Sunday, December 14, 2014

रीपोस्ट - मनोहारी सिंह का इंटरव्यू - अंतिम भाग

(पिछली क़िस्त से आगे)


क्या आपने कभी हेमंत कुमार के साथ भी काम किया?

हां, मुझे उनके कुछ गानों में बांसुरी और मैन्डोलिन बजा चुके होने की याद है. दरअसल उनके एक बांग्ला गीत में मैंने क्लैरिनेट बजाया था.

आपने शंकर-जयकिशन के साथ कई बार काम किया. उनका अल्बम ‘जैज़ रागा’ किस बारे में था?

मेरा ख़याल है एच.एम.वी. ने जयकिशन से एक जैज़ अल्बम कम्पोज़ करने को कहा था. उन्होंने रईस खान, सुमंत राज, दिलीप नायक और मुझे इस अल्न्बम के लिए साथ काम करने को बुलावा भेजा.

उषा खन्ना, चित्रगुप्त, कल्याणजी-आनंदजी और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे कम्पोज़र्स के साथ अपने समय को आप कैसे याद रखना चाहेंगे?

हां, मैंने इन सभी के साथ काम किया. इन प्रतिभावान लोगों के साथ काम करना शानदार था. मैंने रविन्द्र जैन के साथ भी काम किया और उनकी फ़िल्म ‘चोर मचाये शोर’ के लिए म्यूजिक अरेंजर का काम किया. हालांकि मैं उनके साथ काफ़ी काम नहीं कर पाया ... मैं और चीज़ों में व्यस्त हो गया था और रविन्द्र जैन का संगीत समय के साथ बदल गया था ...

आपने अपने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था कि लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के कम्पोज़ किये ‘अमीर गरीब’ के गाने “मैं आया हूँ” का सैक्सोफोन पीस बजाना आपके लिए सबसे बड़ी चुनौती था...

हां, मैं इस बात को कहना चाहूँगा कि उस शानदार कम्पोजीशन में उस सैक्सोफोन पीस को बजा पाना बेहद संतुष्ट करनेवाला था. वह मेरे दिल के बेहद करीब हमेशा एक अमर कृति रहेगी.

बाद के कम्पोज़रों जैसे बप्पी लाहिरी, राजेश रोशन, हेमंत भोसले और राम-लक्ष्मण के बारे में कुछ बताइये.

मुझे इन सब के साथ काम करने में मज़ा आया है. सच बात तो यह है कि बप्पी लाहिरी के संगीत के लिए हम शुरुआती अरेंजर थे.

‘सदमा’ के लिए दक्षिण भारतीय उस्ताद इलियाराजा ने आर.डी. बर्मन के संगीतकारों को लिया था ...

मैंने उनके साथ भी काम किया – न सिर्फ़ ‘सदमा’ में बल्कि कुछेक तमिल फिल्मों में भी. मेरे लिए वे एक सम्पूर्ण संगीत निर्देशक रहे हैं जिन्हें हर साज़ की रेंज मालूम रहती है और उन साजों के लिए नोटेशंस लिखना भी उन्हें आता है. सचमुच वे एक महान संगीतकार हैं.

अपने समय के किन साथी संगीतकारों के लिए आपके मन में आदर का भाव है?

हमारे समय में एक से एक संगीतकार थे. उन सब के लिए मेरे भीतर बहुत आदर है – ट्रम्पेट पर जॉर्ज, गिटार पर भूपिंदर, और अकॉर्डियन पर केसरी लार्ड का नाम सबसे पहले जेहन में आ रहा है.

क्या आपके बच्चों में से किसी ने संगीत को चुना?

मेरा सबसे बड़ा बेटा वायोलिन बजाया करता था. छोटा वाला कीबोर्ड बजाता है. लेकिन वे हिन्दी फ़िल्म संगीत में कहीं नहीं पहुँच पाए.


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