Monday, August 6, 2018

एक तस्वीर की कहानी


इस फोटू के साथ दो या तीन कहानियां वाबस्ता हैं. मशहूर चित्रकार बी. मोहन नेगी ने करीब बाईस-तेईस साल पहले नैनीताल में इसे खींचा था जो एक कार्यक्रम के सिलसिले में अपनी चित्र प्रदर्शनी लेकर आये थे..

फोटू में वीरेनदा ने जो सफ़ेद स्वेटर पहना हुआ है वह मैंने बड़ी हसरत से उसी सुबह अपने लिए खरीदा था. वह बरेली से मिलिट्री ग्रीन कलर की एक पुरानी सड़ियल जैकेट पहन कर आया था जिसके भीतर की लुगदी जैसी लाइनिंग उधड़ कर बाहर आ गई थी.

मुझसे मिलते ही उसने इमोशनल ब्लैकमेल किया, जैसा वह हमेशा करता था और वह नया स्वेटर उतरवा लिया. मैं नक़्शेबाज़ लौंडा था सो मैंने बदले में उस जैकेट को पहनने से सफा इनकार करते हुए कहा कि वह मुझे कुछ नया खरीद कर दिलाए.

उसने हूँ-हाँ जैसा कुछ करना शुरू किया ही था कि सामने से गिर्दा आता दिखाई दिया. गिर्दा ताज़ा-ताज़ा भोपाल से लौटा था और वहां से लाई कत्थई रंग की नई वास्कट पहने हुए था. अब वीरेनदा ने गिर्दा को ब्लैकमेल किया और मिनट से पहले उसकी वास्कट उतरवा कर मुझे पहना दी. मैंने वही पहनी हुई है.

फोटू में गिर्दा नज़र नहीं आ रहा क्योंकि पूरी दोपहर वह दूर खड़ा, बीड़ी फूंकता, उस लद्धड़ हरी जैकेट को थामे हम दोनों को गाली देता रहा. शाम को ओल्ड मंक की संगत में उसका गुस्सा शांत हुआ. तब भी उसने वीरेनदा से वायदा लिया कि अगली सुबह उसे नई वास्कट के लिए साढ़े चार सौ रूपये देगा!

ज़ाहिर है वह हिसाब कभी पूरा नहीं हुआ.


"किताबें और कपड़े दोस्तों के बीच यात्रा करने के लिए बने होते हैं!" - वीरेनदा कहता था.

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