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अशोक वाजपेयी
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Monday, September 8, 2008
'ऐसे घटिया आदमी से रिश्ता नहीं रखा जा सकता'
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आज सोचने पर लगता है कि अगर उन्होंने लिखने को आजीविका नहीं बनाया होता तो शायद कहानी कुछ और होती. अब होता यह था कि वह नाराज़ होते या खुश होते ल...
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Friday, September 5, 2008
'मार्केट है यह जिसे हिन्दी साहित्य-जगत कह रहे हो'
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मार्केट है यह जिसे तुम बार-बार हिन्दी साहित्य-जगत कह रहे हो. मार्केट में बिकने के लिए ब्रांड का कोई नाम होना चाहिए. कोई लेबुल लगा होना चाहिए...
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