Monday, September 2, 2013

कल्पना कविता की फ्लर्ट है


यह मशहूर पोलिश कवयित्री अन्ना कामीएन्स्का की एक नोटबुक का हिस्सा है. एक पूरी नोटबुक - खामोशी का एक घोंसला - 'पहल' के ताज़ा अंक में प्रकाशित हुई हुई है.

कविता में सादगी खुद विनम्रता होती है. हम जानते हैं कि हम जो कहना चाहते हैं हमसे ज़्यादा होता है, हो सकता है वह अभिव्यक्ति से भी परे हो. हम केवल साधारण संकेत कर सकते हैं, निर्धन हकलाते वाक्य बना सकते हैं. यहाँ तक कि प्रश्न भी शब्दों के महान आडम्बर की तरफ झुकने लगते हैं.

कविता कोई “कल्पना का कारनामा” नहीं होती. अभिमान की मदद से पाप करती है कल्पना; और उसे रिश्वत दी जा सकती है. वह नखरालू और अपने आप को लेकर निश्चित होती है. वह सृष्टि की तरफ इशारा करती है, मगर सिर्फ उतना ही – बस एक इशारा, एक  कब्ज़ा. कल्पना कविता की फ्लर्ट है.    

(फ़ोटो- अन्ना सबसे दाएं) 

1 comment:

अनुपमा पाठक said...

हम केवल साधारण संकेत कर सकते हैं, निर्धन हकलाते वाक्य बना सकते हैं.
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So well put!
Thanks for this post.