Tuesday, October 15, 2013

यह राग पूरबी की धुन उन सब की कथा सुनाती है


जल की दुनिया में भी बहार आती है 

-वीरेन डंगवाल 


जल की दुनिया में भी बहार आती है 
मछली की आंखों की पुतली भी हरी हुई जाती है 

जब आती हवा हांकती लेकर काले-काले जलद यूथ 
प्राणों को हरा-भरा करती 
बेताब बनाती बूढ़े-भारी पेड़ों तक को 
धरती के जर्रे-जर्रे को 
जीवन के निरूपमेय रस से भरती 
अजब संगीत सुनाती है 

यह शीतल राग हवा का, यह तो है खास हमारे पूरब का 
यह राग पूरबी दुनिया का अनमोल राग 
इसकी धुन जिंदा रखती है मेरे जन को 
हैं जहां कहीं, अनवरत सताए जाते जो 

जांगर करते 
खटते पिटते 
लड़ते-भिड़ते 
गाने गाते 

सन्‍तप्‍त हृदय-पीडित, प्रच्‍छन्‍न क्रोध से भरे 
निस्‍सीम प्रेम से भरे, भरे विस्‍तीर्ण त्‍याग 
मेरे जन जो यूं डूबे हैं गहरे पानी में 
पर जिनके भीतर लपक रही खामोश आग 

यह राग पूरबी की धुन उन सब की कथा सुनाती है 
जल की दुनिया में भी बहार आती है 
मछली की आंखों की पुतली भी हरी हुई जाती है. 

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