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Saturday, December 31, 2016

वे नहीं जानते कि प्यार करना बंद करने पर ही वे बूढ़े होते हैं - गाबो रीपोस्टेड

साल की आख़िरी पोस्ट के लिए बाबा गाबो के इन लफ़्ज़ों को रीपोस्ट करने से बेहतर कोई विकल्प समझ में नहीं आ रहा था. कबाड़खाने की तरफ से आप सब को नए साल की मुबारकबाद. 

शुभ 2017. 


अगर एक पल को ईश्वर यह भूल जाए कि मैं चीथड़ों से बना एक गुड्डा नहीं हूँ और मुझे जीवन की एक कतरन अता फरमाए तो मैं शायद वह सब नहीं कहूँगा जो मैं सोचता हूँ. मैं उस सब की बाबत सोचूंगा जो मुझे कहना होगा.  

मैं चीजों को उनकी कीमत से नहीं बल्कि इस बात से आंकूंगा कि उनका अर्थ क्या है.

मैं कम सोऊंगा और यह सोचता हुआ सपने ज्यादा देखूँगा कि आँखें बंद करते ही हम एक मिनट में रोशनी के साठ सेकेण्ड गंवा देते हैं.

जब दूसरे लोग मटरगश्ती कर रहे होंगे मैं चलूँगा और जब वे सो रहे होंगे जगूंगा.    

जब दूसरे बोल रहे होंगे तो मैं सुनूंगा और एक बढ़िया चॉकलेट आइसक्रीम का मज़ा लेने के बारे में सोचूंगा.

अगर ईश्वर मुझे जीवन की एक कतरन अता फरमाएगा तो मैं साधारण पोशाक पहनूंगा, मैं अपनी देह ही नहीं अपनी आत्मा को भी उघाड़ते हुए सबसे पहले अपने को सूरज के सामने उछल दूंगा.

मेरे ख़ुदा! अगर मेरे पास एक दिल होता तो मैं अपनी नफ़रत को बर्फ़ पर लिखता और सूरज के बाहर आने  का इंतज़ार करता. वान गॉग के सपने के साथ मैं बेनेदित्ती की कविता को सितारों में उकेर देता और सेरात एक कविता मेरे वास्ते एक प्रेमगीत होती जिसे मैं चंद्रमा को पेश करता.

अपने आंसुओं से मैं गुलाबों को सींचता ताकि उनके काँटों के दर्द और उनकी पंखुड़ियों में पुनर्जन्म लिए चुम्बनों को महसूस कर पाऊं. मेरे ख़ुदा अगर मेरे पास जीवन की एक कतरन होती तो मैं एक भी ऐसा दिन न बीतने देता जब मैं उन लोगों से, जिन्हें मैं प्यार करता हूँ कहता कि मैं उन्हें प्यार करता हूँ.


मैं हरेक औरत और हरेक आदमी को यकीन दिलाता कि वे मेरे सबसे प्यारे हैं और यह कि मैं प्यार से प्यार करता हुआ जिये चला जाऊंगा.

मैं उन इंसानों पर यह साबित करूंगा कि यह सोचने में वे कितने गलत हैं कि एक बार बूढ़ा हो जाने पर वे प्यार नहीं कर सकते; वे नहीं जानते कि प्यार करना बंद करने पर ही वे बूढ़े होते हैं.  

एक बच्चे को मैं पंख दूंगा लेकिन उसे खुद उड़ना सीखने दूंगा. मैं बूढों को सिखाऊंगा कि मृत्यु बड़ी उम्र के कारण नहीं बल्कि भूल जाने की वजह से आती है. तुमसे मैंने इतना सारा सीखा है, इंसानो!

मैंने सीखा है कि हर कोई पहाड़ की चोटी पर रहना चाहता है बिना यह जाने कि सच्ची खुशी इस बात में है कि उस पर चढ़ा कैसे गया है.

मैंने सीखा है कि जब एक शिशु सबसे पहले अपने पिता की उंगली को अपनी नन्ही हथेली में जकड़ता है, वह हमेशा के लिए उसे अपने साथ जकड़ लेता है.


मैंने सीखा है कि आदमी को दूसरे आदमी को नीची निगाह से देखने का अधिकार तभी है जब वह उसे उसके पैरों पर खड़ा करने में मदद कर रहा हो.

मैंने तुमसे कितनी ही बातें सीखी हैं, इंसानो! लेकिन सच यह है कि उनका ज़्यादातर किसी काम का नहीं होता क्योंकि जब वे मुझे उस सूटकेस के भीतर रख रहे होंगे, बदकिस्मती से मैं मर रहा होऊँगा.

Monday, April 27, 2009

वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ सॉलीट्यूड - भाग दो

पिछली पोस्ट से जारी:



मेन्दोज़ा: चलो किताब के बारे में बात करते हैं, बुएनदीया परिवार का एकाकीपन आता कहां से है?

मारकेज़: मेरे विचार से प्रेम की कमी से. तुम देख सकते हो कि पूरी शताब्दी में सुअर की पूंछ वाला ऑरेलियानो जन्म लेने वाला इकलौता बुएनदीया है. बुएनदीया लोग प्रेम करने में असमर्थ थे और यही उनकी कुंठा और एकाकीपन की कुंजी है. मैं मानता हूं कि एकाकीपन, भाईचारे का विलोम है.

