





अभी हाल ही में मोटर साइकिल भ्रमण करते हुए यमुनोत्री जाना हुआ था । कई अच्छे और ख़राब अनुभव रहे . अच्छे -अच्छे लिख चुका बैठ के मयखाने में और ख़राब ले के आ पसरा हूँ कबाड़ खाने में , इस उम्मीद में की कुछ सहानुभूति ही मिल-मिला जाए यार लोगों की ! फ़िर एक वरिष्ठ ब्लॉग-धर्मी भी इन दिनों बहुत कुछ लिख रहे हैं गंगा-घाट की सफाई और पिलाट्टिक के प्रबंधन के बारे में । उन्हें भी कहना चाहता हूँ के गंगा हो या जमना सब ऊपर से बहती हैं महाराज और ऊपर से ही पिलाट्टिक मय कर दी जाती हैं सो ये साफ़-सफाई अधूरी है । बहरहाल पैदल यात्रा मार्ग में प्लास्टिक के ऐसे-ऐसे कब्रगाह नज़र आए कि साँस अटकने को हो गयीं । अब पहले के मुकाबले चढाई का रास्ता पक्का ज़रूर कर दिया गया है और जगह-जगह डस्टबिन भी टांग दिए गए हैं मगर बावजूद इसके जो दिखा वो आप भी देख लें --
अगर आप धार्मिक हैं तो जान लीजिये कि शनि और यमराज की बहिन यमुना को गंदा करने का हश्र क्या होगा और अगर नास्तिक हैं तो भी आपको समझाना क्या , पर्यावरण की रक्षा का महत्व सभी के लिए है भाई और आइये मिल कर तै करें कि इस तरह नदियों को गंदा करने वालों का क्या इलाज होना चाहिए ।