Friday, January 4, 2013

तो बदला क्या?



मनीषा पाण्डेय की फेसबुक वॉल से एक और नगीना –

मेरे घर में पिछली पीढ़ी में (मां-मौसी-चाची-मामी-बुआ) ९९ % स्त्रियां हाउसवाइफ थीं. अगली जनरेशन में ९९ लड़कियां वर्किंग हैं. उन्‍हें एजूकेशन मिली और घर से निकलकर नौकरी करने का मौका भी. लेकिन इन दो पीढि़यों की जिंदगी में आखिर बदला क्‍या?

१. मेरी हाउसवाइफ मौसी सुबह सबसे पहले उठती थीं. मेरी नौकरीपेशा बहन सुबह सबसे पहले उठती है.
 
२. मेरी हाउसवाइफ मौसी उठते ही सबसे पहले किचन में घुसती थीं. मेरी नौकरीपेशा बहन उठते ही सबसे पहले किचन में घुसती है.

३. मेरी हाउसवाइफ मौसी चाय-नाश्‍ता बनाकर पति के हाथ में पकड़ाती थीं, मेरी नौकरीपेशा बहन चाय-नाश्‍ता बनाकर पति के हाथ में पकड़ाती है.

४. मेरी हाउसवाइफ मौसी सुबह बच्‍चों को स्‍कूल के लिए तैयार करतीं, उनका टिफिन बनाती थीं. मेरी नौकरीपेशा बहन सुबह बच्‍चों को स्‍कूल के लिए तैयार करती है, उनका टिफिन बनाती है.

५. मेरी हाउसवाइफ मौसी के पति ने जिंदगी में कभी अपनी अंडरवियर भी अपने हाथ से नहीं धोयी. मेरी नौकरीपेशा बहन के पति ने भी जिंदगी में कभी अपनी अंडरवियर भी अपने हाथ से नहीं धोयी.

७. मेरी हाउसवाइफ मौसी अकेले घर के सारे काम करतीं, बच्‍चों को पालतीं, उनका होमवर्क करातीं. मेरी नौकरीपेशा बहन अकेले घर के सारे काम करती है, बच्‍चों को पालती है, उनका होमवर्क कराती है.

८. मेरी हाउसवाइफ मौसी के बच्‍चे जब क्‍लास में फर्स्‍ट आते, तो टीचर पूछते, "बेटा, तुम्‍हारे पापा का क्‍या नाम है?" मेरी नौकरीपेशा बहन के बच्‍चे जब क्‍लास में फर्स्‍ट आते हैं, तो टीचर पूछते हैं, "बेटा, तुम्‍हारे पापा का क्‍या नाम है?"

९. मेरी हाउसवाइफ मौसी के पति को जब कभी गुस्‍सा आया तो उन्‍होंने मौसी को डांट दिया, उनसे चिल्‍लाकर बात की, कभी हाथ भी उठा दिया. मेरी नौकरीपेशा बहन के पति को जब गुस्‍सा आता है तो वो उन्‍हें डांट देते हैं, कभी हाथ भी उठा देते हैं.

९. मेरे नानाजी ने मौसी को दिया ससुराल और बेटे को सारी प्रॉपर्टी. मेरे मौसाजी ने भी मेरी बहन को दिया ससुराल और बेटे को सारी प्रॉपर्टी.

१०. मेरी मौसी की शादी का फैसला नानाजी ने 16 साल की उम्र में लिया. मेरी बहन की शादी का फैसला मौसाजी ने 23 साल की उम्र में लिया.

११ मेरी मौसी ने अपनी मर्जी से सिर्फ बाजार जाने, अचार बनाने और रिश्‍तेदारों के घर शादी-ब्‍याह और मुंडन में जाने का फैसला लिया. मेरी बहन इन जगहों के अलावा एक जगह और जाती है - ऑफिस.

१२. मेरी मौसी घर के सारे काम निपटाकर दिन में थोड़ी देर सो जाती थीं, मेरी बहन दिन में ऑफिस का काम करती है.

१३. मेरी मौसी ने कभी अपने पैसे कमाने का रोब नहीं दिखाया. वो पैसे कमाती ही नहीं थी. बहन ने कभी बोल दिया कि "पैसे तो मैं भी कमाती हूं" तो डांट खाई.

१४. मेरी मौसी घर में काम करती थीं और मौसाजी बाहर. मेरी बहन दोहरे बोझ में दबी है. वो घर में भी काम करती है और बाहर भी.

१५. मेरी मौसी अपनी जिंदगी से खुश थीं. बराबरी का कोई आइडिया उनके दिमाग में नहीं था. मेरी बहन कभी कभी दुखी होती है क्‍योंकि एक बराबरी का आइडिया उसके दिमाग में आ गया है.

1 comment:

devyani said...

बराबरी का यह आइडिया अभी बच्चा है और कुपोषण का शिकार है ... इसकी सेहत बने, यह आइडिया और बुलन्द बने इसके लिये अभी बहुत सारी बहनो को इसी दोहरी नियति को जीना है ... लेकिन यह सूरत बदलेगी ज़रूर और जल्दी ही बदलेगी ... आखिर इतिहास के पन्नो पर कुछ पीढिया महज़ कुछ पन्नो मे सिमट ही तो जाती है ...