मैं वह सवाल तुमसे नहीं करूंगा जो हर कोई करता है-कि किताब में इतने सारे ऑरेलियानो और इतने सारे होसे आरकादियो क्यों हैं - क्योंकि हम दोनों जानते हैं कि यह एक लातीन अमरीकी परंपरा है. हम सब के नाम हमारे पिताओं और दादाओं के नाम पर रखे जाते हैं और तुम्हारे परिवार में तो यह परम्परा सनक की इस हद तक पहुंची कि तुम्हारा एक अपना भाई गाब्रीएल के नाम से जाना जाता है. पर मैं समझता हूं कि ऑरेलियानो नाम के लोगों को होसे आरकादियो लोगों से फ़र्क करने में एक सूत्र है. क्या है वह?

बहुत आसान है. होसे आरकादियो नाम के लोगों के बच्चे होते हैं और ऑरेलियानों के नहीं. सिर्फ़ एक अपवाद है - होसे आरकादियो सेगुन्दो और ऑरेलियानो सेगुन्दो. ऐसा शायद इसलिये है कि एक समान जुड़वां होने के नाते जन्म के समय ही उनमें कुछ अदल-बदल हो गई थी.

किताब में पुरुषों के भीतर तमाम खोट हैं (खोजें, कीमियगरी, युद्ध, पीने के दौर) और स्त्रियों में समझदारी. क्या दोनों को तुम इसी तरह देखते हो?

मेरा मानना है कि स्त्रियां संसार को टूटने से बचाए रखती हैं जबकि पुरुष इतिहास को आगे ले जाने का प्रयास करते हैं. अंत में आप हैरत करते हैं कि दोनों में से ज्यादा सनकी कौन है?

स्त्रियां न सिर्फ अगली पीढ़ियों की सुनिश्चितता तय करती हैं बल्कि उपन्यास की भी. क्या शायद यही उसुZला की असाधारण लम्बी जिन्दगी का रहस्य नहीं?


हां, उसने गृहयुद्ध से पहले मर जाना चाहिये था जब वह सौ साल की होने वाली थी पर मुझे अहसास हुआ कि यदि उसकी मौत हो गई तो किताब ढह जायेगी. जब वह अंतत: मरती है, किताब में इतना उबाल आ चुका होता है कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आगे क्या होगा?

किताब में पेत्रा कोट्स की क्या भूमिका है?

सतही तौर पर आप उसे फर्नांदा की छवि के तौर पर देख सकते हैं, एक कैरिबियाई स्त्री जिसे आन्देस की स्त्रियों के प्रति कोई नैतिक पूर्वाग्रह नहीं है. लेकिन मैं समझता हूं उसका व्यक्तित्व बहुत कुछ उर्सुला जैसा है - वह सच्चाई के ज्यादा मोटे तौर पर समझने वाली उर्सुला है.

मैं मानता हूं कि जब तुम किताब लिख रहे थे, कई चरित्र उससे अलग बनकर सामने आये होंगे जैसा तुमने पहले तय किया होगा. क्या तुम कोई उदाहरण दे सकते हो?

हां एक तो सान्ता सोफिया दोन्या पियेदाद का होगा. किताब में, जैसा कि वास्तविकता में हुआ था, मैंने सोचा था कि जब उसे पता लगेगा कि उसे कोढ़ है वह बिना किसी को बताये घर छोड़कर चली जायेगी. हालांकि उस चरित्र का पूरा व्यक्ति समर्पण और स्व-अस्वीकार से निर्मित है, जिसके कारण यह अन्त विश्वसनीय लगता पर मुझे लगा कि मुझे इसे बेहतर बनाना होगा. वह काफी क्रूर लग रहा था.

क्या कोई चरित्र कतई बेकाबू हुआ?

तीन बेकाबू हो गये थे पूरी तरह - इस मायने में कि उनका जीवन और व्यक्तित्व वैसा सामने नहीं आया जैसा मैंने तय किया था. ऑरेलियानो होसे का अपनी आन्ट आमारान्ता के लिये प्रेम मेरे लिये हैरान करने वाला था( होसे ऑरकादियो सेगुन्दो बनाना वर्कर यूनियन का ऐसा नेता नहीं था जो मुझे पसन्द आता( और प्रशिक्षु पोप होसे ऑरकादियो एक ऐसे एडोनिस के रूप में बदल गया जो किताब में जंचता नहीं.

हममें से जो इस किताब के कुछ सूत्रों को जानते हैं, इस बात को महसूस कर सकते हैं कि एक क्षण आता है जब माकोन्दो एक कस्बा, तुम्हारा कस्बा नहीं रह जाता और एक नगर बन जाता है - बारान्कीया. क्या तुमने वहां के किसी परिचित व्यक्ति या स्थान को वहां रखा? इस बदलाव से तुम्हें कोई दिक्कतें तो नहीं आई?

माकोन्दो जगह की बनिस्बत एक मन:स्थिति ज्यादा है, सो कहानी को कस्बे से शहर में ले जाने में कोई खास दिक्कत नहीं आई - न ही किताब के माहौल में कोई परिवर्तन आया.


उपन्यास में तुम्हारे लिये सबसे मुश्किल क्षण कौन सा था?

शुरूआत करना. मुझे वह दिन अच्छे से याद है जब मैं बहुत मुश्किल के बाद पहला वाक्य पूरा कर पाया था और भयभीत होकर मैंने अपने आप से पूछा कि आगे क्या होने वाला है. असल में, जब तक जंगल के बीच वह गलियारा नहीं खोजा गया था, मैं नहीं सोचता था कि किताब का कुछ बन पायेगा. पर उसके बाद किताब लिखना एक तरह का पागलपन बन गया - हालांकि उसमें आनन्द भी आया.

