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Wednesday, September 9, 2009

हैनरी द तुलूस लौत्रेक का बचपन: दूसरा हिस्सा

हैनरी का बनाया विन्सेन्ट वान गॉग का चित्र


(हैनरी द तुलूस लौत्रेक की पुण्यतिथि के अवसर पर पिछली पोस्ट से जारी)

"इसका मतलब हुआ कि मरने के बाद मैं स्वर्ग में जाऊंगा." उसकी आवाज़ में यह बात तय हो जाने की प्रसन्नता थी.

"हां शायद ... अगर तुम एक अच्छे लड़के बनोगे और दिल से भगवान को प्यार करोगे तो."

"वो मुझ से नहीं हो पाएगा" उसके स्वर में अन्तिम फ़ैसला था "मैं उसे पूरे दिल से प्यार नहीं कर सकता क्योंकि में तुम्हें ज़्यादा प्यार करता हूं."

"तुम्हें ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए हेनरी."

"लेकिन मैं कहूंगा!" उसकी आंखों में बच्चों वाली ज़िद थी जिसके आगे आपको हथियार फ़ेंक देने होते हैं "मैं वाक़ई आपको ज़्यादा प्यार करता हूं."

घुटनों पर बांहें धरे वे उसे देख रही थीं. इस बात पर वह कभी हार मानने वाला नहीं. लेकिन शायद किसी बच्चे से ऐसे भगवान को प्यार कर्ने को कहना कुछ ज़्यादा ही होता है जो आपको न गले से लगा सके न बिस्तर में सुला सके....

"ठीक है. मैं भी तुम्हें प्यार करती हूं हेनरी" उन्होंने कहा. वे जानती थीं उसे उनकी तरफ़ से पूरी तरह से आश्वस्ति चाहिए थी. "और अब बार बार बीच में टोकना बन्द करो वरना मैं तुम्हें वो बैल के बारे में नहीं बताऊंगी. तो ... ये कोई चार साल पुरानी बात है, तुम ज़रा से थे, कुल तीन साल के ..."

बहुत कोमल आवाज़ के साथ उन्होंने उसे रिचर्ड के बप्तिस्मे का कि़स्सा बताया. हेनरी को इस घटना की ज़रा भी याद नहीं थी. रस्म पूरी हो जाने पर आर्चबिशप ने सभी लोगों से पवित्र रजिस्टर में दस्तख़त करने को कहा. अब तक हेनरी चुप़चाप बैठा रहा था पर दस्तख़त की बात आने पर वह भी ऐसा करने पर अड़ गया.

"लेकिन मेरे बच्चे," पादरी ने कहा था " जब तुम्हें लिखना ही नहीं आता, तुम द्स्तख़त कैसे कर सकोगे?"

हेनरी ने तनिक ढिठाई से जवाब दिया था, " तब मैं एक बैल का स्केच बना दूंगा!"

इस क़िस्से से उसे ख़ास मज़ा नहीं आया और एक झतके के साथ उसने पेन्सिल का आखिरी स्ट्रोक चलाया.

"ये रहा!"

किसी विजेता के भाव से हेनरी ने स्केच अपने हाथों में ले कर उनके सामने किया.* (लॉत्रेक के बचपन में बनाए आश्चर्यजनक पोर्ट्रेट्स एल्बी म्यूज़ियम में प्रदर्शित हैं.)

"देखा पांच मिनट भी नहीं लगे!"

उन्होंने पोर्ट्रेट की तारीफ़ का दिखावा किया : "बढ़िया! बहुत बढ़िया! तुम एक असली आर्टिस्ट हो!" उन्होंने स्केचबुक को गार्डन-बेन्च पर रखा..

"यहां आकर मेरे पास बैठो, रिरी."

वह अचानक चौकन्ना हो गया. मम्मा के अलावा उसे और कोई रिरी नहीं कहता था. ऐसा भी कभी-कभार ही होता था. यह उन दोनों के बीच का गुप्त पासवर्ड था. या तो उस पर कोई बड़ी मेहरबानी होने वाली होती थी - अगर वह इतवार की प्रार्थना में असाधारण रूप से शान्त बैठा रहता या सौ तक गिनती गिन देता - या किसी अपशकुन या बुरी ख़बर जैसा कुछ होता था.

