Sunday, January 31, 2010

बचपन की बोरियत सपनों से भरी बोरियत होती है



एक साक्षात्कार में विख्यात इतालवी उपन्यासकार इतालो काल्वीनो से पूछा गया "क्या आप कभी बोर हुए हैं?"

इतालो का जवाब था: " हां, बचपन में. लेकिन मैं यहा पर बताना चाहूंगा कि बचपन की बोरियत एक खास तरह की बोरियत होती है. वह सपनों से भरी बोरियत होती है जो आपको किसी दूसरी जगह किसी दूसरी वास्तविकता में प्रक्षेपित कर देती है. वयस्क जीवन की बोरियत किसी काम को बार-बार किये जाने की वजह से पैदा होती है - यह किसी ऐसी चीज़ में लगे रहने से होती है जिस से अब आप किसी अचरज की उम्मीद नहीं करते. और मैं ... मेरे पास कहां से समय होगा बोरियत के लिए! मुझे सिर्फ़ डर लगता है कि कहीं मैं अपनी किताबों में अपने को दोहराने न लगूं. यही वजह है कि जब जब मेरे सामने कोई चुनौती होती है, मुझे कुछ ऐसा खोजने में लग जाना होता है जो इतना नई हो कि मेरी अपनी क्षमता से भी थोड़ा आगे की चीज़ हो."

5 comments:

Udan Tashtari said...

प्ररणास्पद प्रसंग. आभार.

abcd said...

मुज़से कोइ गल्ती से hobby/शौक पुछॆ तो कहु--
interview देखना,सुनना और पडना /

क्या आनन्द है !!

अशोक भाई.
interview excerpts का भि सहित्योत्सव का प्रस्ताव स्वीकार करे/

वैसे,
कहा है वो उस्ताद,कल चौक मे लडा था जिन्का,रीछ का बच्चा ?

अजेय said...

अभी परसों की बात है, मैं दफ्तर से लौट रहा था. एक बच्चा अपने दोस्त से कह रहा था, चल यार लोअर केलंग चलते हैं... यहाँ तो बोर हो गए.
मुझे विचार आया कि क्या बच्चे बोर हो सकते हैं?
बचपन मे लौटा तो पाया कि अक्सर बिना कारण बोर हो जाया करता था. सच था. बच्चे बोर होते हैं. और आज तक चेतन रूप से इस बात का मुझे पता नहीं था. फिर सोचा कि अंतिम बार मे कब बोर हुआ था? पता नहीं शायद बहुत अरसा हो गया. उस दिन मैंने भी बोर होना चाहा .... नही हो पाया..... मैं शायद बोर होना ही भूल चुका हूँ. और यह खतर्नाक है....सच, अभी परसों ही ये खयाल मन मे आया था.

ANIL YADAV said...

uttam

अमिताभ श्रीवास्तव said...

mujhe lagta he jab aadami "aadami" ban jaataa he to usaki baate bhi ban jaati he.., vo kuchh jyada paripakv ho jata he aour apni isi paripakv mansikata ko bade hi ruchikar andaaz me prasangvash utaar deta he.,yaa pesh kar diya kartaa he..., asal me vo vah hota nahi he, bas ban jataa he..yaa banaa letaa he..///

kher..
achhi prastuti