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Tuesday, December 15, 2015

इतिहास में वह पहली औरत कौन थी जिसे सबसे पहले जलाया गया


औरतें                                                                                                        
-रमाशंकर यादव विद्रोही


कुछ औरतों ने
अपनी इच्छा से
कुएं में कूदकर जान दी थी,
ऐसा पुलिस के रिकार्डों में दर्ज है.
और कुछ औरतें 
चिता में जलकर मरी थीं,
ऐसा धर्म की किताबों में लिखा है.

मैं कवि हूं,
कर्ता हूं,
क्या जल्दी है,
मैं एक दिन पुलिस और पुरोहित,
दोनों को एक ही साथ
औरतों की अदालत में तलब करूंगा,
और बीच की सारी अदालतों को
मंसूख कर दूंगा.

मैं उन दावों को भी मंसूख कर दूंगा,
जिन्हें श्रीमानों ने
औरतों और बच्चों के खिलाफ पेश किया है.
मैं उन डिग्रियों को निरस्त कर दूंगा,
जिन्हें लेकर फौजें और तुलबा चलते हैं.
मैं उन वसीयतों को खारिज कर दूंगा,
जिन्हें दुर्बल ने भुजबल के नाम किया हुआ है.

मैं उन औरतों को जो
कुएं में कूदकर या चिता में जलकर मरी हैं,
फिर से जिंदा करूंगा,
और उनके बयानों को
दुबारा कलमबंद करूंगा,
कि कहीं कुछ छूट तो नहीं गया!
कि कहीं कुछ बाकी तो नहीं रह गया!
कि कहीं कोई भूल तो नहीं हुई!

क्योंकि मैं उस औरत के बारे में जानता हूँ
जो अपने एक बित्ते के आंगन में
अपनी सात बित्ते की देह को
ता-जिंदगी समोए रही और
कभी भूलकर बाहर की तरफ झांका भी नहीं.
और जब वह बाहर निकली तो
औरत नहीं, उसकी लाश निकली.
जो खुले में पसर गयी है,
माँ मेदिनी की तरह.

एक औरत की लाश धरती माता
की तरह होती है दोस्तों!
जो खुले में फैल जाती है,
थानों से लेकर अदालतों तक.
मैं देख रहा हूं कि
जुल्म के सारे सबूतों को मिटाया जा रहा है.
चंदन चर्चित मस्तक को उठाए हुए पुरोहित,
और तमगों से लैस सीनों को फुलाए हुए सैनिक, 
महाराज की जय बोल रहे हैं.
वे महाराज की जय बोल रहे हैं.
वे महाराज जो मर चुके हैं,
और महारानियां सती होने की तैयारियां कर रही हैं.
और जब महारानियां नहीं रहेंगी,
तो नौकरानियां क्या करेंगी?
इसलिए वे भी तैयारियां कर रही हैं.

मुझे महारानियों से ज्यादा चिंता 
नौकरानियों की होती है,
जिनके पति जिंदा हैं और
बेचारे रो रहे हैं.
कितना खराब लगता है एक औरत को
अपने रोते हुए पति को छोड़कर मरना,
जबकि मर्दों को
रोती हुई औरतों को मारना भी
खराब नहीं लगता.
औरतें रोती जाती हैं,
मरद मारते जाते हैं.
औरतें और जोर से रोती हैं,
मरद और जोर से मारते हैं.
औरतें खूब जोर से रोती हैं,
मरद इतने जोर से मारते हैं कि वे मर जाती हैं.

इतिहास में वह पहली औरत कौन थी,
जिसे सबसे पहले जलाया गया,
मैं नहीं जानता,
लेकिन जो भी रही होगी,
मेरी मां रही होगी.
लेकिन मेरी चिंता यह है कि
भविष्य में वह आखिरी औरत कौन होगी,
जिसे सबसे अंत में जलाया जाएगा,
मैं नहीं जानता,
लेकिन जो भी होगी
मेरी बेटी होगी,
और मैं ये नहीं होने दूंगा.

