Saturday, November 5, 2011

भूपेन दा को नमन !




भूपेन दा !
डा० भूपेन हजारिका नहीं रहे।
आवाज ही पहचान है
अमिट - अमर रहेगी यह पहचान...नमन!


ब्लूहिल ट्रेवेल्स के बस अड्डे की खिड़की पर लगी डा० भूपेन हजारिका की बड़ी -सी मुस्कुराती तस्वीर.. मन में गूँजने लगता है - हइया नां , हइया नां... बुकु होम -होम करे. इस इंसान की आवाज जितनी सुंदर है उससे कई गुना सुंदर इसकी मुसकान है - कुछ विशिष्ट , कु्छ बंकिम मानो कह रही हो कि मुझे सब पता है, रहस्य के हर रेशे को उधेड़कर दोबारा -तिबारा बुन सकता हूं मैं...

( 'कर्मनाशा' पर १३ नवंबर २००८ की एक पोस्ट का अंश )

7 comments:

Pratibha Katiyar said...

अमिट - अमर रहेगी यह पहचान...नमन!

प्रवीण पाण्डेय said...

दुखद, गंगा से सभ्यता के बारे में प्रश्न पूछने वाला चला गया।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

विनम्र श्रद्धांजलि ..नमन ...

अजेय said...

जहाँ आ कर लोक और शास्त्र का भेद मिट जाता था ....... अभूतपूर्व प्रतिभा को आखिरी नमन !

सिद्धान्त said...

अपने समय के सबसे विराट प्रतिभा वाले संगीतकारों का इस तरह से जाना बहुत कठिन तौर पर स्वीकार्य है.

अनुपमा त्रिपाठी... said...

शत-शत नमन और श्रद्धांजलि ....!!!!

मुनीश ( munish ) said...

नमन । वो लाजवाब कर गए ।