ओसियां कस्बे में ख़ास मारवाड़ी सूखे साग की हर चप्पे पर दुकानें है जो 'देस' से बाहर बसे मारवाड़ियों को तेज़ धूप में सुखाई गयी देसी सब्जियों का स्वाद बेचने के लिए खुली रहती है. सांगरी, कैर, कूमटा, काचरा जैसी सूखी सब्जियां कई महीनों तक खराब नहीं होती. ये अलग बात है कि आज मारवाड़ के शहरों में भी ये रोज़मर्रा की बात न होकर कौतुहल के बायस बरती जाने वाली वस्तुएँ हो गयी हैं. खैर.
कई पुराने मंदिरों की जर्जर देह धारे ये गाँव एक आम श्रद्धालु के लिए आज सच्चियाय माता मंदिर और जैन मंदिर के लिए ज़्यादा जाना जाता है. इन दिनों कुछ सैलानी यहाँ के रेतीले टीले और उस पर ऊँट सवारी के आनंद के लिए भी आते हैं.
तो देखें, ओसियां के चित्रों की एक झांकी. मेरी ख़ास कोशिश इनके ज़रिये आपको ये दिखाने की है कि किस तरह पुराने मंदिरों में, जीर्णोद्धार के बहाने,पुराने और नए वक्त के टुकड़ों को जोड़ने की बेढंगी कोशिश की जाती है.