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Saturday, March 7, 2015

हमन है इश्क मस्ताना हमन को होशियारी क्या - दो और स्वर

कबीरदास जी के इस भजन को मैंने आशा भोसले के स्वर में सुनवाने का वादा किया था. अपने कबाड़ में ढूंढते खोजते मुझे एक और नगीना मिल गया. पंडित मधुप मुदगल ने भी इसे गाया था. दोनों से सुनिए –


पहले आशा भोसले –


हमन है इश्क मस्ताना हमन को होशियारी क्या 
रहें आजाद या जग से हमन दुनिया से यारी क्या   

जो बिछुड़े हैं पियारे से भटकते दर-ब-दर फिरते
हमारा यार है हम में हमन को इंतजारी क्या   

खलक सब नाम अपपे को बहुत कर सिर पटकता है
हमन गुरनाम साँचा है हमन दुनिया से यारी क्या   

न पल बिछुड़े पिया हमसे न हम बिछड़े पियारे से
उन्हीं से नेह लागी है हमन को बेकरारी क्या   

कबीरा इश्क का नाता दुई को दूर कर दिल से
जो चलना राह नाज़ुक है हमन सिर बोझ भारी क्या 


अब पंडित मधुप मुदगल-

Tuesday, February 14, 2012

आशा भोसले की आवाज़ में "कौन ठगवा नगरिया लूटल हो"


१९८५ में अमोल पालेकर निर्देशित फिल्म "अनकही" में संगीतकार जयदेव के निर्देशन में आशा भोसले ने कबीरदास जी के विख्यात भजन "कौन ठगवा नगरिया लूटल हो" को स्वर दिया था. इस भजन को पंडित कुमार गन्धर्व की अमर वाणी में आप कबाड़ख़ाने पर पहले सुन चुके हैं.

फिलहाल. मराठी लेखक सी. टी. खानोलकर के नाटक पर आधारित इस फिल्म के संगीत ने दो राष्ट्रीय पुरूस्कार भी जीते थे - जयदेव ने सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का जबकि पंडित भीमसेन जोशी ने सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायन का.

आज सुनिए आशा जी से कबीरदास जी का भजन -

Monday, February 13, 2012

कैसे उनको पाऊँ आलि


संगीतकार जयदेव के संगीतबद्ध किए गए आशा भोसले की गाई जयशंकर प्रसाद रचित "तुमुल कोलाहल" कुछ दिन पहले आप ने सुना था.आज इसी अल्बम से एक और रचना. कविता महादेवी वर्मा जी की है -


कैसे उनको पाऊँ आलि
कैसे उनको पाऊँ

वे आँसू बनकर मेरे
इस कारण ढुल-ढुल जाते
इन पलकों के बन्धन में मैं
बाँध-बाँध पछताऊँ

वे तारक बालाओं की
अपलक चितवन बन जाते
जिस में उनकी छाया भी मैं
छू न सकूँ, अकुलाऊँ