Showing posts with label लोकगीत. Show all posts
Showing posts with label लोकगीत. Show all posts

Friday, June 14, 2013

एक ज़ुलू लोकगीत


मिरियम माकेबा की आवाज़ में एक ज़ुलू लोकगीत –

Monday, July 4, 2011

साडी लम्मियां उडारियां वे ...


पंजाब का यह दर्दभरा विदागीत सुना रही हैं रेशमा. इस रचना का मूल संस्करण मुझसे कहीं खो गया है. इस वाले में आधुनिक वाद्ययन्त्रों का थोड़ा ज़्यादा ही इस्तेमाल हुआ है अलबत्ता रेशमा की गहरी, आत्मा में उतरने वाली, विकल बना देने वाली आवाज़ गीत में सन्तुलन बनाए रखती है. अगर मिल गया तो मैं आपको आज या कल बहुत बड़े गायक तुफ़ैल नियाज़ी की आवाज़ में यही गीत एकदम दूसरी ही लेकिन अधिक पारम्परिक शैली में सुनवाने का जतन करता हूं.