क्या तुम्हें वह दिन याद है जब तुमने उसे खत्म किया? कितना बजा था? तुम्हें कैसा लगा?

अठारह महीनों तक मैं सुबह नौ से दोपहर तीन तक हर रोज लिख रहा था. मुझे पता था कि वह अंतिम दिन था पर किताब अपने नैसर्गिक अन्त पर गलत वक्त पर पहुंची - सुबह करीब ग्यारह बजे. मेरसेदेज़ घर पर नहीं थी और मुझे फोन पर कोई नहीं मिला जिसे मैं इस बारे में बता पाता. मुझे अपनी हैरत बिल्कुल अच्छे से याद है, मानो वह कल घटा हो. मुझे पता नहीं था कि समय के साथ क्या किया जाय, सो तीन बजे तक जिन्दा रहने के लिये मुझे कई तरह की चीजों की खोज करनी पड़ी.

इस किताब के कुछ आयाम जरूर होंगे जिन्हें आलोचकों ने (जिनसे तुम इतनी नफरत करते हो) नजरअन्दाज कर दिया होगा. कौन हैं वे आयाम?

एक तो किताब की सबसे उत्कृष्ट बात है - अपने बेचारे पात्रों के लिये लेखक की उद्दाम भावनाएं.

तुम्हारे ख्याल से तुम्हारा सर्वश्रेष्ठ पाठक कौन है?

मेरे एक रूसी दोस्त की मुलाकात एक स्त्री से हुई. एक बहुत बूढ़ी स्त्री से जो किताब को हाथ से प्रतिलिपि बना रही थी - आखिरी पंक्ति तक. मेरे दोस्त ने उससे पूछा कि वह क्यों ऐसा कर रही है. वह बोली, "क्योंकि मैं जानना चाहती हूं कि वास्तव में पागल कौन है - लेखक या मैं, और यह जानने के लिये किताब को दुबारा लिखना पड़ेगा." मुझे इससे बेहतर पाठक की कल्पना करना मुश्किल लगता है.


कितनी भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ है?

सत्रह.

कहते हैं कि अंग्रेजी अनुवाद बढ़िया हुआ है?

हां, बहुत बढ़िया है. अंग्रेजी में भाषा सघन होकर ज्यादा ताकतवर हो गई है.

और बाक़ी अनुवाद?

मैंने फ्रांसीसी और इतालवी अनुवादकों के साथ थोड़ा काम किया था. दोनों अच्छे अनुवाद हैं हालांकि कम से कम मेरे लिये फ्रांसीसी में किताब में वैसी बात नहीं है.

फ्रांस में यह बहुत ज्यादा नहीं बिकी है - इंग्लैण्ड और इटली के मुकाबले, स्पानी भाषी देशों को छोड़ दें तो, जहां यह असाधारण रूप से सफल हुई है. तुम्हारे ख्याल से ऐसा क्यों है?

शायद कार्तेसियाई परम्परा के कारण. मैं देकार्ते के अनुशासन के बदले राबेलाइस के सनकीपन के ज्यादा करीब हूं और फ्रांस में देकार्ते काफी प्रभावशाली है. शायद इसीलिये यह किताब फ्रांस में और देशों कितनी लोकप्रिय नहीं हुई, हालांकि वहां बढ़िया आलोचनाएं हुईं. रोसाना रोजान्दा ने एक बार मुझे कहा था कि सन् 1968 में जब यह किताब फ्रांस में छपी थी - व्यावसायिक सफलता के लिये वहां वह कोई उल्लेखनीय मौका नहीं था.

क्या तुम्हें `वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ सॉलीट्यूड´ की सफलता से हैरत होती है?

हां, बहुत ज़्यादा.

क्या तुमने कभी इसका रहस्य जानने की कोशिश की है?

नहीं, मैं जानना नहीं चाहता. मेरे ख्याल से यह पता करना बहुत ख़तरनाक होगा कि कोई किताब, जिसे मैंने बस कुछ करीबी दोस्तों को दिमाग़ में रखकर लिखा था, इस कदर बिक सकती है.

वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ सॉलीट्यूड - भाग एक



गाब्रीएल गार्सीया मारकेज़ उर्फ़ गाबो के साक्षात्कारों पर आधारित प्रसिद्ध पुस्तक 'फ़्रैगरेन्स ऑफ़ गुवावा' के एक अध्याय से कुछ टुकड़े मैंने कभी यहां लगाए थे. मेरे संग्रह में कोई बीस किताबें ऐसी हैं जिन्हें मैं हर साल पढ़ता हूं - और यह सिलसिला पिछले बारह-तेरह सालों से जारी है. गाबो का कालजयी उपन्यास 'वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ सॉलीट्यूड' किताबों की इस सूची में काफ़ी ऊपर आता है. कल देर रात इसे एक बार और पढ़ कर समाप्त किया.

'फ़्रैगरेन्स ऑफ़ गुवावा' का अनुवाद कई सालों से प्रकाशनाधीन है - किताब जब छपे, क्यों न आपको इस का वह हिस्सा पढ़वाऊं जिस में मारकेज़ ' वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ सॉलीट्यूड' की बाबत बातें कर रहे हैं अपने अभिन्न मित्र और मशहूर कोलम्बियाई पत्रकार प्लीनीयो आपूलेयो मेन्दोज़ा से. ये लीजिए पहला हिस्सा. दूसरा रात में लगा दूंगा.





