़ी, फगुवा करकावे करेज सखी 
रंगरेज सखी रंगरेज सखी...

गंभीर चिन्तनरत मृत्युंजय

हाईकू जैसी पेंटिंग - न्गुयेन थानाह बिन के चित्र - 3



















हाईकू जैसी पेंटिंग - न्गुयेन थानाह बिन के चित्र - 2




















हाईकू जैसी पेंटिंग - न्गुयेन थानाह बिन के चित्र - 1

न्गुयेन थानाह बिन
न्गुयेन थानाह बिन समकालीन वियतनाम के बड़े चित्रकारों में शुमार होते हैं. वे इधर लोकप्रिय होती जा रही मिनिमलिस्ट पेंटिंग शैली के मुरीद हैं. अपने काम के बारे में उनका कहना है: “मैं किसी ट्रेंड वगैरह में यकीन नहीं रखता. मैं सिर्फ सौन्दर्य को तलाश रहा हूँ – ऐसा सौन्दर्य जिसे मैं हर किसी के साथ बाँट सकूं. मेरी पेंटिंग्स की संरचना देखनेवाले को बताती है कि उनकी सतह के नीचे दरअसल है क्या. मेरे काम का उद्देश्य है नैरेटिव को सघनित बनाते जाना – जैसे जापानी हाईकू होती है.”