Thursday, November 20, 2008

फ़ैमिली डॉक्टर की ज़रूरत है

मेरे जेहन में फ़ैमिली डॉक्टर की इमेज हिन्दी की पुरानी फ़िल्मों से बनी है. ब्लैक एन्ड व्हाइट फ़िल्मों से. शाम को एक बड़े ड्रॉइंगरूम से अन्दर एक लम्बे गलियारे के बाद साफ़ सफ़ेद दीवारों वाले कमरे के बीचोबीच साफ़ रज़ाइयों से ढंके बीमार पड़े मनमोहन कृष्ण टाइप के कोई बुज़ुर्ग होते थे या नूतन टाइप कोई विरहज्वरग्रस्त नायिका. अक्सर बल्कि हमेशा ही ये रोगी अमीर हुआ करते थे - ख़ासे अमीर. अशोक कुमार या दिलीप कुमार सरीखे नायक बिल्कुल राइट टाइम पहुंचे नासिर हुसैन टाइप डाक्साब को दरवाज़े पर रिसीव करते ही उनकी अटैची या बैग थाम कर उनके पीछे पीछे चलने को उद्यत रहते थे.

फ़ैमिली डॉक्टर के जादुई बैग में दुनिया भर की बीमारियों के इलाज होते थे और अक्सर रोगी बच जाता था और दो चार सीन के बाद किसी गाने का हिस्सा हुआ करता.

इस पूरे साल मैं अपने बीमार पिताजी के साथ अपने नगर हल्द्वानी और आसपास के तमाम शहरों में अनगिनत डॉक्टरों के पास गया हूं. उनमें से कुछ अब मित्र बन चुके हैं, कुछ की शक्लें भी याद नहीं.

पहले परची बनती है. रूटीन सवालात होते हैं और कई सारे टेस्ट्स की फ़ेहरिस्त थमा दी जाती है. पैथोलॉजी लैब हर बार अलग तय किया जाता है. हर डॉक्टर का अपना पैथॉलॉजिस्ट होता है. कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि कल कराए गए उसी टेस्ट को दूसरा डॉक्टर ख़ारिज कर देता है और दूसरी लैब में उसे कराए जाने की ज़रूरत बताता है. दोनों ही बार परिणाम समान आते हैं. दवा के नाम पर इधर हर परचे में एक एन्टासिड और एक एन्टी डिप्रेसेन्ट लिखने का चलन शुरू है. ये दवाएं अलग अलग डॉक्टरों द्वारा हर बार अलग अलग कम्पनियों के नाम से लिखी जाती हैं. कोई मेरे पड़ोस के फ़ार्मेसिस्ट के यहां मिल जाती है कोई नहीं मिलती. पिताजी कहते हैं वही दवा लाओ जो परचे में लिखी है. उनकी आयु अच्छी ख़ासी है इसलिए उन्हें दवा के साल्ट एक होने जैसे कोई भी बात किसी भी तरह से नहीं समझाई जा सकती. वे नाराज़ हो जाते हैं या खीझने लगते हैं.

इस साल उनके दो ऑपरेशन हो चुके हैं. लेकिन खराब समय टलने का नाम नहीं ले रहा. परसों वे घर में फ़िसले और उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई. मैंने कई मित्र डॉक्टरों को फ़ोन किया. कोई बोला एक्स रे कराने ले आओ, कोई बोला ऑपरेशन होगा, कोई बोला शुगर तो नहीं है ...

एम्बुलैन्स बुलाई गई. अभी मैं प्राइवेट वार्ड में बैठा हूं. खून की रिपोर्ट आ गई है. कुछ और टेस्ट्स की रपटों का इन्तज़ार है. सब ठीक रहा तो शनिवार को टाइटेनियम की प्लेट फ़िट कर के ह्ड्डी को दुरुस्त किए जाने का ऑपरेशन होगा. पिताजी सुबह उठते ही एक एन्टासिड खा रहे हैं और रात को सोने से पहले ०.५ एम जी की नींद की गोली.

मैं अमीर नहीं हूं. न मेरे घर का ड्राइंग रूम उतना बड़ा है. लेकिन मुझे एक फ़ैमिली डॉक्टर की सख़्त ज़रूरत है, जिसकी बताई दवा बरेली-दिल्ली से न मंगानी पड़े. और जो हंसता हो.

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18 comments:

मैथिली गुप्त said...

अशोक जी, परदे की दुनियां और जिन्दगी में बहुत बहुत फर्क होता है.

सभी टैस्ट की रपटें ठीक आयें और परसों आपके पिताजी का आपरेशन सफल हो.

वाकई हंसने वाले लोग आजकल बहुत मुश्किल से मिलते हैं.

Mired Mirage said...

