Sunday, June 23, 2013

यह भी दुनिया ने देखा है


पर सपने ज़िन्दा रहते हैं

-संजय चतुर्वेदी

जनहित की शब्दावलियों ने
जनहित से व्यभिचार किया है
पूछो तो ये पता चलेगा
ऐसा जनहित में होता है

सपने लेकर चलने वाले
सपनों को धोखा देते हैं
पर सपने ज़िन्दा रहते हैं
यह भी दुनिया ने देखा है.

4 comments:

सरिता भाटिया said...

नमस्कार
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (24-06-2013) के :चर्चा मंच 1285 पर ,अपनी प्रतिक्रिया के लिए पधारें

Madan Mohan Saxena said...

बहुत सुंदर ,कमाल की भावाव्यक्ति

shyam gupta said...

सुन्दर ...
सपनों का संसार तो है अद्भुत संसार
कभी ये अपने टूटते कभी हुए साकार |
पर देखे बिन भला हुए कब पूरे सपने.....

आशा जोगळेकर said...

सुंदर ।