तमाम तरह के ओब्सेशन्स के आगे
समर्पण कर चुके महान आधुनिक चित्रकार साल्वाडोर डाली के जीवन पर कला समीक्षक
ब्रायन सेवेल ने यह डॉक्यूमेंट्री बनाई थी.
बीसवीं सदी के सर्रियल पेंटरों में
सबसे महान गिने जाने वाले डाली की स्वप्न और फंतासी से भरी छवि के पीछे एक सशंकित
और सहमा हुआ आदमी था जो अपनी सेक्सुअलिटी से खासा तंग रहा. ब्रायन सेवेल डाली के
संपर्क में तब आए थे जब उसका जीनियस पूरी तरह समाप्त हो रहा था. १९६८ से १९७१ के
दौरान सेवेल ने डाली के स्पेनिश गृहनगर में चार अविस्मरणीय गर्मियां बिताईं. जब वे
इस महान कलाकार के संपर्क में आए, तब तक डाली नैतिकता, सम्मान और तर्क के सारे
बन्धनों से मुक्त हो चुका था. यह दुर्लभ डॉक्यूमेंट्री कई मायनों में अद्वितीय है.
डाली की सेक्सुअलिटी और नपुंसकता के उसक भय और गाला के साथ उसके संबंधों को उधेड़ती इस फ़िल्म में कुछ हिस्से ऐसे हैं जिन्हें शूट करने के लिए या सामने रखने के लिए खासी हिम्मत चाहिए होती है. ब्रायन सेवेल अपने हिस्से के साल्वाडोर डाली को पूरी ईमानदारी से हमारे सामने लेकर आते हैं और अंत में स्पष्ट कहते भी हैं कि महान कलाकारों की लम्बी परम्परा में डाली अंतिम था - एक अद्वितीय उस्ताद.
डॉक्यूमेंट्री थोड़ा लम्बी है- करीब पचास मिनट की, पर डाली के प्रशंसक इसे अवश्य देखेंगे, मुझे उम्मीद है. डाउनलोड लिंक ये रहा - डर्टी डाली
डाली की सेक्सुअलिटी और नपुंसकता के उसक भय और गाला के साथ उसके संबंधों को उधेड़ती इस फ़िल्म में कुछ हिस्से ऐसे हैं जिन्हें शूट करने के लिए या सामने रखने के लिए खासी हिम्मत चाहिए होती है. ब्रायन सेवेल अपने हिस्से के साल्वाडोर डाली को पूरी ईमानदारी से हमारे सामने लेकर आते हैं और अंत में स्पष्ट कहते भी हैं कि महान कलाकारों की लम्बी परम्परा में डाली अंतिम था - एक अद्वितीय उस्ताद.
डॉक्यूमेंट्री थोड़ा लम्बी है- करीब पचास मिनट की, पर डाली के प्रशंसक इसे अवश्य देखेंगे, मुझे उम्मीद है. डाउनलोड लिंक ये रहा - डर्टी डाली
