Sunday, March 20, 2016

तुम अगर लैला की माँ होते तो क्या करते लिखो - होली स्पेशल

हमारी शिक्षा पद्धति के इतिहास का वह तारीख़ी दिन रहा होगा जब एक बरस यूपी बोर्ड के एक इम्तेहान में परीक्षार्थियों से प्रेमिका को विवाह का प्रस्ताव लिखने को कहा गया था. इस असल किस्से से प्रेरणा लेकर जनाब दिलावर फ़िग़ार ने एक कमाल की कविता लिखी थी. वही पेश की जा रही है. मुश्किल शब्दों के मायने आखीर में दिए गए हैं.

 कबाड़खाने का होली स्पेशल -

दिलावर फ़िग़ार (1929-1998)

इश्क़ का परचा
-दिलावर फ़िग़ा 

मह्वे-हैरत में हूँ कि वो सैटर था कितना बाकमाल
इश्क़ के बारे में पूछा जिसने पर्चे में सवाल
ऐसे ही सैटर अगर दो-चार पैदा हो गए
देखना इस मुल्क में फनकार पैदा हो गए
आम होगी आशिकी कालिज के अर्ज़-ओ-तूल में
लैला-ओ-मजनूं नज़र आएँगे अब इस्कूल में
इश्क़ के आदाब लड़कों को सिखाये जाएंगे
गैर आशिक़ हैं जो वो आशिक़ बनाए जाएंगे
आशिकों को इल्म में परफैक्ट समझा जाएगा
इश्क़ इक कम्पलसरी सब्जेक्ट समझा जाएगा
इम्तिहां होगा तो पूछे जाएंगे ऐसे सवाल
अपनी महबूबा के बारे में कुछ इज़हार-ए-ख़याल
इश्क़ इक साइंस है या आर्ट? समझा कर लिखो
या ये दोनों इश्क़ का हैं पार्ट, समझा कर लिखे

आज अपने  मुल्क में आशिक़ हैं कितने फ़ीसदी
मुन्तही इन में हैं कितने और कितने मुब्तदी
क्या तआल्लुक़ तिब्बे-यूनानी का है रूमान से
कम्पेयर फरहाद-ओ-मजनूँ को करो लुकमान से
इश्क़ कितने किस्म का होता है? लिक्खो बावुसूक़
फ़ी ज़माना क्या हैं आशिक़ के फ़राइज़ और हुक़ूक़
एक तहक़ीक़ी मक़ाला लिख के समझाओ ये बात
शाख-ए-आहू पर ही क्यों रहती है आशिक़ की बारात
कुछ मिसालें दे के समझाओ ये कौल-ए-मुस्तनद
“इश्क़ अव्वल डर दिले मा’शूक़ पैदा मी शवद”
सर को क्या निस्बत है संग-ए-आस्ताने-यार से
तुमने सर फोड़ा कभी माशूक की दीवार से
क्या सुकूं मिलता है दिल को आह-ए-शोलाबार से
गर्म नाले अर्श पर जाते हैं किस रफ़्तार से
अपने अंदाज़े से तूले-शामे-तन्हाई बताओ
सिर्फ तख्मीनन शबे-हिजरां की लम्बाई बताओ

इण्डिया का एक नक्शा अपनी कापी पर बनाओ
और फिर उसमें हुदूदे-कूचा-ए-जानां दिखाओ
वस्ल की दरख्वास्त पर किस की सिफारिश चाहिए
इश्क़ के पौधे को कितनी इंच बारिश चाहिए
अपनी महबूबा को इक दरख्वास्त इंग्लिश में लिखो
उससे ये पूछो जवाब-ए-आरज़ू “येस” है कि “नो”
कौन से आले से देखें हुस्ने-जानाना लिखो
हुस्न की मिकदार जो नापे वो पैमाना लिखो
मादरे-लैला ने, लैला न ब्याही कैस को
तुम अगर लैला की माँ होते तो क्या करते लिखो
एक आशिक़ तीन दिन में चलता है उन्नीस मील
तीन आशिक़ कितने दिन में जाएंगे अड़तीस मील
आप कर सकते हैं इनमें कोई बारह सवाल
बदख़ती के पांच नंबर हैं रहे ये भी ख़याल  

[मह्वे-हैरत = विस्मय में, अर्ज़-ओ-तूल = प्रांगण, मुन्तही = नौसिखुवे, मुब्तदी = एक्सपर्ट, तिब्बे-यूनानी  = यूनानी चिकित्सा, रूमान = प्रेम, लुकमान = बड़े डॉक्टर, बावुसूक़ = प्रमाण के साथ, फ़राइज़ = फ़र्ज़, मक़ाला = रिसर्च सिनोप्सिस, शाख-ए-आहू = हिरन के सींग यानी झूठी खुशी, कौल-ए-मुस्तनद = प्रमाणिक उक्ति, “इश्क़ अव्वल डर दिले मा’शूक़ पैदा मी शवद”= इश्क़ पहले माशूक के दिल में पैदा होता है, निस्बत = सम्बन्ध, संग-ए-आस्ताने-यार = माशूका के घर की दहलीज का पत्थर,  आह-ए-शोलाबार = आग भरी आहें, नाले = आहें, तख्मीनन =अनुमानतः, शबे-हिजरां = विरह की रात,  हुदूदे-कूचा-ए-जानां = यार की गली की सीमा, वस्ल = मिलन, आले = यंत्र,  हुस्ने-जानाना = प्रेयसी का सौन्दर्य, मिकदार = मात्रा, मादरे-लैला = लैला की माँ, कैस = मजनूं, बदख़ती = ख़राब हैण्डराइटिंग]

1 comment:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 21 मार्च 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!