"तुम सात साल के हो गए हो" उन्होंने शुरू किया, वह उनसे लिपट कर और पास आ गया, "तुम एक बड़े लड़के हो अब. तुम एक बड़े जहाज़ के कप्तान बनना चाहते हो ना? दुनिया भर में घूम कर शेरों और बाघों के स्केच बनाना चाहते हो ना?"

उसने बेचैन सहमति में सिर हिलाया. उन्होंने उसे अपने नज़दीक खींचकर मानो उस आघात को ज़रा हल्का करने का जतन किया.

"तो - अब तुम्हारे स्कूल जाने का वक़्त आ गया है."

"स्कूल?" अस्पष्ट तरीके से परेशान होते हुए उसने दोहराया, "लेकिन मैं स्कूल जाना नहीं चाहता."

"मुझे पता है मेरे छोटू, लेकिन तुम्हें जाना ही होगा. सारे छोटे लड़के स्कूल जाते हैं." उन्होंने उसके काले बालों को सहलाया. "पेरिस में फ़ोन्तेन्स नाम का एक बड़ा स्कूल है. सारे अच्छे लड़के वहीं जाते हैं. वहां वे साथ साथ खेलते हैं और मज़े करते हैं. कितने सारे मज़े!"

"लेकिन मैं स्कूल जाना नहीं चाहता!"

उसकी आंखों में आंसू भर आए. उसकी समझ में पूरी तरह नहीं आया कि मां के शब्दों का वास्तविक तात्पर्य क्या था, लेकिन उसे अस्पष्ट सा आभास हुआ कि उस के आसपास दुनिया ढह रही है: कुत्तागाड़ी, मम्मा और आन्ट आर्मान्दीन से मिलने वाले पाठ, खच्चर की सवारी, उसका ड्रम, जोसेफ़, अस्तबलों में जाना, एनेट के साथ गलियारों में लुकाछिपी खेलना ....

"श्श्श्श!" उन्होंने होंठों पर उंगली रखते हुए कहा "अच्छे बच्चे कभी नहीं कहते 'हम ये नहीं चाहते.' और तुम रोओ मत. तुलूस लॉत्रेक कभी नहीं रोया करते."

उन्होंने उसकी आंखें पोंछी, नाक साफ़ की और उसे विस्तार में बताया कि तुलूस लॉत्रेक परिवार के किसी भी सदस्य ने क्यों रोना नहीं बल्कि हर वक़्त हंसते रहना चाहिए. उन्होंने उसे उस के पर-पर-पर-पर-पर दादा रेमण्ड चतुर्थ काउन्ट दे तुलूस लौत्रेक और उनके पहले अभियान के बारे में बताया.

"इस के अलावा, " उन्होंने जोड़ा "जोसेफ़ और एनेट भी तुम्हारे साथ आ रहे हैं."

"वो भी?"

इस से उसे थोड़ी राहत पहुंची.

एनेट मम्मा की पुरानी नर्स थी. वह बहुत छोटी थी. उसकी आंखें चमकदार नीली थीं और उस के चेहरे पर झुर्रियां घिरी हुई थीं. उसके दांत भी नहीं थे और वह अपने होंठों को अन्दर की तरफ़ खींच लिया करती थी जिससे लगता था कि उस का मुंह भी नहीं है. वह सुबह से शाम तक गलियारों में यहां से वहां भागा करती थी, उसके सफ़ेद टोपे के किनारे किसी चिड़िया के पंखों की तरह फड़फड़ाया करते. ऊन कातते समय वह हेनरी को अपने पास एक ऊंचे स्टूल में बैठने दिया करती और तीखे स्वर में उसे लोकगीत सुनाया करती.

जोसेफ़ की उपस्थिति भी विश्वासवर्धक थी. वह हमेशा से हर जगह था - 'ओल्ड टॉमस' - बग़ीचे में, डाइनिंग रूम में लगे पोर्ट्रेट्स में. हालांकि वह बमुश्किल मुस्कराता था, दोस्त वह बहुत पक्का था; और इस के अलावा वह हेनरी के पोर्ट्रेट्स के लिए अच्छा विषय था: उसकी पंखों वाली हैट, घुटनों पर ख़त्म हो जाने वाली सफ़ेद पतलून और कोचवान का नीला कोट.

