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Friday, March 4, 2016

जस की तस धर दीन्ही चदरिया


आपने पंडित कुमार गन्धर्व की गाई कबीर की रचना झीनी-झीनी बीनी चदरिया सुनी होगी. आज आपके लिए लाया हूँ गुंडेचा बंधुओं के स्वर में यही रचना. बेहतरीन कम्पोज़ीशन है – ट्रेडमार्क गुंडेचा ब्रदर्स-

Thursday, November 29, 2012

आज दिन भर कबीर – ३ – गुंडेचा बंधु - हम ही अपना आप लगावा


तीन लोक में हमारा पसारा, आवागमन सब खेल हमारा – गा रहे हैं गुंडेचा बंधु


Friday, November 23, 2012

झीनी चदरिया


गुंडेचा बंधुओं से सुनिए कबीरदास जी का यह मशहूर भजन जिसे कुछ दिन पहले आप ने मुख्तियार अली की आवाज में सुना था.