आज तेईस अप्रैल है. पेशावर कांड को बहत्तर साल होने आए. पेशावर के किस्सा खानी बाज़ार में चन्द्र सिंह गढवाली नाम के एक सिपाही ने बलूचिस्तान के अहिंसक आन्दोलनकारियों पर गोली चलाने के अपने अँगरेज़ अफसर के आदेश को मानने से इनकार कर दिया था. इस अपराध के एवज में उन्हें जेल में कई साल काटने पड़े और तमाम प्रताड़नाएं भुगतनी पड़ीं.
खैर! इस घटना से जुडी तमाम बातें आपको इन्टरनेट पर आसानी से मिल जाएँगी. यहाँ एक बात बताना चाहूँगा. जब गांधी से इस घटना की बाबत पूछा गया तो उन्होंने गढ़वाली के इस कदम की सराहना करने के बजाय कहा था की सेना के अनुशासन को तोडना अच्छी बात नहीं होती.
चन्द्र सिंह गढवाली अमर रहें!
