Friday, March 9, 2012

खेलें मसाने में होरी दिगंबर

पंडित छन्नूलाल मिश्र सुना रहे हैं अपनी विख्यात रचना. आप सब को होली की शुभकामनाएं -

3 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

मुनीश ( munish ) said...

शानदार सिग्नेचर ट्यून । गज्जब ।

मुनीश ( munish ) said...

सिग्नेचर ट्यून इसलिए लिखा कि बिना बजाए ही भजन का फ़िल्मी संस्करण बज उठ रहा था । मुझे वाक़ई लगा कि आपने इसे पेज खुलते ही बजने वाला संगीत बना कर लगाया है लेकिन बन्द करने पर बन्द भी हुआ तो पता लगा कि मामला कुछ और है ।