"और इतना ही नहीं है" उन्होंने अपनी बात जारी रखी "पेरिस में तुम्हारी मुलाकात मालूम है किस से होने वाली है ... सोचो ज़रा ..." एक क्षण के लिए उन्होंने आखिरी बात को रोके रखा, "वहां तुम्हें पापा मिलेंगे."

"पापा!"

अच्छा! इस बात ने चीज़ों को बिल्कुल ही बदल दिया. पापा बहुत शानदार थे. जब भी वे यहां आते थे, पढ़ाई भुला दी जाती थी और रूटीन पूरी तरह बिगड़ जाया करता. जीवन में एक ख़ास तरह की साहसिकता आ जाया करती. पुराना क़िला उनके बूटों की धमक और उनकी आवाज़ की गूंज के कारण जैसे नींद से जाग जाया करता. वह पापा के साथ लम्बी सवारी पर जाया करता और वे उसे घोड़ों, युद्धों और शिकार-अभियानों की कहानियां सुनाया करते.

"तो क्या वहां हम उनके साथ उनके महल में रहेंगे?" हेनरी की आंखें ख़ुशी से चमकने लगीं.

"पेरिस में लोग महलों में नहीं रहते. वे या तो होटलों में रहते हैं या सुन्दर अपार्टमेन्टों में जिनकी बालकनियों से नीचे सड़क पर देखा जा सकता है."

"लेकिन हम रहेंगे तो उन के साथ ही ना?" उसकी आवाज़ में अब थकान आने लगी थी.

"हां हां, कुछ दिनों के लिए ज़रूर. वो तुम्हें सवारी के लिए Bois de Bologne ले जाएंगे - वहां विशाल जंगल के बीच एक झील है जिसमें लोग जाड़ों में स्केटिंग किया करते हैं. पेरिस में जाड़ों में बर्फ़ पड़ती है न इसलिए. और वे तुम्हें सर्कस भी दिखाएंगे. असली शेर, जोकर और हाथी! ओह ... पेरिस में कितनी सारी अच्छी-अच्छी चीज़ें होती हैं - कठपुतलियों के नाच, बच्चागाड़ियां ... "

उसकी आंखें और होंठ खुले हुए थे; सुनते वक्त वह अपनी पलकों के कोरों पर कांप रहे आंसुओं को पोंछना भूल ही गया.

आने वाले दिनों में, महल के भीतर सब कुछ अस्तव्यस्त हो गया. हर दिशा से बहकी हुई मुर्गियों जैसे लोग महल में आने लगे थे. हेनरी के साथ खेलने के बजाय मम्मा अब 'ओल्ड टॉमस', मुख्य माली ऑगस्ट और अस्तबल के इंचार्ज सिमोन के साथ लम्बे लम्बे वार्तालापों में व्यस्त रहा करतीं. गलियारों में खुले हुए सन्दूक धरे रहते थे. घुड़सवारी के पाठ बन्द हो गए थे ....

फिर एक सप्ताह बाद, विदाई की उत्तेजना थी. "अलविदाएं", गालों पर थपकियां, रेलवे स्टेशन, युद्ध के लिए तत्पर होता जैसा भाप फेंकता इंजन. उसके बाद रेल के कम्पार्टमेन्ट के भीतर - अजीब सी सीटें, सामान रखने की जाली और ऊपर-नीचे होने वाली खिड़कियां.

तीन तीखी सीटियां, लोहे के पहियों की खड़खड़ और लोगों से भरा स्टेशन पीछे की तरफ़ छूटना शुरू हो गया.

जल्द ही एल्बी के ग्रामीण इलाके की झलक दिखने लगी: पेड़, नदियां, खपरैलों वाले फ़ार्महाउस - उस ने यह सब कभी नहीं देखा था.

"देखो मम्मा! देखो!"

