Thursday, August 12, 2010

हजरत ख़्वाज़ा संग खेलिये धमार: बीरा आशिक़

इस महत्वपूर्ण पोस्ट का आलेख ख्यात कवि श्री असद ज़ैदी का लिखा हुआ है और उस्ताद की रचनाएं भी उन्होंने ही मुहैय्या करवाई हैं. उनका शुक्रिया.

बीरा आशिक़ (आशिक़ अली खाँ पेशावर वाले) एक भोले-भाले, सादा-दिल गायक थे. उन्होंने बहुत बुरा वक़्त गुज़ारा और कुछ साल पहले विक्षिप्तता, मुफ़लिसी और गुमनामी में मर गए. पाकिस्तान में भी बहुत कम लोग उनके नाम से वाक़िफ़ हैं. उनके बिखरे बाल, मैले कपड़े और बदहाल हुलिए को देखकर उन्हें संगीत की महफ़िलों में मंच पर नहीं आने दिया जाता था; और बीरा आशिक़ को गाने के अलावा कुछ आता ही न था. साथी कलाकारों से भी उन्हें उपेक्षा और बदतर व्यवहार ही मिला. लाहौर के एक चिकित्सक और मशहूर संगीतप्रेमी डॉ. अशफ़ाक़ अली खाँ ने उनकी बहुत सी रिकार्डिंग्स संजोकर रखी हैं, जिन्हें वे इन्टरनेट पर बड़ी फ़राख़दिली से दूसरे संगीतप्रेमियों को पेश करते रहते हैं.

बीरा आशिक़ की गाने में बड़े ग़ुलाम अली खाँ जैसा लोच और उस्ताद अमीर खाँ जैसा रूहानी अनुशासन झलकता है. ऐसे पुरअसर और उस्तादाना गायन को सुनते हुए अक्सर दिल भर आता है.

यहाँ नमूने के बतौर क्रमशः राग बहार, कामोद और यमन में ख़याल की बंदिशें पेश हैं.





2 comments:

माधव said...

wah

शायदा said...

kya kamal recordings hain ..kuchh download ka intezam hai kya? inhe sunwane k liye ashok jee aur asad jee dono ka shukriya.