Friday, April 25, 2008

.....तो मेरे हक़ में दुआ करोगे !


कल रात एक पोस्ट लगाई-'सावन झरी लागे ला धीरे-धीरे' ,रत्ना बसु की गायकी ने बड़ा प्रभावित किया है उसी को सबके साथ बांटना चाहता था. बाद में तमाम तरह की परेशानियों के चलते उस पोस्ट को हटाना पड़ा.वह पोस्ट 'ब्लागवाणी'पर दीख तो रही थी,पर 'कबाड़खाना' पर गायब थी.हमारे बहुत से चाहने वाले वहां पहुंचे होंगे,उन्हें परेशानी हुई ,सो माफी,क्षमा, खेद..

लाइफलागरवा ने बड़ा दुख दीना
रात-रात भर अंखियां फोड़ीं,छोड़ा खाना पीना
पेस्ट-डिलीट में आया भैया मुझको खूब पसीना
सुबह -सुबह है काम पे जाना यही सोच के सोया
ढ़ंग न आया ,या है गड़बड़ मेरा काम न होया !

शाम को एक बार फिर कोशिश करूंगा,अभी तो माफी 'कबाड़खाना' के सभी कबाड़ियों और चाहने वालों से,हमसे भूल हो गई हमका माफी दै दो!अशोक दद्दा,सब आपका ही सिखाया ठैरा,कहीं एकाध सबक बाकी रह गया है शायद!आपने बाबा का शेर लगाया है,बहुत बढ़िया . बाकी सब ठीक-ठाक है.बाबा मीर तक़ी मीर मुझे भी याद रहे है.पेश है यह शेर-

ग़मे मुहब्बत से 'मीर'साहब बतंग हूं मैं ,फ़क़ीर हो तुम
जो वक्त होगा कभी मुसाइद तो मेरे हक़ में दुआ करोगे
!
------
बतंग = तंग,परेशान / मुसाइद = शुभ, अच्छा, अनुकूल

1 comment:

yunus said...

भई लाइफलॉगर ने हमें भी दुख दिया तो हमने इंटरनेट आर्काइव का सहारा लेना शुरू कर दिया । यहां चढ़ाई गयी रचना को पढ़ने वाले चाहें तो डाउनलोड भी कर सकते हैं ।