शुरू में यह उत्तेजनापूर्ण था, फिर थकानभरा हुआ और आखिरकार उस से ऊब होने लगी.

उसे नींद आ गई.

उसे अगली बात यही पता चली कि गाड़ी पेरिस के उपनगरों से होती हुई रफ़्तार में भाग रही थी और उसका चेहरा खिड़की से सटा हुआ था.

"देखो मम्मा, बारिश हो रही है!"

सलेटी छत वाली ऊंची वर्गाकार बदसूरत इमारतें जिनकी खिड़कियों से सूखते कपड़े झूल रहे थे. फ़ैक्ट्रियों की धुंएदार चिमनियां. मकानों के बईच टूटी बाड़ों वाले बग़ीचों के टुकड़े जिनमें झाड़-झंखाड़ उग रहा था. बारिश में भीगते मुड़े-तुड़े लोहे के ढेर. कीचड़भरी गलियों में बरसातियों में लिपटे,सिर झुकाए, चींटियों जैसे स्त्री-पुरुष आ-जा रहे थे. आल्बी के नीले आसमान के बदले यहां था सलेटी बादलों का एक झुंड. इस कदर कुरूप, यह पेरिस ...

आखिरकार ट्रेन एक इत्मीनानभरी सांस के साथ थम गई. नीले ओवरऑल पहने कुछ मजबूत आदमी कम्पार्टमेन्ट में घुसे और उनका सामान इस तरह उठा कर बाहर निकले जैसे वे अपना सामान ले जा रहे हों. मम्मा ने दस्ताने पहने और अपना स्कार्फ़ ठीक किया.

प्लेटफ़ॉर्म पर प्रतीक्षारत चेहरों का हुजूम था.

और वहां भीड़ में सबसे ऊंचे, अपनी छंटी हुई दाढ़ी के साथ मुस्कराते , चमकदार काली हैट में बहुत सुदर्शन दिखते, बांह के नीचे सुनहरे मूठ वाली छड़ी दबाए, कोट पर सफ़ेद कार्नेशन का फूल लगाए खड़े थे - पापा!

सैल्फ़ पोर्ट्रेट


(फ़िलहाल के लिए इस किताब से इतना ही.)

हैनरी द तुलूस लौत्रेक का बचपन: पहला हिस्सा



24 नवम्बर 1864 को हैनरी द तुलूस लौत्रेक एक बेहद अमीर घर में जन्मे थे. बचपन से ही बीमार रहने वाले हैनरी के स्वास्थ्य के साथ एक के बाद एक त्रासद चीज़ें घटती गईं और इसका असर यह हुआ कि वे कुल साढ़े चार फ़ीट का कद पा सके.

एक सामान्य देह के साथ एक सामान्य शारीरिक जीवन न बिता पाने लायक रह चुके होने के लिए अभिशप्त हैनरी ने अपना सारा जीवन अपनी कला पर वार दिया. पेरिस के मोन्तमार्त्रे इलाके में अपने जीवन का आधे से ज़्यादा हिस्सा बिताते हुए उन्होंने उस इलाके में बहुतायत में पाए जाने वाले नाचघरों और वैश्यालयों की ज़िन्दगी के छुए-अनछुए पहलुओं पर अपनी कूची चलाई और एक से एक शानदार तस्वीरें बनाईं. वहां का एक मशहूर नृत्यघर 'मूलां रूज़' तो समूचे संसार में इसी महान कलाकार के नाम के साथ जुड़ चुका है.





आज हैनरी द तुलूस लौत्रेक के बग़ैर १८८० के दशक में उभरे उस क्रान्तिकारी इम्प्रैशनिस्ट आन्दोलन की कल्पना तक नहीं की जा सकती, जिसने आने वाले कई दशकों के लिए चित्रकला के संसार की परिभाषा ही बदल डाली थी. विन्सेन्ट वान गॉग, क्लाउद मॉने, मैने, पॉल गोगां, हैनरी रूसो और तमाम अन्य महान नामों की सूची हैनरी द तुलूस लौत्रेक के ज़िक्र के बग़ैर अधूरी है.