जब तुमने `वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ़ सॉलीट्यूड´ लिखना शुरू किया तुम क्या करना चाहते थे?

मैं उन सारे अनुभवों को साहित्य में व्यक्त करने की राह खोजना चाहता था, जिन्होंने एक बच्चे के तौर पर मुझ पर प्रभाव डाला था.

बहुत से आलोचकों को इस किताब के भीतर मानव जाति के इतिहास की जातक कथा या एक रूपक नजर आते हैं.

नहीं, मैं बस इतना करना चाहता था कि अपने बचपन के संसार की एक साहित्यिक छवि छोड़ना चाहता था जो, जैसा तुम्हें पता है एक बड़े, बेहद उदास घर में बीच था जहां एक बहन थी जो मिट्टी खाती थी, एक नानी थी जो भविष्यवाणियां किया करती थी, और एक ही नाम वाले असंख्य रिश्तेदार थे जिनके लिये प्रसन्नता और पागलपन के बीच बहुत फर्क नहीं था.

तो भी आलोचकों को कहीं जटिल उद्देश्य नजर आते हैं.

यदि वे हैं भी तो ऐसा करने की मेरी नीयत नहीं थी. होता ये है कि लेखकों के बरअक्स आलोचकों को किताब में अपनी मनचाही चीज मिल जाती है, वह नहीं जो उसमें सचमुच है.

तुम आलोचकों के बारे में बहुत विडंबनापूर्ण बातें करते हो. तुम उन्हें इतना नापसंद क्यों करते हो?

क्योंकि ज्यादातर आलोचक इस बात को नहीं समझते कि `वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ़ सॉलीट्यूड´ एक तरह का लतीफ़ा है, जिसमें नजदीकी मित्रों के लिये कई संकेत है( सो किसी अधिकार के कारण वे किताब को `डीकोड´ करने का काम अपने ज़िम्मे ले लेते हैं और आख़िरकार मूर्खों जैसे नज़र आने लगते हैं.

मिसाल के तौर पर मुझे याद है कि एक आलोचक को लगा था कि उसे उपन्यास का सूत्र मिल गया है जब उसने गौर किया कि एक पात्र - गाब्रीएल - राबेलाइस की सम्पूर्ण कृतियां पेरिस ले जाता है. इस खोज के बाद उसने साहित्यिक प्रभाव को अतिरंजित किया. मैंने राबेलाइस की उपमा के बतौर इस्तेमाल किया है और ज़्यादातर आलोचक इस बात को देख नहीं पाये. इस बात को दरकिनार करके कि आलोचक क्या कहते हैं मेरे ख्याल से उपन्यास तुम्हारे बचपन की स्मृतियों की काव्यात्मक पुनर्रचना के आगे भी कुछ है. क्या तुमने एक बार नहीं कहा था कि बुएनदीया परिवार की कहानी लातीन अमरीकी इतिहास का वृतांत हो सकता है?

हां, मेरे विचार से ऐसा ही है. लातीन अमरीकी इतिहास भी भीषण बेकार उद्यमों से भरा हुआ है और उन महान नाटकों से भी जिन्हें घटने से पहले ही खारिज कर दिया गया. हमें स्मृति के ह्रास की हैजे की बीमारी भी है. समय बीतने पर कोई याद नहीं रखता कि बनाना कंपनी के कर्मचारियों का हत्याकांड वाकई हुआ था, उन्हें सिर्फ कर्नल ऑरेलियानो बुएनदीया की याद आती है.

और जो तैंतीस युद्ध कर्नल ऑरेलियानो बुएनदीया ने हारे सम्भवत: हमारी अपनी राजनीतिक कुंठा की अभिव्यक्ति हो सकते हैं, अगर कर्नल जीत गया होता तो क्या होता?

वह पैट्रिआर्क जैसा होता. उपन्यास को लिखते वक्त एक दफे मुझे लालच आया कि कर्नल को सत्ता मिल जाये. ऐसा होता तो मैंने `वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ़ सॉलीट्यूड´ की जगह `द ऑटम ऑफ़ द पैट्रिआर्क´ लिखा होता.

तो क्या हम यह मान लें कि भाग्य की किसी ऐतिहासिक सनक के कारण जो भी तानाशाही के खिलाफ लड़ता है, खुद सत्ता में आने के बाद तानाशाह बन जाता है?

`वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ सॉलीट्यूड´ में कर्नल ऑरेलियानो बुएनदीया का एक बन्दी उससे कहता है, "मुझे फिक्र इस बात की है कि सेना की प्रति तुम्हारी इतनी घृणा, उससे इतना लड़ चुकने और उसके बारे में इतना सोच लेने के बाद तुम भी वैसे ही बन चुके हो". अन्त में वह कहता है, "इस हिसाब से तुम हमारे इतिहास के सबसे बड़े खूनी तानाशाह हो."

क्या यह सच है कि तुमने यही उपन्यास तब लिखना शुरू किया था जब तुम अठारह के थे?

हां, `द हाउस´ नाम था उसका क्योंकि मैंने सोचा था कि पूरा घटनाक्रम बुएनदीया परिवार के घर के भीतर घटेगा.

उसमें तुम कहां तक पहुंचे थे? क्या तुमने सौ सालों के बारे में लिखने का सोचा था?

