Monday, December 4, 2017

रोटी से चिंगारियां फूट रही थीं

रोटी
- इब्बार रब्बी

केन्द्र में रोटी रखी थी
सूर्य कुत्ते की तरह
          चांद पर झपट रहा था

चांद मुर्गे की तरह कुड़-कुड़ करता
बादलों की झाड़ियों में
          छिप रहा था

रोटी से चिंगारियां फूट रही थीं
ग्रह-उपग्रह
आगे-पीछे दौड़ रहे थे

लाल बत्ती
का उल्लंघन कर रहे थे

एक वृहदाकार रोटी
आकाश की तरह
अन्तरिक्ष में छाती जा रही थी

[1976]

1 comment:

सुशील कुमार जोशी said...

वाह क्या बात है।