गलियों में लोग उसके कद और उसकी आकृति के कारण उसका मज़ाक उड़ाया करते थे - नतीज़तन १८९० के दशक के आते न आते वह भीषण अल्कोहोलिक बन गया. उसे एक सैनेटोरियम में भर्ती कराया गया और बाद में उसकी मां उसे अपने साथ ले गई, लेकिन कुछ हुआ नहीं.

९ सितम्बर १९०१ के दिन वह अपने घर में मर गया.

यानी आज हैनरी द तुलूस लौत्रेक की पुण्यतिथि है. आज से कुछ साल पहले नाचीज़ ने विन्सेन्ट वान गॉग के जीवन पर आधारित पुस्तक 'लस्ट फ़ॉर लाइफ़' का अनुवाद करते हुए यह तय किया था कि मौका मिलते ही कुछ अन्य कलाकारों के जीवनवृत्तों के अनुवाद अवश्य करूंगा. तो इस महान महबूब चित्रकार को नमन करते हुए उस श्रृंखला को जारी रखते हुए पियरे ला म्यूर की लिखी हैनरी द तुलूस लौत्रेक की जीवनी 'मूलां रूज़' के के पहले अध्याय के अनुवाद का पहला हिस्सा प्रस्तुत है. दूसरा कल.





मूलां रूज़ - अध्याय: एक

"प्लीज़ मम्मा, हिलो मत! मैं आपका पोर्ट्रेट बनाने जा रहा हूं."

"क्या, एक और! लेकिन हेनरी तुमने कल ही तो मेरा पोर्ट्रेट बनाया था." तुलूस-लौत्रेक की काउन्टेस, अदेले ने अपना कशीदाकारी का काम गोद में रखा और लॉन पर अपने सामने झुके बैठे नन्हे लड़के पर मुस्कराते हुए निगाह डाली. "कल से आज तक मुझमें कोई बदलाव तो नहीं आया ना, या आया है? मेरे पास वही नाक है, वही मुंह, वही ठोड़ी ..."

अदेले की निगाह काले बालों के छितराव, दिल के आकार वाले चेहरे के हिसाब से ज़्यादा बड़ी याचनारत भूरी आंखों, सिलवट पड़े हुए सेलर सूट और खुली स्केचबुक पर उत्सुकता के साथ ठहरी हुई टेढ़ी पेन्सिल पर एक साथ पड़ी. रिरी, मेरा सबसे प्यारा रिरी! उनके पास बस वही अपना था, लेकिन वह हर बाक़ी चीज़ की भरपाई के लिए पर्याप्त था - वे निराशाएं, पछतावे, अकेलापन.

"तुम डन का पोर्ट्रेट क्यों नहीं बनाते?" उन्होंने सुझाव दिया.

"मैं बना चुका हूं, दो बार." उसने मेज़ के नीचे ऊंघते गोर्डन सेटर की ओर निगाह डाली, जिसकी नाक इस वक़्त उसके पंजों के बीच में थी. "इसके अलावा वह अभी सोया हुआ है, और जब वह सो रहा होता है, उसके चेहरे पर कोई भाव ही नहीं होते. वैसे मैं तो आपकी तस्वीर ही बनाऊंगा. और आप ज़्यादा सुन्दर भी हैं."

इस भोली तारीफ़ को उन्होंने गम्भीरता के साथ स्वीकार किया.

"ठीक है, पर सिर्फ़ पांच मिनट. उस से एक मिनट भी ज़्यादा नहीं." एक गरिमामय भंगिमा के साथ उन्होंने अपना चौड़ा गार्डन हैट उतार दिया जिससे उनके मुलायम भूरे बाल नज़र आने लगे - बीच से बनाए गए बाल कानों के ऊपर पहुंचते-पहुंचते पंखों की तरह मुड़ जाते थे. "सवारी के लिए चलने का वक्त हो ही गया है. जोसेफ़ कभी भी आता होगा. आज हम कहां जाने वाले हैं?"

उसने कोई उत्तर नहीं दिया. उसकी पेन्सिल अभी से काग़ज़ पर दौड़ना शुरू कर चुकी थी.

