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Thursday, November 16, 2017

क्या भूल गए आप मेरे कच्चे घड़े हो


"रात की रानी की खुशबू से कोई ये कह दे
आज की शब न मेरे पास आए"

- परवीन शाकिर के नाम ज़िया मोहिउद्दीन का ख़त

Saturday, December 12, 2015

ग़ालिब के एक सौ बासठ रुपये और फ़ाकामस्ती


ज़िया मोहिउद्दीन साहब सुनाते हैं चचा ग़ालिब के दो मज़ेदार ख़त -

ग़ालिब पर एक कहन ये भी

'द डेड मैन वॉक्स' में डेंजर मैन की भूमिका में ज़िया मोहिउद्दीन 
चचा ग़ालिब के बारे में न जाने कितने लोग कितना-कितना लिख और कह चुके हैं. लेकिन ज़िया मोहिउद्दीन साहब की निगाह ख़ासी अलहदा है और उनके अंदाज़-ए-बयाँ के तो क्या कहने.

सुनिए और आनन्द लीजिये. उम्दा पेशकश -  
(डाउनलोड लिंक: http://www.4shared.com/mp3/4O6MXUutce/Ghalib_aur_Mein_-_Zia_Mohyeddi.html) 

Saturday, March 21, 2015

ज़िया मोहिउद्दीन - मई दादा


एक शानदार किस्सा. असद मोहम्मद खान का लिखा यह संस्मरण किस्सागोई की उस गंगा-जमनी परम्परा से निकला है जिस का मैं तो मुरीद हूँ.  ऊपर से ज़िया साब की आवाज़. कबाडखाना एक्सक्लूसिव –


ज़िया मोहिउद्दीन - बासौदे की मरियम

ज़िया मोहिउद्दीन जिस तरह किसी टैक्स्ट का पाठ करते हैं वह बेमिसाल होता है. कबाड़खाने पर मैंने समय समय पर उनके कई नग पेश किये हैं. आज पाया कि उनमें से किसी का भी प्लेयर काम नहीं कर रहा है. 

अब उन्हें दुबारा अपलोड कर रहा हूँ.  

आज दिन भर सुनिए ज़िया मोहिउद्दीन साहब से उर्दू ज़बान के नगीने. सबसे पहले "बासौदे की मरियम" -