Sunday, January 11, 2015

तुम्हारा कैमरा मेरे दिल का फोटो नहीं खींच सकता


माची तवारा का परिचय पाने के लिए आप इसी ब्लॉग के इस लिंक पर जा सकते हैं -  कौन हैं माची तवारा. आज उनकी कुछेक और कविताओं पर निगाह डालिए –

1.
ऊपर निगाह कर
गिरती हुई बारिश की तरफ
अचानक
मुझे चूमे जामे की इच्छा होती है
अभी इसी पल

2.
ज़िन्दगी का एकांत
जिसमें एक और एक
हमेशा बनाते हैं दो
बरसता है मुझ पर
दिसम्बर के इस दिन

3.
“तीस की उम्र तक
मैं टहलते रहने वाला हूँ”
तुम्हारे शब्दों पर
अचरज करती हूँ कौन सा
हिस्सा हूँ तुम्हारी सीनरी का मैं

4.

मार्च के इस दिन
मेरे दिल का एक भी हिस्सा
नहीं कर रहा वसंत की प्रतीक्षा
तुम्हारे साथ देखती हूँ
देर से खिल रहा आलूबुखारे का एक दरख्त

5.
जिस पल
खत्म करती हूँ लिखना
लगाती हूँ टिकट
समय बहना शुरू कर देता है
उत्तर की प्रतीक्षा करता

6.
हालांकि
अभी उतना गाढ़ा नहीं हुआ अभी
कि नफ़रत कहलाया जा सके
एक अपारदर्शी द्रव
इकठ्ठा होना शुरू है मेरे सीने में

7.
अपनी मुस्कराहट को
आधे सेकेण्ड को फ्रीज़ कर
मैं देखती हूँ
तुम्हारे कैमरे की ओर
जो मेरे दिल का फोटो नहीं खींच सकता

8.
नियत समय से
थोड़ी देर में पहुँचता
और मुझे छोड़ जाता
निराश हमेशा की तरह
डाकिया

9.
मेरी रंगीन पेंसिलों में
सिर्फ हरी वाली
हो गयी है छोटी
दिखाती हुई
किस रंग की कमी है मेरे भीतर

10.    
एक दृष्टि के साथ
जो आती है केवल बच्चे को जन्म देने के बाद
सेब का एक पेड़
चौड़ा पसारता है अपने हाथ

बर्फ के मौसम के स्वागत में

1 comment:

Kavita Rawat said...

माची तवारा की सुन्दर रचना प्रस्तुति हेतु आभार!