Saturday, December 12, 2015

और मेरे बाघ सोते नहीं हैं, बीड़ी पीते होते हैं

कोरियाई चित्रकार मेया ली का चित्र  'द स्मोकिंग टाइगर'
बीड़ी पीते बाघ
-रमाशंकर यादव विद्रोही


कि अभी मैं आपको बताऊंगा नहीं 
बताऊंगा तो आप डर जायेंगे 
कि मेरी सामने वाली इस जेब में
एक बाघ सो रहा है 

लेकिन आप डरे नहीं 
ये बाघ
इस कदर से मैंने ट्रेंड कर रखा है
कि अब आप देखें 
कि मेरी सामने वाली जेब में एक बाघ सो रहा है 
लेकिन आपको पता नहीं चल सकता 
कि बाघ है 
सामने वाली जेब में एक आध बाघ पड़े हों 
तो कविता सुनाने में सुभीता रहता है 
लेकिन एक बात बताऊँ?
आज मैं आप दोस्तों के बीच में 
कविता सुना रहा हूँ
इसलिए मेरी जेब में एक ही बाघ है
लेकिन जब मैं कविता सुनाता हूँ - उधर
उधर- जिस तरफ रहते हैं मेरे दुश्मन 
अकेले अपने ही बूते पर 
तो मेरी जेब में एक नहीं दो बाघ रहते हैं
और तब मैं अपनी वो लाल वाली कमीज पहनता हूँ 
जिसकी कि आप दोस्त लोग बड़ी तारीफ़ करते हैं 
जिसमें सामने दो जेबें हैं 
मैं कविता पढता जाता हूँ
और मेरे बाघ सोते नहीं हैं 
बीड़ी पीते होते हैं 
और बीच बीच में 
धुएं के छल्ले छोड़ते जाते हैं...