सितम्बर १८७२ की इस चमकदार दोपहर को वे दोनों ही थे वहां - दुनिया से दूर, पुरानी ख़ामोश और दोस्ताना चीज़ों की संगत में और प्रसन्न. उनके चारों तरफ़ हरा लॉन था. आकाश में सूर्य चमक रहा था. घोंसलों के किनारों पर गपशप में मसरूफ़ पक्षी थे जो कभी कभार रोज़मर्रा के कामकाज के वास्ते ज़रा देर को फ़ुर्र हो जाया करते. पेड़ की पीली पत्तियों की सघनता के बीच से अपनी मीनारों और खिड़कियों के साथ एक मध्यकालीन किला उभरता सा उठता था.

एक क्षण पहले ही अपनी नीली पोशाक पहने मोटे और गम्भीर दिखते "ओल्ड टॉमस" ने अवसर के हिसाब से किसी रईस घर के खा़नसामे के नख़रों के साथ चाय की ट्रे हटाई थी. उसके पीछे मात्र अट्ठावन साल का जवान डोमिनिक भी था जिसे काम करते हुए बारह साल ही हुए थे. कुछ मिनटों के बाद आन्ट आर्मान्दीन ने, जो किसी की आन्ट नहीं बल्कि दूर की रिश्तेदार थीं और सात साल पहले एक हफ़्ता रहने भर को आई थीं, अपना अख़बार मोड़कर "कुछ चिट्ठियां लिखने" की बात कहकर उन दोनों से इजाज़त ली थी, जिसका मतलब होता था कि वे डिनर से पहले कुछ देर को सोएंगी.

आज रात जोसेफ़ नाम का गठीला कोचवान आकर मादाम काउन्टेस को बग्घी के पहुंचने की सूचना देगा. आज पुरखों की हंसती तस्वीरों और फ़ानूसों से सजे एक ज़रूरत से ज़्यादा बड़े डाइनिंग रूम में बुज़ुर्ग वेटरों द्वारा एक साधारण किन्तु औपचारिक डिनर परोसा जाएगा. मीठा खाने के बाद युवा काउन्ट विशाल सीढ़ीयां चढ़कर अपने शयनकक्ष में पहुंचेगा जहां उसकी मां उससे मिलेंगी. मां उसे ईसा मसीह के बारे में बताएंगी और यह भी कि वह कितना अच्छा लड़का है. वे उसे जोन ऑफ़ आर्क के बारे में बताएंगी और उस युद्ध के बारे में जिस में उस के पर-पर-पर-पर-पर दादा रेमण्ड चतुर्थ काउन्ट दे तुलूस लौत्रेक ने ईसाई योद्धाओं को येरूशलम तक पहुंचाया था जहां उन्होंने दुष्ट तुर्कों से पवित्र मकबरे को बचाया था. फिर एक चुम्बन, एक आखिरी दुलार. एक उनींदा "गुडनाइट मम्मा". फिर कम्बल में घुस जाना. एक आखिरी निगाह डाल कर मां अपने बगल वाले शयनकक्ष में चली जाएंगी.

खिड़कियों पर से रोशनियां एक एक कर बुझाई जाएंगी. और जैसा कि सदियों से होता आया था, रात अपना काला लबादा तुलूस के काउन्टों के किले के ऊपर डाल कर पसर जाएगी.

"आज हम कहां जाने वाले हैं?" उन्होंने फिर से पूछा. "पुराने खेतों की ओर या सेन्ट एन के चर्च में?"

उसने व्यस्तता में सिर हिलाया जिसका मतलब था उसे दोनों जगहों में कोई दिलचस्पी नहीं.

उनके चेहरे की गम्भीर उदासी में कोई चीज़ तिड़क कर रह गई. बेचारा रिरी, उसे इस बात का ज़रा भी भान नहीं था कि वह उनकी अन्तिम सवारी होने वाली है. उसने अभी यह नहीं सीखा था कि जीवन लगातार दोहराई जाती विदाओं के सिवा कुछ नहीं और यह कि आने वाला कल आज जैसा ही नही होता. अब ऐसा कभी नहीं होगा जब वह घोड़ों की लगामें सम्हालती अपनी मां से चिपट पाएगा, या गांव की सड़कों में सवारी के मज़े उठाता हुआ कुछ भी गाता रहेगा: न वह बग्घी के पीछे हाथ बांधे बैठे जोसेफ़ को चिढ़ा सकेगा, न ही अपनी चमकती निगाहों के यहां-वहां दौड़ाता अनगिनत सवाल पूछा करेगा. उनकी अन्तरंगता का पहला धागा ढीला पड़ने वाला था. धीरे धीरे बाक़ी धागे भी निकलना शुरू हो जाएंगे और आख़िरकार बाक़ी लड़कों की तरह वह भी चला जाएगा...

