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"जीवन अपने आप में स्वयं एक उद्धरण है" कहने वाले अर्जेन्टीनी कवि-निबन्धकार-चिन्तक होर्हे लुईस बोर्हेस (२४ अगस्त १८९९ – १४ जून १९८६) अपने सम्मोहक जुमलों के लिए ख़ासे विख्यात हैं.
अफ़सोस उनकी लिखी मेरी एक प्रिय किताब "डॉक्टर ब्रॉडी’ज़ क्लीनिक" इधर दो एक महीना भर पहले कोई मेरे घर से पार कर ले गया, वरना आपको "याहू" से मिलवाता.
उनके दो-तीन उद्धरण पेश हैं:
१. "लोकतन्त्र माने आंकड़ों का दुरुपयोग."
२. "मैंने हमेशा कल्पना की है कि स्वर्ग एक तरह का पुस्तकालय होना चाहिये."
३. "आम तौर पर हर मुल्क़ के पास वही भाषा होती है जिसका वह हक़दार होता है."
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