Monday, January 28, 2008

छन्नूलाल मिश्र जी के स्वर में शिव वन्दना


छन्नूलाल मिश्र जी की आवाज़ में आप सोहर सुन चुके हैं और मीराबाई का भजन भी। आज उन्हीं से सुनिये शिव-वन्दना : नमामि शमीशान निर्वाण रूपम।


6 comments:

अपने से बाहर... said...

अविनाश दा...शर्म आती है सोचकर कि बीएचयू में तीन साल बिताकर भी ऐसे रत्नों की पहचान ही ना हो सकी, हालाँकि तुलसी घाट-संकट मोचन के वार्षिक समारोहों में बिन-नागा जाया करता था...मगर तब 'क्या सुना' से अधिक ये महत्वपूर्ण था कि 'किसको सुना'...उफ़्फ़ कितना बचकाना लगता है अब वो सब!!!पिछले दिनों पंडितजी को पहली बार तुलसी रामचरितमानस में सुना और तबसे इसी ताक में था कि और क्या सुनूँ, कि ऐसे में आपके कबाड़ में रत्नों का भंडार मिल गया...असंख्य धन्यवाद...

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

बेहतरीन...

धन्यवाद !

अमित शर्मा said...

बेहतरीन...

धन्यवाद !

Divya said...

Namameesh meeshan, nirwaan rupam,
vibhum ,vyapakam ,bramha ved swarupam,
nijam nirgunam , nirvikalpam, niruham,
Chidakash, makash, vasam bhajehum..

Badhiya prastuti.

Aabhar

प्रकाश पंकज | Prakash Pankaj said...

कोटि धन्यवाद आपका ...

harsh said...

Aisi wastu baanti aapne mujhe jisko leke "dhanyawaad" kehne me kuch galat sa lag raha hai mujhe.Apne jis bhawna se diya koshish karunga usi bhawna se mai bhi ise kisi ko duun.