Wednesday, December 31, 2014

क़समें नए साल की

वान गॉग की कृति 'विलोज़ एट सनसेट'

जापानी कवि शुन्तारो तानीकावा की यह अति प्रसिद्ध कविता कबाड़खाने पर ३१ दिसंबर के मौके पर एकाधिक बार पोस्ट की जा चुकी है. आप सभी को नए साल की शुभकामनाएं देते हुए आज पुनः -


नए साल की क़समें 

क़सम खाता हूं शराब और सिगरेट पीना नहीं छोड़ूंगा
 
क़सम खाता हूं
, जिन से नफ़रत करता हूं उन्हें नहला दूंगा नीच शब्दों से
क़सम खाता हूं
, सुन्दर लड़कियों को ताका करूंगा
क़सम खाता हूं हंसने का जब भी उचित मौका होगा
, खूब खुले मुंह से हंसूंगा
सूर्यास्त को देखा करूंगा खोया खोया
फ़सादियों की भीड़ को देखूंगा नफ़रत से
क़सम खाता हूं दिल को हिला देने वाली कहानियों पर रोते हुए भी सन्देह करूंगा
दुनिया औए देश के बारे में दिमागी बहस नहीं करूंगा
बुरी कविताएं लिखूंगा और अच्छी भी
क़सम खाता हूं समाचार संवाददाताओं को नहीं बताऊंगा अपने विचार
क़सम खाता हूं दूसरा टीवी नहीं खरीदूंगा
क़सम खाता हूं अंतरिक्ष विमान चढ़ने की इच्छा नहीं करूंगा
क़सम खाता हूं कसम तोड़ने का अफ़सोस नहीं करूंगा

इस की तस्दीक में हम सब दस्तख़त करते हैं.

2 comments:

Pramod Singh said...

क़सम खाता हूं मुबारक नहीं कहूंगा.

Jmd Tech said...

अच्छा है जो सब स्वीकार नहीं करते आपने वो लिखा हो हर नए साल पर नयी कसमें फ़िर तोडना फ़िर अफ़सोस करना | ये सही है कोई कसम ही नहीं खाओ और खाओ तो कोई अफ़सोस नहीं
बिंदास
Hindi Shayari