मैं किसी खाके तक नहीं पहुंच पाया. मैं कुछ टुकड़े अलग कर पाया, जिनमें से कुछ उस अख़बार में छपे जहां मैं उन दिनों काम करता था. सालों की संख्या से मुझे कभी चिन्ता नहीं हुई. मुझे ख़ुद नहीं पता कि असल में `वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ़ सॉलीट्यूड´ में सौ सालों की कहानी है या नहीं.

तुमने तभी उसे लिखना जारी क्यों नहीं रखा?

क्योंकि तब उस तरह की किताब लिखने के लिये न मेरे पास पर्याप्त अनुभव था न शक्ति न ही तकनीकी कौशल.

लेकिन वह कहानी तुम्हारे दिमाग में घूमती रही थी.

पन्द्रह सालों तक. मुझे सही कहानी नहीं मिल पाई थी. उसने मेरे कानों में सही-सही गूंजना था. एक दिन जब मैं मेरसेदेज और बच्चों के साथ आकापुल्को की तरफ गाड़ी से जा रहा था, वह एक कौंध की तरह मेरे दिमाग में आई. मुझे वह कहानी उसी तरह सुनानी थी जैसी मेरी नानी सुनाया करती थीं. मैं उसी दोपहर से शुरू करने वाला था जब छोटे बच्चे को उसके नाना बर्फ खोजने ले जाते हैं.

एक एकरेखीय इतिहास

एक एकरेखीय इतिहास जिसमें असाधारण तत्व सामान्य चीजों में जज़्ब हो जाते हैं, अपनी पूरी सादगी के साथ.

क्या यह सच है कि तुमने गाड़ी मोड़ ली थी और तुरन्त लिखना शुरू कर दिया था?

सच है. मैं कभी आकापुल्को नहीं पहुंच पाया.

और मेरसेदेज़?

तुम जानते हो मेरसेदेज़ ने मेरे कितने सारे ऐसे पागलपन बर्दाश्त किये हैं. उसके बिना मैं किताब नहीं लिख सकता था. उसने चीज़ों का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया. मैंने कुछ ही महीने पहले कार खरीदी थी, सो उसे जमानत पर दे कर मैंने उसे पैसे दे दिया. मुझे लगा था कि मैं छ: महीने लूंगा पर किताब पूरा करने में मुझे डेढ़ साल लगे. जब पैसा ख़त्म हो गया उसने एक शब्द भी नहीं कहा. मुझे नहीं पता कि वह कैसे कर पाई लेकिन उसने कसाई को उधार पर मांस देने को, नानबाई को उधार पर डबलरोटी देने को और मकान मालिक को किराये के लिये नौ महीने रूके रहने पर राजी कर लिया. उसने मुझे बताये बिना हर चीज की देखरेख की और जब-तब मेरे लिये पांच-पांच सौ कागजों का बण्डल लाया करती थी. उन पांच सौ पन्नों के बिना मैं कभी नहीं रहा. जब किताब ख़तम हो गई तो यह मेरसेदेज़ थी जिसने पाण्डुलिपि को डाक से एदीतोरियाल सूदामेरिदाना भेजा.

उसने मुझे एक बार बताया था कि पाण्डुलिपि को डाकखाने ले जाते हुए उसने सोचा था `अगर यह किताब इतने सब के बाद उतनी अच्छी न हो पाई तो?´ मैं नहीं समझता उसने उसे पढ़ा था. पढ़ा था क्या?

नहीं, वह पाण्डुलिपियां पढ़ना पसन्द नहीं करती.

वो और तुम्हारे बेटे अक्सर तुम्हारी किताबें पढ़ने वाले आखिरी लोग होते हैं. मुझे बताओ, क्या तुम्हें निश्चित पता था कि यह किताब सफल होगी?

मुझे पता था कि आलोचकों को किताब पसंद आयेगी पर इतनी सफलता के बारे में नहीं सोचा था. मुझे लगा था कि वह करीब पांच हजार बिक जायेगी (तब तक मेरी बाक़ी किताबें की सिर्फ हजार प्रतियां बिकी थीं). एदीतोरियाल सूदामेरिकाना ज्यादा आशावान था - उनके ख्याल से किताब आठ हजार बिक सकती थी. असल में किताब का पहला संस्करण अकेले बुएनोस आयरेस में दो हफ्ते में बिक गया.

Thursday, September 25, 2008

मारकेज़: उसके अंधविश्वास, सनकें और रुचियां

बीसवीं सदी के लातीन अमरीकी साहित्य के ख़लीफ़ा और नोबेल पुरुस्कार प्राप्त गाब्रीएल गार्सीया मारकेज़ उर्फ़ गाबो की कुछ व्यक्तिगत सनकें विख्यात हैं. अपने पत्रकार साथी और अंतरंग मित्र प्लीनीयो आपूलेयो मेन्दोज़ा को उन्होंने बहुत सारे इन्टरव्यू दिए थे जो बाद में 'फ़्रैगरेन्स ऑफ़ गुवावा' नाम की प्रसिद्ध पुस्तक के रूप में छपे. इसी पुस्तक के एक दिलचस्प अध्याय का अनुवाद प्रस्तुत है. गाबो के इसरार पर ही इस को जानबूझ कर पुस्तक का तेरहवां अध्याय बनाया गया था.




