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Thursday, May 5, 2011

कभी आप सब को भी ऐसा महसूस होता है ? - महान पॉल रोब्सन दोबारा -२


बेहद उदास कर देने वाली एक कम्पोजीशन।

आत्मा के किसी निविड़ कोने में सतत गूंजता सहस्त्राब्दियों पुराना एक विलाप।

घर के पिछवाड़े में रात भर जली छूट गई एक बत्ती* जो दिन भर जली रहती है: शाम के किसी बीहड़ पल वही भुला दी गई बत्ती आपकी ज़िन्दगी को यादों से अटा डालती है सारी चीज़ों को तहस-नहस करती हुई।

गायक हैं एक बार फिर महान पॉल रोब्सन
.
*(सन्दर्भ: येहूदा आमीखाई की कविता: 'किसी को भूलना')



Sometimes I feel like a motherless child
Sometimes I feel like a motherless child
Sometimes I feel like a motherless child

A long ways from home
A long ways from home
A long ways from home
A long ways from home

Sometimes I feel like I'm almost gone
Sometimes I feel like I'm almost gone
Sometimes I feel like I'm almost gone

A long ways from home
A long ways from home
A long ways from home
A long ways from home

Friday, February 22, 2008

बहुत हो गई पतनशीलता, अब पॉल रॉब्सन को सुनिए

पतनशीलता की बहस सुर-ताल खो रही है। ये मेरी निजी, बिल्कुल निजी राय है और मुझे गलत राय बनाने का हक है। हर बहस सुर-ताल में हो ये जरूरी नहीं है। मनीषा पांडे जो बात कर रही हैं, वो जरूरी है। अच्छे-अच्छों को झटका देने का दम है उस कलम/की-बोर्ड पर चलती उंगलियों में। ये चर्चा आगे भी जारी रहे, लेकिन अगर मन थक गया है, किसी किस्म का अवसाद है, वसंत की तलाश है तो आइए कबाड़खाना में।

अशोक पांडे की दुकान में इन दिनों बहार आई हुई है। महान पॉल रॉब्सन आए हुए हैं। यहां आपको ओल मैन रिवर, माई कर्ली हेडेड बेबी और समटाइम आई फिल लाइक ए मदरलेस बेबी का ऑडियो मिलेगा। पिघले हुए लोहे की तरह गंभीर आवाज के साथ बहने को तैयार हो जाइए। लेकिन जो पतनशीलता की बहस में लगे रहना चाहते हैं, वो लगे रहें। पॉल रॉब्सन आपका इंतजार कर लेंगे।

Thursday, February 21, 2008

कभी आप सब को भी ऐसा महसूस होता है ?

एक बेहद उदास कर देने वाली कम्पोजीशन।

आत्मा के किसी निविड़ कोने में सतत गूंजता सहस्त्राब्दियों पुराना एक विलाप।

घर के पिछवाड़े में रात भर जली छूट गई एक बत्ती* जो दिन भर जली रहती है: शाम के किसी बीहड़ पल वही भुला दी गई बत्ती आपकी ज़िन्दगी को यादों से अटा डालती है सारी चीज़ों को तहस-नहस करती हुई।

गायक हैं एक बार फिर महान पॉल रोब्सन.
*(सन्दर्भ: येहूदा आमीखाई की कविता: 'किसी को भूलना')


Sometimes I feel like a motherless child
Sometimes I feel like a motherless child
Sometimes I feel like a motherless child

A long way from home
A long way from home
A long way from home
A long way from home

Sometimes I feel like I'm almost gone
Sometimes I feel like I'm almost gone
Sometimes I feel like I'm almost gone

A long way from home
A long way from home
A long way from home
A long way from home