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विलियम कूपर
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Wednesday, April 1, 2009
या करीब आ के ये अमरित मुझे पी लेने दे
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पिछली पोस्ट को जारी रखते हुए पेश है एक और कविता का अनुवाद. मूल रचना अंग्रेज़ी के बड़े कवि विलियम कूपर की है. अनुवाद किया है मुरादाबाद में रहने...
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Tuesday, March 31, 2009
किस कदर सख़्त है रफ़्तारे-ज़माना कुछ सोच
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हाल ही में कबाड़ी बने योगेश्वर सुयाल का लिखा यह परिचय और उनके द्वारा उपलब्ध कराई गई यह सामग्री दुर्लभ और ऐतिहासिक है. अभी कुछ दिन पहले मुनीश...
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