Tuesday, December 18, 2007

निरभय निरगुन गुन रे गाऊँगा

मोहल्ले पर एकाध दिन पहले कुमार गन्धर्व जी का गाया सूरदास का भजन लगाया था। वरिष्ठ कवि (और कहानीकार ) उदय प्रकाश जी ने कबीर का यह भजन सुनने की इच्छा व्यक्त की थी। उन के साथ आप भी सुनें:

निरभय निरगुन गुन रे गाऊँगा ।
मूल कमल दृढ आसन बांधूं जी, उलटी पवन चढाऊंगा ॥
मन ममता को थिर कर लाऊं जी, पाँचों तत्व मिलाऊँगा ॥

इंगला, पिंगला, सुखमन नाड़ी जी, तिरवेनी पर हौं न्हाऊंगा ॥
पांच पचीसों पकड़ मंगाऊं जी, एक ही डोर लगाऊँगा ॥

शून्य शिखर पर अनहद बाजे जी, राग छत्तीस सुनाऊँगा ॥
कहत कबीरा सुनो भाई साधो जी, जीत निशान घुराऊँगा ॥

1 comment:

parul k said...

mantrmugdh kar diyaa...aabhaar ashok ji