Thursday, June 6, 2013

अफ्रीकी लोक-कथाएँ : ३


अफ्रीकी लोक-कथाएँ : ३


सुन्दर जेब्रा और मगरमच्छ

बहुत समय पहले, ओकावाम्बो नदी में एक मगरमच्छ रहता था. वह अब भी वहीं रहता हा. एक दिन सुन्दर जेब्रों का एक झुण्ड मगरमच्छ के घर के नज़दीक पानी पीने आया. जब मगरमच्छ ने जेब्रों की सजावट भरी खाल देखी, वह अधिक गौर से इन सुन्दर जानवरों के देखने की नीयत से तैरता हुआ उनके नज़दीक आ गया.

उनमें से एक को देख कर मगरमच्छ बोला: “मोहतरिमा आप बहुत खूबसूरत हैं. आपका घर कहाँ है?"

“यहाँ से दूर. वहां झाडियों में.” उसने जवाब दिया.

“क्या मैं आप के साथ आ सकता हूँ? आप इतनी प्यारी हैं. मैं आप से शादी करना चाहता हूँ.” मगरमच्छ ने पूछा.

जेब्रा को मगरमच्छ से बहुत डर लगा और उसने जवाब दिया: “ओह! आपकी पसंद बहुत अच्छी है. लेकिन आप पानी में रहने वाले जानवर हैं. आप ज़मीन पर चल कर मेरे परिवार से मिलने कैसे आ सकेंगे?”

मगरमच्छ ने उस से कहा कि वः इस कदर खूबसूरत है कि वह हर कीमत पर उसके साथ चलने को तैयार है. चाहे कुछ भी हो जाए. सो दोनों नदी किनारे से होते हुए झाड़ी के भीतर की तरफ़ चल दिए. थका देने वाले कई घिसटते हुए क़दमों के बाद मगरमच्छ को भूख और प्यास लग गयी. उसे इस तरह सूखी धरती पर चलने को कोई तज़ुर्बा न था.

सुन्दर ज़ेब्रे ने मगरमच्छ को पीछे छोड़ा और सरपट दौड़ लगा दी. मगरमच्छ उसके पीछे नहीं जा सकता था.
इसी दौरान, हमेशा की तरह एक भूखा लकड़बग्घा झाडियों के बीच भोजन की तलाश में निकला हुआ था. वह मगरमच्छ तक पहुंचा जिसने सूरज की गर्मी से बचने के लिए अपने आप को रेत से ढँक लिया था.

“क्या तुम जिंदा हो या मरे हुए?” बेवकूफ लकड़बग्घे ने सवाल किया.

मगरमच्छ ने मरा होने का नाटक किया. उसे उम्मीद थी कि लकड़बग्घा उसे पानी के नज़दीक लेकर जाएगा क्योंकि लकड़बग्घे अपने शिकार को खाने से पहले पानी में भिगाना पसंद करते हैं. लकड़बग्घों को सूखे मांस से नफरत होती है. वे उसे निगल नहीं पाते और वह उनके गले में फंस जाया करता है.

लकड़बग्घे ने मगरमच्छ की पूंछ थामी और और उसे घसीटता हुआ पानी तक ले गया. इस समय तक मगरमच्छ को सुन्दर जेब्रा और मूर्ख लकड़बग्घे दोनों के व्यवहार पर भयानक गुस्सा आ चुका था. इसके अलावा वह भूखा और प्यासा भी था. अपना मुंह फाड़ कर उसने लकड़बग्घे को पानी में खींचा और उसे खा लिया.

जल्द ही यह खबर दूर दूर तक फ़ैल गयी. उस दिन के बाद से जानवरों ने मगरमच्छ से दूर रहना शुरू कर दिया. इसी लिए वह बिना किसी से बातें करे पानी के नीचे शांत लेटा रहता है और बस इस फिराक में रहता कि कोई जानवर नज़दीक आए तो उसे अपना भोजन बना ले.

यह कहानी आप को दो बातें बताती है : कभी भी किसी सुन्दर स्त्री के पीछे वहां कभी न जाएँ जो आपका इलाका हो नहीं सकता. दूसरे ओकावाम्बो नदी में मगरमच्छ हर जगह होते हैं. आप उन्हें नहीं देख सकते पर वे आपको देख सकते हैं. ओकावाम्बो नदी में कई लोग मगरमच्छों का शिकार बन चुके हैं.      

2 comments:

स्वप्निल तिवारी 'आतिश' said...

teeno kahaniyaa padheen... bahut bahut shukriya...

प्रवीण पाण्डेय said...

सारगर्भित कहानियाँ।