Monday, August 26, 2013

एक मर्लिन मुनरो ऐसी भी – ३

(पिछली क़िस्त से आगे)

यह मेरा रचनात्मक हिस्सा था जिसने मुझे आगे बढाते जाने की ताकत दी जब मैं अभिनेत्री बनने की कोशिश कर रही थी. जब आप अपनी बात सही सही तरीके से कह दें तब मुझे वाकई अभिनय में आनंद आता है. मेरे ख़याल से मेरे भीतर ज़रुरत से ज्यादा फंतासी थी कि मैं फ़क़त हाउसवाइफ बन कर नहीं जी सकती थी. हाँ, मुझे अपना पेट भी पालना था. सीधे शब्दों में कहूं तो मुझे किसी ने “रखा” नहीं; मैंने हमेशा खुद को रखा है. मुझे हमेशा इस बात का फख्र रहा कि मैं आत्मनिर्भर थी. और लॉस एंजेल्स में मेरा घर था और जब उन्होंने कहा “अपने घर जाओ!” तो मैंने जवाब दिया “मैं अपने घर में ही हूँ.” जिस वक़्त मुझे लगना शुरू हुआ था कि मैं प्रसिद्ध हो गयी थी, एक दफा मैं किसी को ड्राइव करके एयरपोर्ट ले जा रही थी, और जब मैं वापस आई तो एक सिनेमाघर में मैंने रोशनियों में लिखा अपना नाम देखा. मैंने सड़क पर थोड़ी दूरी पर गाडी खड़ी की. अचानक इतने करीब से उसे देख पाना ज़रा परेशानी की बात थी. और मैं बोली “हे भगवान! किसी ने कोई गलती कर दी है.” लेकिन वह वहीं था, रोशनियों में. मैं वहीं बैठकर खुद से कहने लगी “तो यह ऐसा दिखाई देता है.” और वह सब मेरे लिए अजीब था और स्टूडियो में वे मुझसे कह चुके थे “याद रखना, तुम कोई स्टार नहीं हो.” मगर वह वहां पर था रोशनियों में. मुझे इस बात का अहसास पत्रकार पुरुषों ने कराया कि मैं एक स्टार हूँ; मैं पुरुष कह रही हूँ स्त्रियाँ नहीं जो आपका इंटरव्यू करती हैं और आपके साथ दोस्ताना और गर्मजोशी से भरी रहती हैं. खैर, प्रेस का वह हिस्सा, मेरा मतलब पुरुष पत्रकारों से है, जो हमेशा बहुत दोस्तीभरे होते थे बशर्ते उनमें से किसी को मुझसे कोई व्यक्तिगत शिकायत न हो, कहा करते थे “पता है, तुम इकलौती स्टार हो.” और मैं कहती “स्टार?” और वे मुझे इस तरह देखते जैसे मैं कोई पागल होऊं. मेरा ख्याल है कि अपने तरीके से उन्होंने मुझे अहसास दिलाया कि मैं प्रसिद्ध हो गयी हूँ.  
मुझे याद है जब मुझे ‘जेंटलमैन प्रेफर ब्लौन्ड्स’ में रोल मिला. जेन रसेल फिल्म में ब्रूनेट थी और मैं ब्लौंड. उसे दो लाख डॉलर मिले जबकि मुझे हफ्ते के पांच सौ. लेकिन मेरे लिए वह भी ठीकठाक रकम थी. और उसका सुलूक मेरे साथ बहुत अच्छा होता था. इकलौती बात यह थी कि मुझे एक ड्रेसिंग रूम नहीं मिल सका. आखिरकार मुझ से बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने कहा “देखिये, जो भी हो मैं ब्लौंड हूँ और फिल्म का नाम ‘जेंटलमैन प्रेफर ब्लौन्ड्स’!” तो भी वे कहते रहे “याद रखो तुम एक स्टार नहीं हो.”मैंने कहा “मैं जो भी होऊं मैं ब्लौंड हूँ!” और मैं लोगों से कहना चाहती हूँ कि अगर मैं एक स्टार हूँ तो मुझे लोगों ने स्टार बनाया है. ऐसा न किसी स्टूडियो ने किया, न व्यक्ति ने – सिर्फ लोगों ने किया. स्टूडियो में प्रतिक्रिया पहुँच रही थी, फैन मेल या जब मैं एक प्रीमियर में जाती थी या जब कोई प्रोड्यूसर मुझसे मिलना चाहता था. क्यों, मुझे मालूम नहीं. जब वे सारे मेरी तरफ बढ़ रहे थे तो मैंने पलटकर देखा मेरे पीछे कौन है और मेरे मुंह से निकला “हे ईश्वर!” मुझे भयानक डर लगा. मुझे ऐसा अहसास होता था, और अब भी कभी होता है कि कभी कभी मैं किसी को उल्लू बना रही हूँ; किस आदमी या चीज़ को या खुद अपने आप को – मुझे मालूम नहीं.
