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नयी दृष्टि
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Sunday, January 18, 2009
यह ग़ालिब की सबसे बड़ी कमजोरी है!
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अव्वल तो शिरीष जी की इसके ठीक पिछली पोस्ट का ये शेर- कहते हो न देंगे हम दिल अगर पड़ा पाया दिल कहां कि गुम कीजे, हमने मुद्दआ पाया खालिस रोमांट...
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