Tuesday, November 8, 2011

पथ रोके खड़ा कठिन पत्थर

आज बचपन की स्कूली किताबों में बार - बार पढ़ी गई यह कविता यहाँ एक बार। तब इस तरह की कवितायें अपन कंठस्थ करते थे और शनिवारीय बाल सभा में सुनाते भी थे। अब यह  पूरी तरह कंठस्थ तो नहीं है लेकिन मन- मस्तिष्क में कहीं न कहीं मौजूद है। पिछले सप्ताह की मसूरी यात्रा में कम्प्टी फाल पर तस्वीरें उतारते हुए यह बरबस याद आई। आइए  इसे पढ़ते - देखते हैं :


गोपाल सिंह नेपाली की कविता
सरिता  

यह लघु सरिता का बहता जल।
कितना शीतल, कितना निर्मल॥

हिमगिरि के हिम से निकल-निकल,
यह विमल दूध-सा हिम का जल,
कर-कर निनाद कल-कल, छल-छल
बहता आता नीचे पल पल

तन का चंचल मन का विह्वल।
यह लघु सरिता का बहता जल।।

निर्मल जल की यह तेज़ धार
करके कितनी श्रृंखला पार
बहती रहती है लगातार
गिरती उठती है बार-बार

रखता है तन में उतना बल
यह लघु सरिता का बहता जल।।

एकांत प्रांत निर्जन निर्जन
यह वसुधा के हिमगिरि का वन
रहता मंजुल मुखरित क्षण-क्षण
लगता जैसे नंदन कानन

करता है जंगल में मंगल
यह लघु सरिता का बहता जल।।

ऊँचे शिखरों से उतर-उतर,
गिर-गिर गिरि की चट्टानों पर,
कंकड़-कंकड़ पैदल चलकर,
दिन-भर, रजनी-भर, जीवन-भर,

धोता वसुधा का अंतस्तल।
यह लघु सरिता का बहता जल।।

मिलता है उसको जब पथ पर
पथ रोके खड़ा कठिन पत्थर
आकुल आतुर दुख से कातर
सिर पटक पटक कर रो-रो कर

करता है कितना कोलाहल
यह लघु सरिता का बहता जल।।

हिम के पत्थर वे पिघल-पिघल,
बन गए धरा का वारि विमल,
सुख पाता जिससे पथिक विकल,
पी-पीकर अंजलि भर मृदु जल,

नित जल कर भी कितना शीतल।
यह लघु सरिता का बहता जल।।

कितना कोमल, कितना वत्सल,
रे! जननी का वह अंतस्तल,
जिसका यह शीतल करुणा जल,
बहता रहता युग-युग अविरल,

गंगा, यमुना, सरयू निर्मल
यह लघु सरिता का बहता जल।।

3 comments:

नीरज गोस्वामी said...

हमने भी अपने स्कूल काल में इस कविता है रट्टा लगाया था...अद्भुत कविता है...प्रस्तुति का शुक्रिया

नीरज

प्रवीण पाण्डेय said...

विद्यालय के दिन याद आ गया।

डॉ0 मानवी मौर्य said...

प्राइमरी कक्षा में यह कविता पढ़ चुकी हूँ। लेकिन गोपाल सिंह नेपाली जी के बारे में अधिक जानने की उत्‍सुकता तब हुई जब फिल्‍म 'स्‍लमडॉग मिलियनेयर' में एक गीत को सूरदास द्वारा रचित बताये जाने पर नेपाली के परिवारजनों ने मुकदमा किया था कि यह गीत गोपाल सिंह नेपाली जी का है। यह गीत था, 'दर्शन दो घनश्‍यामनाथ मोरी अंखियां प्‍यासी रे' और फिल्‍म 'नरसी मेहता' के लिए नेपाली जी ने इसे लिखा था। यह गीत हेमन्‍त कुमार द्वारा गाया गया था। फिल्‍म 'स्‍लमडॉग मिलियनेयर' में जब फिल्‍म के हीरो से अनिल कपूर सवाल पूछते हैं कि यह गाना किसका है तो वह 'सूरदास' जवाब देता है और फिल्‍म में उसका जवाब सही बताया जाता है।