कबाड़खाना मैंने शुरू किया था. अब मैं इस से लौटने का मन बना चुका हूं. पिछले करीब ३ माह से यहां बीस-पच्चीस साथी आ जुड़े और हम सबने सामर्थ्य भर काम किया.
यह न कोई मिशन था न कोई उदात्त कर्म. बस एक नए माध्यम से ज़्यादा लोगों तक पहुंच पाने का मोह (या लालच) था.
२४ तारीख को मोहम्मद रफ़ी साहब का जन्मदिन था. मैंने एक पोस्ट लगाई थी उस आनन्द के प्रति रफ़ी साहब का आभार व्यक्त करते हुए जो उनकी आवाज़ ने कम से कम मुझे तो इतने सालों से लगातार दिया है.
एक कोई बेनाम सज्जन को एक ऐसे शब्द से आपत्ति है जिसका इस्तेमाल पोस्ट की टाइटिल में हुआ है.
माफ़ करेंगे. थोड़ा संवेदनशील हूं. डरपोक नहीं हूं.
बहुत भूमिकाएं नहीं बांधूंगा.
मैं ३१ दिसम्बर से कबाड़ख़ाने से अपना नाम वापस ले रहा हूं. मेरे अलावा इस ब्लाग पर इन तमाम सज्जनों ने अपना नाम बतौर कबाड़ी देने की इजाज़त दी थी: राजेश जोशी (बीबीसी लन्दन में कार्यरत), शिरीष मौर्य (कवि, अनुवादक, अध्यापक), शैलेन्द्र जोशी (कवि, अनुवादक), अविनाश (मीडिया से सम्बद्ध, मोहल्ला नामक ब्लाग चलाते हैं), अजित वडनेरकर (मीडिया से सम्बद्ध, शब्दों का सफ़र नामक ब्लाग चलाते हैं), दिनेश पालीवाल (कम्प्यूटर एक्सपर्ट), दीपा पाठक (मीडिया से सम्बद्ध, हिसालू काफ़ल नामक ब्लाग चलाती हैं), आशुतोष ('हिन्दुस्तान' में कार्यरत, बुग्याल नामक ब्लाग चलाते हैं, मेरे पहले गुरुओं में), सुन्दर ठाकुर (कवि, 'नवभारत टाइम्स' से संबद्ध), इरफ़ान (रेडियो और संगीत और कविता और तमाम इलाकों के जानकार, अभिन्न मित्र, मुख्यत: 'टूटी हुई, बिखरी हुई' और 'सस्ता शेर' नामक ब्लाग चलाते हैं), वीरेन डंगवाल (साहित्य अकादेमी पुरुस्कार से सम्मानित हिन्दी और देश के सबसे बेहतरीन कवियों में एक, महान मित्र और मेरे अपने बरगद), चन्द्रभूषण (मीडिया से सम्बद्ध, पहलू नामक ब्लाग चलाते हैं), विनीता यशस्वी (नैनीताल में मीडिया से सम्बद्ध), भूपेन (मीडिया से सम्बद्ध, काफ़ीहाउस नामक ब्लाग चलाते हैं), काकेश (काकेश की कतरनें नामक ब्लाग चलाते हैं), आशीष (मुक्तेश्वर के पास एक रेसोर्ट चलाते हैं), सिद्धेश्वर (हिन्दी पढ़ाते हैं, मेरे पहले गुरुओं में), रोहित उमराव (फ़ोटोपत्रकार), दिलीप मंडल (मीडिया से सम्बद्ध, ब्लागिंग में जाना माना प्रतिबद्ध नाम), कथाकार (सूरज प्रकाश, कथाकार नामक ब्लाग चलाते हैं, आजकल एक भीषण दुर्घटना का शिकार होने के बाद स्वास्थ्यलाभ कर रहे हैं) और अरुण रौतेला (नैनीताल में वकालत करते हैं).
यह पोस्ट इन सभी सज्जनों को सविनय सूचना है कि मैं आप सब को कबाड़ख़ाने का एडमिनिस्ट्रेटर बना रहा हूं. मेरी यह अंतिम पोस्ट है. ३१ दिसम्बर से मैं अपना नाम कबाड़ख़ाने से हटा लूंगा.
यदि इन सज्जनों को कबाड़खाना चलाने में कोई दिलचस्पी न हो तो उसी दिन से यह ब्लाग हटा लेने पर सभी को सहमत समझ लिया जाएगा.
सभी पाठकों का धन्यवाद.
*'सुख़नसाज़' ३१ दिसम्बर से हटा लिया जाएगा. और 'मेरा रामनगर भी.