तुमने एक बार कहा था, 'अगर तुम ईश्वर में यकीन नहीं करते हो तो कम से कम अंधविश्वासी तो बनो' क्या यह तुम्हारे लिए गम्भीर मसला है?

बहुत गम्भीर.

क्यों?

मैं मानता हूं कि अंधविश्वास, या आमतौर पर जो भी इस तरह की चीजों को कहा जाता है प्राकृतिक शक्तियों से संचालित होते हैं जिसे तार्किक विचारशीलता (उदाहरण के लिए पश्चिमी देशों की) ने पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है.

चलो सबसे आम उदाहरणों से शुरू करते हैं - तेरह का अंक. क्या तुम मानते हो कि यह दुर्भाग्य लेकर आता है?

मेरे ख्याल से इसका बिल्कुल उल्टा होता है. जानकार लोगों ने इसे एक अपशकुन में तब्दील कर दिया है (अमरीका में होटल बारहवीं से चौदहवीं मंजिल तक जाते हैं) ताकि और लोग इसका फायदा न उठा पाएं और उन्हीं को इसका सबसे ज्यादा लाभ मिले. असल में यह एक भाग्यशाली संख्या है. ऐसा ही काली बिल्लियों और सीढ़ियों के नीचे टहलने के साथ भी है.

तुम्हारे घर हमें हमेशा पीले फूल होते हैं. इसका क्या महत्व है?

अगर मेरे चारों तरफ पीले फूल हों तो मेरे साथ कोई भी गम्भीर घटना नहीं घट सकती. पूरी तरह सुरक्षित होने के लिए मुझे पीले फूल (पीले गुलाब हों तो बेहतर) चाहिए होते हैं और मेरे चारों तरफ स्त्रियां.

मेरेसेदेस (गाबो की पत्नी) हमेशा तुम्हारी डेस्क पर एक गुलाब लगाती है.

हमेशा! कई बार ऐसा भी हुआ है कि मैं काम करना चाह रहा हूं पर कोई भी चीज ठीक नहीं हो रही. मैं पन्ने पर पन्ने फेंके जा रहा हूं. मैं गुलदस्ते को देखता हूं और कारण मेरी समझ में आता है ... कोई गुलाब नहीं. मैं चीखकर एक फूल मंगाता हूं जिसे वे ले कर आते हैं और सब कुछ ठीक से होना शुरू हो जाता है.

क्या पीला तुम्हारा भाग्यशाली रंग है?

पीला भाग्यशाली है पर सोना नहीं, न ही सोने का रंग मैं सोने को हमेशा गू की तरह पहचानता हूं. बचपन से ही मैं टट्टी को नकारता आया हू¡, जैसा एक मनोविश्लेषक ने मुझे बताया था.

`वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ सॉलीट्यूड´ में एक पात्र सोने की तुलना कुत्ते की टट्टी से करता है.

हां, जब होसे आरकादियो बुएनदिया धातुओं को सोने में बदलने का नुस्खा खोज लेता है और अपने प्रयोगों के परिणाम अपने बेटे को दिखाता है, वह कहता है, 'यह कुत्ते की टट्टी जैसा दिख रहा है'

तो तुम सोना कभी नहीं पहनते?

कभी नहीं. न मैं घड़ी पहनता हूं, न कोई जंजीर, न सोने की अंगूठी, न कड़ा. न ही तुम मेरे घर सोने की बनी कोई चीज देखोगे.

तुमने और मैंने वेनेजुएला में एक ऐसी चीज सीखी थी जो जीवन में बहुत सहायक सिद्ध हुई है-कुरूचि और दुर्भाग्य के बीच सम्बन्ध! वेनेजुएला के लोगों के पास इस तरह के लोगों, चीजों और प्रवृत्तियों के लिए एक विशेष शब्द है. वे इसे `पावा´ कहते हैं.

हां. यह एक असाधारण सुरक्षा-मैकेनिज्म है जो वेनेजुएला के सामान्य लोगों के विवेक ने नवधनाढ्य वर्ग की कुरूचि के बरखिलाफ खड़ा किया है.

तुमने उन तमाम चीजों की लिस्ट बना रखी है जिनमें `पावा´ होता है, है ना? क्या तुम्हें उनमें से कुछ याद हैं?

हां, कई सारी हैं और सबसे आम - दरवाजे के पीछे बड़े-बड़े शंख ...

घरों के भीतर एक्वेरियम ...

प्लास्टिक के फूल, मोर, कशीदाकारी वाले मनीला शॉल ... लिस्ट बहुत लम्बी है.

तुमने स्पेन के उन नौजवानों का भी जिक्र किया था जो लम्बे काले लबादे पहने रेस्त्राओं में मनोरंजन करते हैं?

छात्रों के म्यूजिकल ग्रुप. बहुत कम चीजें होती हैं जिनमें उनसे अधिक `पावा होता है.

और औपचारिक पोशाक

हां, पर उसके अलग-अलग स्तर हैं. `टेल्स´ में डिनर जैकेट से ज्यादा पर `फ्रॉक कोट´ से कम `पावा´ होता है. इस प्रकार की पोशाकों में केवल ट्रॉपिकल डिनर जैकेट इस लिस्ट में नहीं आती.

तुमने कभी `टेल्स´ पहनी है?

कभी नहीं.

कभी पहनोगे? अगर तुम्हें नोबेल पुरस्कार मिलेगा तो पहननी ही पड़ेगी

मेरे किसी भी उत्सव या अनुष्ठान में शामिल होने की शर्तों में मैंने टेल्स न पहनना रखना ही था. और मैं क्या-क्या कर सकता हूं-`टेल्स´ में इतना अपशकुन होता है.