छोटे से छोटे सीन के बारे में भी – चाहे मुझे उसके भीतर आकर सिर्फ “हैलो” कहना होता – मैंने हमेशा सोचा है कि लोगों को उनके पैसे की पूरी कीमत मिलनी चाहिए और यह भी कि मेरा सबसे बेहतरीन उन तक पहुंचाना मेरा फ़र्ज़ है. किन्हीं दिनों मुझे अजीब से चीज़ महसूस होती है जब सीन में उसके अर्थ के प्रति आपकी बड़ी ज़िम्मेदारी होती है, ता मैं इच्छा करती हूँ “काश मुझे सिर्फ कपडे धोने वाली का रोल करना होता.” स्टूडियो जाते हुए अगर मैं किसी को सफाई करते हुए देखती तो मैं कहती “मुझे यही बनना है. यही मेरी ज़िन्दगी की ख्वाहिश है.” लेकिन मैं सोचती हूँ सारे अभिनेता इस से गुजरते हैं. हम हमेशा अच्छे बने रहना नहीं चाहते, हमें होना ही होता है. जब मैंने अपने अध्यापक ली स्ट्रासबर्ग से नर्वसनेस के बारे में बात करते हुए कहा “मुझे नहीं पता क्या ठीक नहीं है पर मैं थोड़ी नर्वस हूँ. वे बोले “जब तुम नर्वस न रहो तो अभिनय छोड़ देना, क्योंकि नर्वसनेस संवेदनशीलता की तरफ इशारा करती है.” और इसके अलावा अभिनेताओं को शर्माने से संघर्ष किसी भी और व्यक्ति से ज्यादा करना होता है. हमारे भीतर एक सेंसर होता है जो बताता है की हम किस सीमा तक आगे जा सकते हैं, जैसा बच्चे के खेलने में होता है. मुझे लगता है लोग समझते हैं हम बस काम करने चले जाया करते हैं. सही है, ऐसा हम सब करते हैं. हम सब काम करते हैं. लेकिन बड़ा संघर्ष है. मैं दुनिया में खुद को लेकर सब से सचेत रहने वाले लोगों में से हूँ. मुझे सचमुच बहुत संघर्ष करना पड़ता है.
अभिनेता कोई मशीन नहीं होता, चाहे वह कितना ही कहे कि वह है. रचनात्मकता की शुरुआत मानवीयता से होती है और जब आप एक मानव होते हैं आप महसूस करते हैं, सहते हैं, आप खुश हैं, आप बीमार हैं, आप नर्वस हैं या कुछ भी हैं. किसी भी रचनात्मक मनुष्य की तरह मैं थोडा अधिक नियंत्रण चाहूंगी ताकि चीज़ें मेरे लिए उस वक़्त तनिक आसान हो सकें जब निर्देशक कहता है “एक आंसू, अभी.” ताकि एक आंसू बाहर निकल सके. लेकिन एक दफा मेरे दो आंसू आए क्योंकि मैंने सोचा “इसके ऐसी हिम्मत कैसे हुई?” गेटे ने कहा था “प्रतिभा का विकास एकाकीपन में होता है.” आप को पता है? और वह किस कदर सही था. आपको एकाकीपन की ज़रुरत महसूस होती है, और मैं समझती हूँ अभिनेता के तौर पर अधिकतर लोग इस बात को नहीं समझते. यह अपने वास्ते कुछ किस्म के रहस्यों के अस्तित्वमान होने जैसा है, जिन्हें आप अभिनय करते समय थोड़े ही समय के लिए सारी दुनिया के आगे रख देते हैं. लेकिन हर आदमी आपकी बांह खींच रहा है. हर किसी को जैसे आपका कोई टुकड़ा चाहिए
मुझे लगता है कि जब आप विख्यात होते हैं आपकी हर कमजोरी को अतिरंजित किया जाता है. इंडस्ट्री ने एक ऐसी माँ की तरह व्यवहार करना चाहिए जिसका बच्चा एक कार के सामने घिसट गया हो. लेकिन बजाय बच्चे को गोद में उठाने के लोग उसे दंड देना शुरू कर देते हैं. जैसे कि आपको जुकाम लगने तक का अधिकार तक नहीं. भई आप को हिम्मत कैसे हुई खुद को ज़ुकाम लगाने की! मेरा मतलब है एक्जीक्यूटिव्ज़ को ज़ुकाम हो सकता है और वे जब तक चाहें अपने घर रह सकते हैं और इसकी सूचना फोन पर दे सकते हैं लेकिन एक अभिनेता होने के नाते तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई कि तुम्हें ज़ुकाम हो गया या वायरल. और आप जानते हैं आप को कितना खराब महसूस होता है जब आप बीमार होते हैं. कभी मेरी इच्छा होती है कि बुखार और वायरल इन्फेक्शन को लेकर वे एक कॉमेडी बनाते. मैं वैसी अभिनेत्री नहीं हूँ जो सेट पर केवल अनुशासन के उद्देश्य से पहुँचती है. इसका कला से कोई लेना देना नहीं. मैं खुद चाहूंगी अपने काम के भीतर ज़्यादा अनुशासित होना. मैं एक परफोर्मेंस देने आई हूँ न किसी स्टूडियो द्वारा अनुशासित किए जाने के लिए. जो भी हो मैं किसी मिलिट्री स्कूल में तो नहीं हूँ. माना जाता है कि यह एक आर्ट फॉर्म है न कि कुछ उत्पादन करने वाला कोई प्रतिष्ठान. देखिये जो संवेदनशीलता मुझसे अभिनय करवाती है वहीं से मेरी प्रतिक्रया भी आती है. एक अभिनेता को एक संवेदनशील उपकरण माना जाता है. आइजैक स्टर्न अच्छे तरीके से अपने वायोलिन की देखभाल करते हैं. क्या होगा अगर हर कोई उनके वायोलिन पर कूदना शुरू कर दे?

(जारी. अगली क़िस्त में समाप्य.) 

2 comments:

Lalit Chahar said...

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Lalit Chahar said...

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