अशोक जी, सबसे पहले तो आपके पिताजी का औपरेशन सफल रहे व उन्हें जल्दी स्वास्थ्य लाभ हो यह कामना करती हूँ । बड़ी उम्र के लोग सदा वही दवा माँगते हैं जो डॉक्टर ने लिखी हो । आपकी तरह ही परिवार वाले समझाकर थक हार जाते हैं ।
सच में फ़ैमिली डॉक्टर नामक प्राणी अब लुप्त हो गया है । वैसे बड़े बड़े पूँजीपतियों के पास अब भी पाए जा सकते हैं । अब भी बचपन के वे डॉक्टर याद आते हैं जिन्हें देखते ही विश्वास हो जाता था कि अब सब ठीक हो जाएगा ।
वैसे आप विश्वास नहीं करेंगें कि आज के जमाने में हमें एक ऐसा डॉक्टर मिल गया है जो रात बेरात सलाह दे देता है और सदा सहायता करने को तत्पर रहता है । दिल्ली में पति के औपरेशन के दौरान भी वे फोन करके हाल पूछ लेते थे व सलाह भी दे देते थे । काश, ऐसे कुछ और डॉक्टर भी होते । यही तो होता है फ़ैमिली डॉक्टर !
घुघूती बासूती

संजय पटेल said...

बाबूजी ठीक हों जल्दी से जल्दी ऐसी परमेश्वर से प्रार्थना करता हूँ अशोक भाई.और पूरे मनोयोग से पूज्य पिता की सेवा में संलग्न रहने के आपने पावन भाव को प्रणाम भी करता हूँ.

भैया जिस तरह के फ़ेमिली डॉक्टर की ज़रूरत आपको आन पड़ी है वह एक दुर्लभ प्राणी हो गया है. अब तो पूरी दुनिया फ़िक्सिंग पर चल रही है.एक ज़माना था जब डॉक्टर के रूप में एक महामानव के दीदार हो जाया करते थे. सह्र्दय,करूणामय,दयालु,सहयोगी.हाँ याद आया जब आपके बाबूजी की तरह मेरी गाँव में रहने वाली दादी जब हमारे सिरेमिक टाइल्स वाले बाथरूम में गिर पड़ीं थीं तो मेरे शहर के हड्डी के जानमाने डॉक्टर ने पिताजी से कहा कि इन्हें एक्सरे और प्लास्टर के लिये तो अस्पताल ले चलना पड़ेगा . तो पिताजी ने जवाब दिया कि आता हूँ लेकर रिक्शे से कुछ देर में.सह्र्दय डॉक्टर बोले रिक्शा ? मेरी ये कार कब काम आएगी भाई.तुम माँ को गोद में लेकर मैं दरवाज़ पकड़ खड़ा हूँ...आज आपकी पोस्ट पढ़ कर उसी चिकित्सक का चेहरा याद आ गया . बचपन में ख़ासी तो जाती तो माँ एक बुज़ुर्ग डॉक्टर महाडिक साहब के पास ले जाती थी.
वे दवा का मिक्श्चर बना कर पाउडर दिया करते थे.और सर्दी ज़ुकाम ख़ासी वाले मरीज़ को देखकर कहते इसकी क्या दवा करना. नमक के ग़रारे करो,भाप लो और हाँ दो तीन दिन पंखे के नीचे मत सोना. जब माँ पूछती डाक साब दवा तो बोलते देख दवा दूँगा तो तेरा बच्चा सात दिन में ठीक हो जाएगा...और नहीं दूगा तो एक हफ़्ते में.और ठहाका लगा देते डॉक्टर महाडिक.माँ फ़ीस का पूछती तो कहते दवा लिखी क्या ? तो काहे के पैसे.जा घर जा.

लगता है मैं किसी और दीन-दुनिया की बात कर रहा हूँ जहाँ सलाहियत,सम्मान और सौजन्यता के सरल सिलसिले थे.नि:संकोच कह सकता हूँ कि डॉक्टरी अब एक प्रोफ़ेशन हो गया है...पैशन नहीं रहा.

deepak sanguri said...

maaf karna bhai,muja to likhna bhi nahi aata per aaj kal yea sab apene beta ke sath bhi daktar daktar khel raha hoo main,

अशोक पाण्डेय said...

मैथिली जी ठीक कह रहे हैं..पर्दे की दुनिया और जिन्‍दगी में बहुत फर्क होता है। ईश्‍वर से हमारी प्रार्थना है कि आपके पिताजी का ऑपरेशन सफल हो और उनका स्‍वास्‍थ्‍य बेहतर रहे।

शिरीष कुमार मौर्य said...

यार अशोक दा आज वीरेन दा ने फून पर बताया कि अशोक के पिता जी भी घायल! उधर रामनगर में आमा का आपरेशन सफल रहा! पूरी बॉल बदलनी पड़ी। मै वापस नैनीताल में हूं - कभी रात के लिए रामनगर भी चला जा रहा हूं।

सतीश पंचम said...