हमने पावा के और रूप खोजे थे. तुमने एक बार तय किया था कि बिना कपड़े पहने सिगरेट पीने का मतलब दुर्भाग्य नहीं होता जबकि बिना कपड़े पहने टहलते हुए सिगरेट पीने में दु्र्भाग्य होता है. और सिर्फ जूते पहने-पहने टहलने में.

हा¡, अवश्य ही. और मोज़े पहनकर सैक्स करने से. वह घातक होता है. ऐसी चीज कभी काम नहीं कर सकती.

और कौन सी चीजें?

विकलांग लोग जो अपनी विकलांगता का इस्तेमाल वाद्य यंत्र बजाने में करते हैं. उदाहरण के लिए बिना बांह वाले लोग अपने पैरों से ड्रम बजाते हुए या कानों से बांसुरी बजाने वाले लोग या अंधे संगीतकार.

मेरे ख्याल से बहुत से शब्द भी अभिशप्त होते हैं. मेरा मतलब है ऐसे शब्द जिन्हें तुम कभी भी अपने लेखन में इस्तेमाल नहीं करतेण.

हां, तमाम समाजशास्त्रीय जार्गन -`स्तर´, `संदर्भ´ जैसे शब्दों में बहुत `पावा´ है.

`एप्रोच´ भी ऐसा ही शब्द है.

हां, `एप्रोच´. `हैण्डीकैप्ड´ के बारे में क्या ख्याल है? मैं कभी भी `अथवा/तथा´ का इस्तेमाल नहीं करता.

क्या लोगों का भी वैसा ही प्रभाव होता है?

हां, पर बेहतर है उस बारे में बात न की जाय.

मैं भी यही समझता हूं, एक लेखक है जो जहां जाता है अपने साथ `पावा´ लेकर चलता है. मैं उसका नाम नहीं लूंगा क्योंकि अगर मैं वैसा करूंगा तो यह किताब बरबाद हो जाएगी. इस तरह के लोगों से मिलने पर तुम क्या करते हो?

मैं उन्हें नजरअंदाज कर देता हूं. सबसे बड़ी बात तो ये कि जहां वे होते हैं मैं उस जगह पर सोने से साफ मना कर देता हूं. कुछ साल पहले मैंने और मेरसेदेस ने कोस्ता ब्रावा पर एक शहर में एक फ्लैट किराये पर लिया. हमें बहुत जल्दी मालूम पड़ गया कि हमारी एक पड़ोसन जो नमस्ते करने आई थी, के भीतर `पावा´ है. मैंने वहां सोने से इन्कार कर दिया. मैंने दिन वहीं बिताया पर रात काटने में एक दोस्त के घर चला गया. मेरसेदेस इस बात पर बहुत झल्लाई पर उसके अलावा मैं कुछ भी नहीं कर सकता था.

जगहों के बारे में क्या ख्याल है? क्या उनका भी तुम पर ऐसा प्रभाव पड़ता है?

हां, पर इसलिए नहीं कि वे खुद दुर्भाग्यशाली होते हैं पर वहां पहुंचकर कई बार मुझे पूर्वाभास होने लगते हैं. कादाकेस में मेरे साथ ऐसा ही हुआ. मुझे पता है अगर मैं एक भी बार वापस वहां गया तो मेरी मौत हो जाएगी.

तुम तो वहां हर गर्मियों में जाया करते थे। क्या हुआ?

हम एक होटल में रूके थे जब वह उत्तरी हवा बहनी शुरू हुई जो आपके स्नायुओं को बेहद उत्तेजित कर देती थी. तीन दिन तक मैं और मेरसेदेस कमरे के भीतर रहे क्योंकि बाहर निकल पाना मुमकिन न था. अचानक मुझे ऐसा निश्चित आभास हुआ कि मेरा जीवन खतरे में है. मैं जानता था कि अगर मैं कादाकेस से जिन्दा निकल आया तो दुबारा वहां नहीं जा सकूंगा. जब हवा थमी, हम तुरन्त उस संकरी, घुमावदार सड़क से लौट पड़े. तुम जानते हो कौन सी वाली. जेरोना पहुंचकर ही मैंने इत्मीनान की सांस ली. मैं चमत्कारिक तरीके से बच गया पर मैं जानता था कि दुबारा वहां जाने पर जरूरी नहीं था कि भाग्य उतना ही साथ देता.

अपने प्रसिद्ध पूर्वाग्रहों के बारे में तुम्हारा क्या कहना है?

मैं समझता हूं वे उन छोटे-छोटे संकेतों और सूचनाओं के कारण होते हैं जिन्हें मैं अपने अवचेतन में दर्ज करता हूं.

मुझे याद है काराकास में एक जनवरी 1958 की जब तुम्हें अचानक लगा था कि कभी भी कुछ भी आशातीत घट सकता था और असल में हुआ भी वैसा ही. हमारी नाक के सामने राष्ट्रपति के महल पर बिल्कुल आशातीत हवाई हमला शुरू हो गया था. मैं आज तक अपने आपसे पूछता हू¡ कि तुम्हें उसका पूर्वाभास हुआ कैसे?

