Showing posts with label लोकसंगीत. Show all posts
Showing posts with label लोकसंगीत. Show all posts

Saturday, December 20, 2014

पेड़ गा सकते तो यूं गाते - मेघालय से जादू


बाह केरियोस वाह्लांग से रू-ब-रू होइये. मेघालय के उस्ताद लोकगायक. अपने मन्द्र मेघस्वर में बाह केरियोस वाह्लांग मौफलांग के पवित्र वन को वाणी दे रहे हैं इस गीत में. पेड़ अगर गा सकते तो यूं गाते. एक्सक्लूसिव कबाड़



संगीत वह जो प्यारा है मुझे
संगीत वह जो प्यारा है मुझे

संगीत जो मुझे भर देता है गहन विचारों से
वह पुकारता है मुझे, राह दिखाता है मुझे

समय जितना पुराना है यह
और रहेगा यह चार मौसमों तक
उठता है धरती की गहराइयों से
बहता आता है दुईतारा* के दिल से (*एक पारम्परिक गिटार)
आप सुन सकते हैं कुदरत में इसकी गूँज

उसे दुईतारा से उड़ान भरते हुए महसूस करो
वह रिस आता है नसों में
चला जाता है आत्मा में

हौले से
बहुत मुलायमियत से पसारेगा अपने पंख
और थम जाएगा
पानी, धरती और हवा पर

रेशम के बने
इन चार सादे तारों से
वह बजता है मेरे सिर के भीतर

गाता है मेरे दिल में
हौस जगाता मुझमें
जैसे पानी का बहना
एक अनंत चक्र
अहर्निश
चलता जाता अपने आप

संगीत वह जो प्यारा है मुझे
संगीत वह जो प्यारा है मुझे

------------------------------

नोट: खासी भाषा से इस गीत का अंग्रेज़ी तर्जुमा किन्तियू बुरोम वार ने किया है. वही इस हिन्दी अनुवाद का स्रोत है. फिल्म बनाई है नितिन दास ने.


(पूनम गिरधानी का शुक्रिया, जिनकी फेसबुक वॉल पर मुझे यह शानदार लिंक मिला.)

Wednesday, July 6, 2011

एकादशी बाजारैमा - खेमराज गुरुंग


कुछ बरस पहले नेपाल में "वारी जमुना" नाम से एक गाने के विकट लोकप्रियता हासिल की थी. मेरे मित्र अतुल सिंह गर्ब्याल ने मुझे इस गीत और इसके गायक खेमराज गुरुंग से परिचित कराया था. आप भी लुत्फ़ उठाइये -


Tuesday, April 27, 2010

ओ जन्नत के बिछावनहार

यह पीली टैक्सी नाम का एक गाना है जिसे बॉब डिलान समेत तमाम कलाकारों ने अलग-अलग काल में गाया है। इसमें समकालीन भारतीय विकास का अक्स झिलमिलाता है इसलिए यहां आपकी नजर पेश किया जा रहा है।

उनने बिछाई जन्नत और एक पार्किंग की आबाद
एक गुलाबी होटल, एक बुटिक- झूमते नाइट क्लब के साथ
हमेशा ऐसे नहीं होता रहेगा यही
नहीं जानते क्या?
जो था, उसे जान पाते हैं आप खो जाने के बाद
बिछाई उनने जन्नत और एक पार्किंग की आबाद।

ले गए वे पेड़ सारे, पेड़ वाले अजायबघर
वसूलने लगे फी आदमी डेढ़ डालर
बस, उन्हें ताकने के लिए
लगता नही कि चल पाएगा ऐसा सदा क्योंकि
जो था, उसे जान पाते हैं हम खो जाने के बाद
उनने बिछाई जन्नत और एक पार्किंग की आबाद।

ऐ विकास, मुनाफेलाल अब हटाओ अपना डीडीटी
भले रहें मेरे अमरूदों पर दाग लेकिन
कृपा करो, छोड़ दो मेरी चिड़ियां और मधुमक्खियां
नहीं चलेगा ऐसा हमेशा क्योंकि
गोया कि तुम नहीं जानते?
क्या था, उसे जान पाते हैं हम खो जाने के बाद
उनने बिछाई जन्नत और एक पार्किंग की आबाद।

सुना मैने दरवाजे का ढहना कल रात
एक बड़ी पीली टैक्सी उठा ले गई बाबूजी को
ऐसे ही नहीं चलेगा यह हमेशा क्योंकि
तुम इतना भी नहीं जानते क्या?
जो था, उसे जाना मैने कल खोने के बाद
उन्होंने बिछाई जन्नत और एक पार्किंग की आबाद।

बताओ लाला गांधीगीरी या इन्किलास जिन्नाबाद
क्या करूं आज की रात।
(शब्द हमारे जोर भी हमारा)