Tuesday, January 22, 2013

अब तो भूलने की भी बड़ी क़ीमत मिलती है



क़ीमत
-आलोक धन्वा  

अब तो भूलने की भी बड़ी क़ीमत मिलती है

अब तो यही करते हैं
लालची ज़लील लोग.

3 comments:

अनूप शुक्ल said...

खूब !

अनूप शुक्ल said...

बहुत खूब!

Gurpreet Singh said...

क्या ?

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