Thursday, December 10, 2015

वो जो था बन्दर का बच्चा बन्दर नहीं था, आदमी था

फ़ोटो https://donaldwhy.wordpress.com से साभार 

वो तो देवयानी का ही मर्तबा था
-रमाशंकर यादव विद्रोही

वो तो देवयानी का ही मर्तबा था
कि सह लिया साँच की आँच 
वरना बहुत लम्बी नाक थी ययाति की 
तो नाक में नासूर है 
और नाक की फ़ुफ़कार है 
और नाक विद्रोही की भी शमशीर है, तलवार है 
और जज्बात कुछ ऐसा कि बस सातों समंदर पार है 
और ये सर नहीं गुम्बद है 
कोई पीसा की मीनार है 
और ये गिरा तो आदमियत का अक़ीदा गिर पड़ेगा 
और ये गिरा तो बलन्दियों का पेंदा गिर पड़ेगा 
और ये गिरा तो मुहब्बत का घरौंदा गिर पड़ेगा 
और इश्क़ का और हुस्न का 
दोनों का
दीदा गिर पड़ेगा
इस लिए रहता हूँ जिन्दा 
वरना कब का मर चुका हूँ 
मैं सिर्फ काशी में ही नहीं रूमान में भी जी चुका हूँ 
और हर जगह 
ऐसी ही जिल्लत  
और हर जगह ऐसी जहालत 
और हर जगह पर है पुलिस 
और हर जगह पर है अदालत 
और हर जगह पर हैं पुरोहित 
और हर जगह नरमेध है 
और हर जगह कमजोर मारा जा रहा है, खेद है
तो सूलियां ही हर जगह पर हैं निजामों की निशान
और हर जगह पर फांसियां लटकाये जाते हैं गुलाम 
हर जगह पर औरतों को मारा-पीटा जा रहा है 
खोदा-गाड़ा जा रहा है 
जिन्दा जलाया जा रहा है 
और हर जगह पर फूल हैं 
और हर जगह आंसू बिछे हैं 
और ये कलम है 
सरहदों के पार भी नगमे लिखे हैं  
तो आप को बतलाऊं मैं इतिहास की शुरुआत को 
और किस लिए बारात दरवाजे पे आई रात को 
और ले गई दुल्हन उठाकर 
और मंडप को गिराकर
और एक दुल्हन के लिए आये कई दूल्हे मिलाकर 
और जंग कुछ ऐसा मचाया 
कि तंग दुनिया हो गयी 
और मरने वाले की चिता पर 
जिन्दा औरत सो गयी 
और तब बजे घड़ियाल 
पंडित शंख घंटे घनघनाये
और फौजों ने भोपू बजाये 
और पुलिस ने तुरही बजाये 
और मंत्रोच्चारण ये हुआ कि मंगलम औरत सती हो 
और जीते जी जलती रहे जिस भी औरत के पति हो
और तब भरे बाजार 
और बाजार में सामान आये  
और बाद में सामान की गिनती में खुद इंसान आये  
तो बगदाद और बदख्शां में खुल्ला बिकते थे गुलाम 
सीरिया और काहिरा में पट्टा होते थे गुलाम 
और बेतलहम येरूसलम में रेहन होते थे गुलाम 
और रोम में और काकुआ में गिरवी होते थे गुलाम 
और मंचूरिया शंघाई में नीलाम होते थे गुलाम 
और मगध कोशल काशी में बेनामी होते थे गुलाम 
और सारी दुनिया में किराये पे उठते थे गुलाम 
पर वाह रे मेरा जमाना
और वाह रे भगवा हुकूमत 
कि सरे बाजार में खैरात बँटते हैं गुलाम
तो लोग कहते हैं कि लोगों पहले तो ऐसा न था 
पर मैं तो कहता हूँ कि लोगों कब कहाँ कैसा न था 
तो दुनिया के बाजार में सबसे पहले क्या बिका था 
तो सबसे पहले दोस्तों वो 
वो बन्दर का बच्चा बिका था 
बन्दर का बच्चा बिका था 
और बाद में तो डार्विन ने सिद्ध बिल्कुल कर दिया 
कि वो जो था बन्दर का बच्चा बन्दर नहीं था 
आदमी था.

मगर आदमी का फरज ये नहीं है

फ़ोटो https://islampeace1.wordpress.com से साभार 

हकीकत कोई नंगई तो नहीं है
-रमाशंकर यादव विद्रोही

हकीकत कोई नंगई तो नहीं है
हकीकत किसी की फजीहत नहीं है 
हकीकत वही है जो खुद रास आये
हकीकत किसी की नसीहत नहीं है
और हकीकत की वारिस है खुद ही हकीकत
हकीकत किसी की वसीयत नहीं है 
और हकीकत वही है जो मैं कह रहा हूँ 
और जो मैं कह रहा हूँ 
यहीं कह रहा हूँ
कि अभी दाब दूँ तो जमीं चीख देगी
और अभी तान दूँ तो गगन फाट जाये 
मगर आदमी का फरज ये नहीं है
फरज है 
कि छप्पर गिरे तो उठाये  
इसी के लिए
हाँ इसी के लिए तो
अमीना का छप्पर 
और हामिद की खपरैल 
और सालिक की शादी 
कि मालिक की तेरही
कि बैजू की बीबी
कि सरजू की रखैल 
सभी के लिए
हाँ सभी के लिए 
तो सभी के लिए 
इक वतन चाहिए ही  
ये कमबख्त हैं 
इसमें अब शक कहाँ है 
मगर अब मर गए 
तो कफ़न चाहिए ही
और आज से 
इक कफ़न ही है झंडा मेरा 
मैं हरिश्चंद्र के बाप का बाप हूँ 
मैं वही बीज हूँ, जो, जमा आदि में  
मैं वही फल हूँ, फलता है, जो अंत में