Friday, March 22, 2013

भगवान का नाम उसने तभी लिया जब जूते ने काटा उसके पैर को



तीन समाधि-लेख


एक

उसे दुनिया में इतनी यातना किसी चीज़ से नहीं हुई
जितनी अपने मस्सों से;
खुद को इस कदर बदसूरत निर्मित किये गए होने को लेकर भी
उसने किसी के बारे में बुरा नहीं सोचा.
भगवान का नाम
उसने तभी लिया जब जूते ने काटा उसके पैर को,
उसे पापी भी नहीं माना जा सकता.
कितने अफ़सोस की बात है मरना पड़ा सुलैमान एफेंदी को.

दो

“टू बी ऑर नॉट टू बी”
नहीं था उसके लिए कोई मसला;
वह एक रात सोने गया
और बस उठा ही नहीं अगली सुबह.
लोग आए और उसे उठा ले गए;
उसे नहलाया गया, उसके लिए दुआएं माँगी गईं और दफना दिया गया.
जब उसके ऋण दाता सुनेंगे उसकी मौत की खबर,
वे यकीनन उसे मुक्त कर देंगे उसके ऋणों से.
जहां तक उसके देनदारों की बात है,
फिलहाल, उस बेचारे से चवन्नी भी उधार नहीं ली थी किसी ने.

तीन

उन्होंने उसकी रायफल को वापस रख दिया मालखाने में
और उसकी वर्दी दे दी किसी और को.
अब उसके थैले में डबलरोटी का चूरा नहीं
न होंठों के निशान उसके तामलेट पर.
ऐसा रेला हवा का आया
उखड़ गए उसके पाँव
नाम तक याद नहीं रहा किसी को उस का.
मेस की दीवार पर लिखा था :
“मृत्यु होती है ईश्वर की इच्छा
न हो कोई बिछ्ड़ाव बशर्ते.”

3 comments:

तुषार राज रस्तोगी said...

बहुत बढ़िया |

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

vandana gupta said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (23-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

प्रतिभा सक्सेना said...

इस सारे सच के आगे कोई क्या कहे ?