मुझे पक्का यकीन था क्योंकि जब मैं उस सुबह अपने हॉस्टल में जागा, तो मैंने फाइटर जहाज के इंजन की आवाज सुनी. उसने मेरे अवचेतन को बताया होगा कि कुछ गड़बड़ होने वाली है क्योंकि मैं तभी यूरोप से लौटा था जहां फाइटर जहाज शहरों के ऊपर केवल युद्धकाल में उड़ा करते हैं.

क्या तुम्हारे पूर्वाभास बिल्कुल स्पष्ट होते हैं?

नहीं. वे बहुत अस्पष्ट होते हैं लेकिन वे हमेशा किसी निश्चित चीज से जुड़े होते हैं. देखो, एक दिन बारसीलोना में मैं अपने जूतों के तस्मे बांध रहा था जब मुझे लगा कि घर पर मैक्सिको में कुछ हो गया है. बहुत बुरा नहीं पर कुछ हुआ है. मैं चिंतित था क्योंकि उसी दिन मेरा बेटा रोद्रीगो कार से आकापुल्को जा रहा था. मैंने मेरसेदेस से घर फोन करने को कहा. वास्तव में उसी वक्त जब मैं अपने जूते के फीते बांध रहा था घर पर कुछ हुआ था. हमारी नौकरानी का बच्चा हुआ था - एक लड़का. मैंने चैन की सांस ली क्योंकि मेरे पूर्वाभास का रोद्रीगो से कुछ लेना-देना नहीं था.

तुम्हारे पूर्वाभास और तुम्हारे अन्तर्ज्ञान ने तुम्हारी बहुत मदद की है. तुम्हारे कई महत्वपूर्ण फैसले उन पर आधारित रहे हैं?

महत्वपूर्ण ही नहीं सारे के सारे.

सारे के सारे! क्या यह सच है?

सारे के सारे. हर दिन, हर समय मैं फैसला अपनी इन्ट्यूशन की मदद से करता हूं.

तुम्हारी सनकों के बारे में बात करते हैं. तुम्हारी सबसे बड़ी सनक क्या है?

मेरे सबसे पुरानी सनक है समय की पाबंदी. मैं जब बच्चा था तब भी समय का बहुत पाबंद था.

तुम कह रहे थे कि जब तुम टाइपिंग की गलती करते हो, तुम पूरा पन्ना दुबारा शुरू करते हो। यह सनक है या अंधविश्वास?

यह निहायत एक सनक है. मेरे लिए टाइपिंग की गलती शैली की गलती के बराबर है. (यह शायद लिखने का भय हो)

तुम्हारे भीतर कपड़ों को लेकर भी सनक है? मेरा मतलब है कोई ऐसे कपड़े जो अपने साथ बुरा भाग्य लाते हों और तुम्हें जिन्हें नहीं पहनते?

मुश्किल से. यदि उसमें `पावा´ होगा तो मैं उसे खरीदने से पहले जान जाऊंगा. अलबत्ता एक बार, मैंने मेरेसेदेस के कारण एक जैकेट पहनना बंद कर दिया. एक बार वह बच्चों को स्कूल से लेकर आ रही थी और उसने सोचा कि उसने मुझे घर की एक खिड़की पर खानेदार जैकेट पहने देखा. हालांकि मैं घर के दूसरे हिस्से में था. जब उसने मुझे यह बताया, मैंने उसके बाद उस जैकेट को पहनना बंद कर दिया-वैसे वह जैकेट मुझे पसंद है.

तुम्हारी रूचियों पर आया जाय, जैसा कि महिलाओं की पत्रिकाओं में होता है. तुमसे वही सवाल पूछना मनोरंजक है जो हम अपने कोलिम्बया में ब्यूटी क्वीनों से पूछते हैं. तुम्हारी सबसे प्रिय किताब कौन सी है?

ईडिपस रेक्स

तुम्हारा प्रिय संगीतकार?

बेला बारतोक

और चित्रकार?

गोया

किस फिल्म निर्देशक को तुम सबसे ज्यादा पसंद करते हो?

ऑरसन वेल्स को खासतौर पर `द इस्मॉर्टल स्टोरी´ के लिए और कुरोसावा को `रेड बीयर्ड´ के लिए

किस फिल्म में तुम्हें सबसे ज्यादा आनंद आया?

रोसेलिनी की 'Il Generale de la Roverse'

और कोई?

त्रूफो की `जूल्स एट जिम´

किस फिल्म पात्र का निर्माण तुम करना चाहते?

जनरल दे ला रोवेयर

कौन सा ऐतिहासिक पात्र तुम्हें सबसे रूचिकर लगता है?

जूलियस सीजर, पर केवल साहित्यक दृष्टिकोण से.

और कौन सबसे नापसंद है?

क्रिस्टोफर कोलम्बस. उसमें सचमुच `पावा´ है. `ऑटम ऑफ द पैट्रिआर्क´ का एक पात्र ऐसा कहता भी है.

तुम्हारे प्रिय साहित्यक हीरो?

गारगान्टुआ, एडमंड दान्ते और काउन्ट ड्रैकुला

कौन सा दिन नापसंद है?

इतवार

तुम्हारा पसंदीदा रंग पीला है हम जानते हैं पर पीले का कौन सा शेड?


मैंने एक दफे उसे जमैका से दोपहर तीन बजे दिखने वाले कैरिबियन के पीले के तौर पर बताया था.

('अमरूद की ख़ुशबू' के नाम से यह अनुवाद संवाद प्रकाशन से शीघ्र प्रकाश्य)