बात तो पते की कही है कि अब उन फैमिली डॉक्टर की जरूरत आन पडी है जिसे देखकर ही अपने ठीक हो जाने का विश्वास हो जाय। हर क्षेत्र में फैली आपाधापी की तरह यह डॉक्टरी क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है। उम्मीद है हालात जल्द सुलझेंगे।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

होना ही चाहिए एक फेमिली डाक्टर सब के पास।

महेन said...

भई बाबूजी चुस्त दुरुस्त हो जाएं यही कामना है। बाकी फ़ैमिली डाक्टर तो डिस्टिंक्ट जीव हो ही चुके हैं। जब से हमारी फ़ैमिली डाक्टर बिछड़ी हैं तबसे छोटी से छोटी हरारत से भी डर लगता है।

संगीता पुरी said...

आपके पिताजी का ऑपरेशन सफल हो और उनका स्‍वास्‍थ्‍य बेहतर रहे ,यही कामना है।

एस. बी. सिंह said...

जब फैमिली नामक संस्था ही विखंडन के कगार पर हो तो फैमिली डाक्टर की बात क्या करना अशोक जी। बाबू जी के शीघ्र स्वास्थ्यलाभ की हार्दिक कामना सहित।

vipin dev tyagi said...

सर,आप चिंता ना करें,कालूसिद्ध बाबा सब ठीक करेंगे..ऑपरेशन सफल होगा..आपने फैमिली डॉक्टर का जिक्र किया तो डॉ निर्मल पांडे याद आ गये..मुखानी में क्लिनिक था..एमएस थे...बहुत योग्य,असाधाराण ज्ञान,मरीज की नब्स पकड़ लेंते थे...तो लगता था किसी दोस्त ने हाथ थाम लिया हो..इतने बड़े डॉक्टर,लेकिन फक्कड़ मिजाज...कभी चप्पल में,कभी हाफ पेंट में ही क्लिनिक पहुंच जाते थे..12वीं की परीक्षा के दिनों में मेरी तबीयत बहुत खराब हो गयी थी...सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा..पिताजी बाहर नौकरी पर...ईजा अकेली..भाई छोटे...डॉ निर्मल पांडे..घर आकर मुझे इंजेक्शन लगाते थे..यार तू घबरा मत..ठीक हो जाएगा...इस तरह की उनकी बातें, दवा के साथ हौंसला देती थी.. दर्द के अहसास को कम करती थी..जितने दिन मेरी तबीयत खराब रही..वो सुबह- शाम मुझे घर आकर देखकर जाते थे..वो भी फ्री में...घर आने की उन्होंने कोई अतिरिक्त फीस नहीं ली हमसे...बस प्रेम था...इंसानियत थी उनकी..मैं उनका कोई रिश्तेदार या फैमिली मेंबर भी नहीं था..बस एक मरीज था...डॉक्टर निर्मल पांडे,सिर्फ मुझे नहीं,बहुत लोगों को डॉक्टर से ज्यादा अपने घर के सदस्य लगते थे..पारिवारिक परेशानियां,के चलते हार्ट अटैक ने डॉ निर्मल पांडे की जान ले ली..एक युवा डॉक्टर..दोस्त..बहुत जल्दी में दुनिया को अलविदा कह गया..यकीन से कह सकता हूं,अशोक सर,अगर आज डॉ निर्मल पांडे जिंदा होते..तो आपको फैमिली डॉक्टर के लिये इश्तहार नहीं देना पड़ता..
विपिन
हल्द्धानी

Tarun said...

फैमली डॉक्टर वाकई में अब नदारद होते जा रहे हैं, आपके पिताजी के स्वास्थ्य के बारे में पता चला, वो जल्दी से स्वास्थ्य लाभ करें यही कामना है। शुभकामनायें बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिये।

Anil Pusadkar said...

babuji jald thik ho,unka operation safal rahe, ishwar se yahi prarthana hai. pichale saal maine bhi apni mataji ke pair ka operation karaya tha. tamam vip treatment ke bavjood hui taqlif ko mai hi janata hu.raha saval family docter ka to vo guzare zamaane ki baat hai.

शोभा said...

आज के आम आदमी की पीड़ा को आपने कलम से उतार दिया। बधाई ।

Rajesh Joshi said...

आज शाम की फ़्लाइट से मैं आ रहा हूँ... मोबाइल काम करता हो तो ऑन रखना. गौलापार रहूँगा और तुझसे मिलने और तेरे पिता को देखने आऊँगा.

nainitaali said...

शुभकामनायें बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिये।

Naveen said...

ummid hai operation theek ho gaya hoga.
family doctor per aapki tippani mazedaar hai aur mauzu bhi.