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Sunday, March 4, 2012

काल्वीनो के हेमिंग्वे


उस्ताद इतैलो काल्वीनो अपनी किताब 'व्हाई रीड द क्लैसिक्स' के अध्याय 'हेमिंग्वे एंड आर्सेल्व्ज़' की शुरुआत में लिखते हैं -


"एक समय था जब मेरे – और कई और सारों के लिए, जो करीब-करीब मेरे समकालीन हैं – हेमिंग्वे एक भगवान था. मुझे याद करते हुए खुशी होती है कि वे अच्छे दिन थे, और इस बात में उस विडंबनापूर्ण अनुग्रह की ज़रा भी झलक नहीँ जिसके साथ हम अपनी जवानी के शौकों को याद किया करते हैं. वह गंभीर समय था और साफदिली के साथ हमने उसे गंभीरता और बहादुरी से जिया, और हेमिंग्वे में हम निराशावाद, व्यक्तिगत किस्म का अलगाव और बेहद हिंसक अनुभवों के साथ एक सतही जुड़ाव भी खोज सकते थे: हेमिंग्वे में यह सब भी था, लेकिन या तो हम इसे देख नहीं सके या हमारे दिमाग में दूसरी चीज़ें थीं, लेकिन सच्चाई यह है कि हमने उस से जो सीखा वह थी खुलेपन और दयालुता की काबिलियत, चीज़ों के प्रति एक व्यावहारिक – साथ ही तकनीकी और नैतिक जिम्मेदारी भी – कि उनके साथ क्या किया जाना है, एक सीधी निगाह, आत्मदया या आत्मरति का अस्वीकार, जीवन से सबक झपट सकने की तत्परता, एक रूखे वार्तालाप या भंगिमा के माध्यम से समझे गये किसी व्यक्ति की कीमत. 


लेकिन जल्द ही हमने उसकी कमियां देखना शुरू कर दिया, उसके खोट : उसकी पोयटिक्स और उसकी शैली जिसका मैं अपने शुरुआती साहित्यिक कार्यों के लिए कृतज्ञ हूँ, को संकीर्ण और मैनरिज्म की तरफ उतर जाने को खासा उद्यत देखा जाने लगा. हिंसक पर्यटन का उसका वह जीवन – और जीवनदर्शन – मुझे अविश्वास और यहाँ तक कि वितृष्णा और उकताहट से भरना शुरू करने लगा."
 

Sunday, January 31, 2010

एक उस्ताद क्या कहता है दूसरे उस्ताद के लेखन पर



"... हेमिंग्वे का सारा काम यह दिखलाता है कि उसकी आत्मा चमकदार तो थी मगर उसका जीवन बहुत संक्षिप्त रहा. यह बात समझ में आती भी है. उसके भीतर का तनाव और लेखन की वैसी मज़बूत तकनीक - इन दोनों को उपन्यास की विशाल और जोखिमभरी ज़मीन पर लम्बे समय तक बनाए नहीं रखा जा सकता था. ऐसा उसका स्वभाव था और उसकी गलती यह थी कि उसने अपनी ही आलीशान हदों को पार करने का प्रयास किया. और यह इसी वजह से है कि तमाम सतही चीज़ें किसी भी और लेखक से कहीं ज़्यादा उसके लेखन में देखी जाती हैं. इसके बरअक्स उसकी कहानियों के साथ सबसे अच्छी बात यह है कि उन्हें पढ़कर लगता है कि कहीं किसी चीज़ की कमी है और यह चीज़ उन्हें खूबसूरत और रहस्यमय बनाती है. हमारे समय के एक और महान लेखक बोर्हेस के साथ भी यही बात है पर उसे इस बात का भान रहता है कि अपनी सीमाओं के पार न जाया जाए.

फ़्रान्सिस मैकोम्बर द्वारा शेर पर चलाई गई इकलौती गोली शिकार के नियमों के बारे में तो बहुत कुछ बताती ही है, लेखन के विज्ञान का सार भी उसमें निहित है. अपनी एक कहानी में हैमिंग्वे ने लिखा था कि लीरिया का एक सांड एक बुलफ़ाइटर के सीने से रगड़ खा कर लौटता हुआ "कोने पर मुड़ रही किसी बिल्ली" जैसा लगा. पूरे सम्मान के साथ मैं कहता हूं कि इस तरह का ऑब्ज़र्वेशन उन इन्स्पायर्ड मूर्खताओं से भरे टुकड़ों में गिना जा सकता है जो सिर्फ़ शानदार लेखकों के यहां पाये जाते हैं. हेमिंग्वे का सारा काम ऐसे ही सादा और चौंधिया देने वाली खोजों से भरा पड़ा है जो दर्शाते हैं किस बिन्दु पर उसने अपने गद्य की परिभाषा गढ़ी.

निस्संदेह अपनी तकनीक को लेकर इतना सचेत रहना ही इकलौता कारण है कि हेमिंग्वे को अपने उपन्यासों नहीं बल्कि कहानियों की वजह से महान माना जाएगा. ... व्यक्तिगत रूप से मुझे उसकी एक कम चर्चित छोटी कहानी 'कैट इन द रेन' सबसे महत्वपूर्ण लगती है. ..."



'गाब्रीएल गार्सीया मार्केज़ मीट्स अरनेस्ट हेमिंग्वे' (द न्यू यॉर्क टाइम्स, २६ जुलाई, १९८१) में गाब्रीएल गार्सीया मार्केज़