ये सच की आवाज है जो जनता के सवाल को तरन्नुम में उठा रही है। असली आजादी की तड़प में थिरक रही है। ये आवाज यातना से नहीं डरती! इस आवाज को गोली नहीं मारी जा सकती! इस आवाज को कैद नहीं किया जा सकता! ये बस्सियों के तुम्हारे सामने मिमियाने और जनता के सामने गुर्राने की आवाज नहीं है, इसलिए ये आवाज बहुत खूबसूरत है! ये आवाज देर से उठी है लेकिन बहुत दूर तलक पहुंच रही है! अपनी कुर्सी, पगड़ी और सूट संभालो सत्ताधीशों!
(उमाशंकर सिंह की फेसबुक वॉल से साभार)
