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Sunday, December 4, 2011

चले गए देव आनंद





नमन

Saturday, November 5, 2011

भूपेन दा को नमन !




भूपेन दा !
डा० भूपेन हजारिका नहीं रहे।
आवाज ही पहचान है
अमिट - अमर रहेगी यह पहचान...नमन!


ब्लूहिल ट्रेवेल्स के बस अड्डे की खिड़की पर लगी डा० भूपेन हजारिका की बड़ी -सी मुस्कुराती तस्वीर.. मन में गूँजने लगता है - हइया नां , हइया नां... बुकु होम -होम करे. इस इंसान की आवाज जितनी सुंदर है उससे कई गुना सुंदर इसकी मुसकान है - कुछ विशिष्ट , कु्छ बंकिम मानो कह रही हो कि मुझे सब पता है, रहस्य के हर रेशे को उधेड़कर दोबारा -तिबारा बुन सकता हूं मैं...

( 'कर्मनाशा' पर १३ नवंबर २००८ की एक पोस्ट का अंश )