अदेले के होंठ एक आह से थर्राए.

"हिलो मत!" वह चहका "मैं मुंह बना रहा हूं और यही सबसे मुश्किल होता है ..."

अदेले की आंखों ने एक बार फिर से उस झुकी हुई नन्ही आकृति को देखा. बहुत ध्यान से काम करने के कारण उसका निचला होंठ अन्दर को चला गया था. पेन्टिंग का यह अजीब शौक़ उसे कहां से मिला है विरासत में? उनके लिए यह किसी पहेली की तरह था जबकि वे उसके सबसे अंतरंग विचारों को इतनी अच्छी तरह समझती थीं - उसे पड़ने वाले अड़ियलपन के दौरे, प्रेम और स्वीकृति के लिए उसकी चाह, उसके नन्हे दिल की वह भूख जिनके चलते वह लड़ाइयों के बीच में ही उनकी बांहों में धंस जाया करता था. उनका अचरज उअर भी ज़्यादा इस लिए था कि उअसके भीतर कला के लिए कोई विशेष रुझान नहीं था. ख़ैर समय के साथ यह भी गुज़र जाएगा जैसे समुद्री कप्तान बनने का उसका सबसे हालिया फ़ैसला ....

"क्या मैंने तुम्हें कभी उस समय के बारे में बताया था जब तुम मौश्ये आर्चबिशप के लिए एक बैल का स्केच बनाना चाहते थे?"

"वो मोटा आदमी जो हमारे यहां खाना खाने आता है?"

"खाना खाने नहीं हेनरी, 'डिनर पर' और -" अब उन्होंने उस कठोर स्वर में बोलना शुरू किया जिसकी अब उसे आदत पड़ चुकी थी "तुम ने मौश्ये को मोटा आदमी नहीं कहना चाहिए."

"लेकिन वो मोटा है. है ना?" उसने कुछ न समझने की मुद्रा में अपनी गोल आंखें ऊपर उठाईं, "वह करीब करीब टॉमस जितना मोटा तो है ही."

"हां. लेकिन वे ईश्वर के बन्दे हैं और महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं. इसीलिए हम उनकी अंगूठी को चूमते हैं और कहते हैं 'हां श्रीमान' या 'नहीं श्रीमान'"

"लेकिन..."

"ख़ैर" आगे बहस की संभावना को थामते हुए उन्होंने जल्दी से कहा "ये तुम्हारे भाई रिचर्ड के बपतिस्मे की बात है..."

"मेरा भाई? मुझे नहीं पता था कि मेरा कोई भाई भी है. कहां है वो?"

"वह स्वर्ग वापस चला गया. कुछ ही महीने रहा यहां"

"ओह...." उसकी निराशा असली थी, लेकिन बहुत संक्षिप्त. "तब उसका बपतिस्मा कराने की क्या ज़रूरत थी?"

"क्योंकि स्वर्ग में जाने के लिए हर किसी का बपतिस्मा कराना होता है."

"मेरा भी?"

"हां, और क्या!"

इस से उसकी उत्सुकता संतुष्ट हुई और वह दुबारा ड्रॉइंग में लग गया.

(जारी)

(पेन्टिंग्स के बारे में: क्रमशः १. रेने प्रिन्स्तौ द्वारा बनाया गया उन्नीस साल के हैनरी का पोर्ट्रेट २. हैनरी द तुलूस लौत्रेक की पेन्टिंग 'द किस' ३, ४ और ५. हैनरी द तुलूस लौत्रेक द्वारा बनाए गए मूलां रूज़ के असंख्य चित्रों में से चयनित)