Tuesday, March 2, 2010

मॉन्टी पाइथन एन्ड द होली ग्रेल



मॉन्टी पाइथन समूचे यूरोप में आज भी एक कल्ट का नाम है. सत्तर के दशक में युवा हुई पीढ़ी के लिए इस ग्रुप की फ़िल्में और टीवी शोज़ रचनात्मकता और परम्परा से विद्रोह का पर्याय हुआ करते थे. १९६९ से १९७४ के दौरान यह ग्रुप ब्रिटिश टीवी की जान हुआ करता था. मॉन्टी पाइथन्स फ़्लाइंग सर्कस नाम के कॉमेडी शो के माध्यम से इन हरफ़नमौला युवा रचनाकारों ने टेलीविज़न संसार पर राज किया.

ग्राहम चैपमैन, जॉन क्लीज़, टेरी जिलियम, एरिक आइडल, टेरी जोन्स और माइकेल पैलिन ने बहुत सालों बाद इस बात का खुलासा किया कि असल में उनकी रचनात्मकता को वर्जीनिया वूल्फ़ द्वारा शुरू किए गए स्ट्रीम ऑव कान्शसनेस नामक साहित्यिक आन्दोलन की तकनीकी बारीकियों ने ठोस बुनियाद मुहैया कराई. टेरी जिलियम के बनाए एनिमेशन्स का दॄश्यों के बीच बहुत चतुर इस्तेमाल भी इसी तकनीकी बारीकी का हिस्सा हुआ करता था.

ख़ैर, उनके बारे में ज़्यादा विवरण विकीपीडिया समेत तमाम वैबसाइट्स पर मिल सकते हैं. आज मैं उनकी बनाई मशहूर कॉमेडी फ़िल्म मॉन्टी पाइथन एन्ड द होली ग्रेल की चर्चा कर रहा हूं.



सम्राट आर्थर की गाथा पश्चिमी संस्कृति में उसी तरह घुली मिली है जिस तरह अपने यहां रामायण और महाभारत. साहित्य की तमाम विधाओं में इस गाथा को सतत महिमामंडित किए जाने की लम्बी परम्परा रही है.

मध्यकाल की इस रूमानी गाथा के अतार्किक आदर्शों की धज्जियां उड़ाती इस फ़िल्म का सम्राट आर्थर एक मसखरा और मूर्ख नज़र आता है जबकि आम जनता जब-जब नज़र आती है, उसके वक्तव्य बुद्धिमत्ता से भरे होते हैं. अपनी दैवीय शक्ति से भरपूर एक्सकैलिबर तलवार ले कर संसार को फ़तह करने निकला सम्राट अक्सर इन आम जनों के आगे निरुत्तर हो जाता है.

जब इस फ़िल्म को बनाने के लिए इस ग्रुप के पास कुल डेढ़ लाख पाउन्ड का बजट था जिसका बड़ा हिस्सा पिंक फ़्लॉयड और लैड ज़ैपलिन जैसे संगीतकारों ने चैरिटी कॉन्सर्ट्स करके इकठ्ठा किया था. सारी फ़िल्म स्कॉटलैंड में लोकेशन पर शूट की गई. इतनी बड़ी गाथा की कॉमेडी बनाने के लिए जाहिर है यह रकम बहुत कम थी. मध्यकाल की हर कहानी में सैकड़ों घोड़ों और हज़ारों सैनिकों को युद्धरत दिखाया जाना होता था. किराये पर घोड़े और कलाकार लेने के लिए कतई पैसा नहीं था.

अब मैं ज़्यादा लिखने के मूड में नहीं हूं.


यूट्यूब पर इस फ़िल्म के पहले दॄश्य को देखिये और आनन्दित होइये.



इस फ़िल्म को खोज बीन लें तो देखते हुए इसकी स्क्रिप्ट ज़रूर सामने रखें. एक भी शब्द छूट जाए या समझ में न आए तो मॉन्टी पाइथन्स की मूलभूत चीज़ आपसे छूट जाएगी: ब्रिटिश ह्यूमर. स्क्रिप्ट का लिंक.

यूट्यूब वाले दॄश्य की स्क्रिप्ट:

[wind]

[clop clop clop]

KING ARTHUR: Whoa there!

[clop clop clop]

SOLDIER 1: Halt! Who goes there?

ARTHUR: It is I, Arthur, son of Uther Pendragon, from the castle of Camelot. King of the Britons, defeator of the Saxons, sovereign of all England!

SOLDIER 1: Pull the other one!

ARTHUR: I am,... and this is my trusty servant Patsy. We have ridden the length and breadth of the land in search of knights who will join me in my court at Camelot. I must speak with your lord and master.

SOLDIER 1: What? Ridden on a horse?

ARTHUR: Yes!

SOLDIER 1: You're using coconuts!

ARTHUR: What?

SOLDIER 1: You've got two empty halves of coconut and you're bangin' 'em together.

ARTHUR: So? We have ridden since the snows of winter covered this land, through the kingdom of Mercea, through--

SOLDIER 1: Where'd you get the coconuts?

ARTHUR: We found them.

SOLDIER 1: Found them? In Mercea? The coconut's tropical!

ARTHUR: What do you mean?

SOLDIER 1: Well, this is a temperate zone.

ARTHUR: The swallow may fly south with the sun or the house martin or the plover may seek warmer climes in winter, yet these are not strangers to our land?

SOLDIER 1: Are you suggesting coconuts migrate?

ARTHUR: Not at all. They could be carried.

SOLDIER 1: What? A swallow carrying a coconut?

ARTHUR: It could grip it by the husk!

SOLDIER 1: It's not a question of where he grips it! It's a simple question of weight ratios! A five ounce bird could not carry a one pound coconut.

ARTHUR: Well, it doesn't matter. Will you go and tell your master that Arthur from the Court of Camelot is here.

SOLDIER 1: Listen. In order to maintain air-speed velocity, a swallow needs to beat its wings forty-three times every second, right?

ARTHUR: Please!

SOLDIER 1: Am I right?

ARTHUR: I'm not interested!

SOLDIER 2: It could be carried by an African swallow!

SOLDIER 1: Oh, yeah, an African swallow maybe, but not a European swallow. That's my point.

SOLDIER 2: Oh, yeah, I agree with that.

ARTHUR: Will you ask your master if he wants to join my court at Camelot?!

SOLDIER 1: But then of course a-- African swallows are non-migratory.

SOLDIER 2: Oh, yeah...

SOLDIER 1: So they couldn't bring a coconut back anyway... [clop clop clop]

SOLDIER 2: Wait a minute! Supposing two swallows carried it together?

SOLDIER 1: No, they'd have to have it on a line.

SOLDIER 2: Well, simple! They'd just use a strand of creeper!

SOLDIER 1: What, held under the dorsal guiding feathers?

SOLDIER 2: Well, why not?

मॉन्टी पाइथन्स ने कुल चार फ़िल्में बनाईं.

(चित्रपट से साभार)

4 comments:

Manish said...

gr888!!!!!!!!

Ek ziddi dhun said...

Aj AMAr UJALA ne is post ko lagaya hai

चंदन कुमार झा said...

हमारे कम्प्यूटर में तो यह फ़िल्म कई दिनों से रखी हुई है , आज हीं देखता हूँ ।

मुनीश ( munish ) said...

Thnx for the information !